Dec ०४, २०२१ १४:१५ Asia/Kolkata
  • लेबनान सरकार की आड़ में क्यों हिज़बुल्लाह के पीछे पड़ा है सऊदी अरब?

लेबनान के सूचना व प्रसारणमंत्री जार्ज क़रदाही ने शुक्रवार को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। इससे पहले वे कह चुके थे कि अगर मेरे त्यागपत्र से लेबनान और सऊदी अरब के संबन्ध बेहतर होते हैं तो मैं हर समय इस काम के लिए तैयार हूं।

लेबनान के अलमयादीन टीवी चैनेल ने शुक्रवार को बताया कि जार्ज क़रदाही ने अपने फैसले से लेबनान के राष्ट्रपति मीशल औन को अवगत करवाया।

लेबनान की नजीब मीक़ाती सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनने से एक महीना पहले अगस्त में जार्ज क़रदाही ने क़तर के अलजज़ीरा टीवी चैनेल से बात करते हुए यमन के विरुद्ध सऊदी अरब के युद्ध को व्यर्थ बताया था।

उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा था कि जिस प्रकार से फ़िलिस्तीनियों और हिज़बुल्लाह को अपनी मातृभूमि की सुरक्षा का अधिकार है उसी प्रकार से यमनियों को भी अपनी रक्षा का पूरा अधिकार हासिल है।

क़रदाही के इस बयान को अरबी भाषा के संचार माध्यमों ने खूब प्रचारित किया।  उनके इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया में सऊदी अरब ने लेबनान से अपने राजदूत को वापस बुला लिया और लेबनान के राजदूत को 48 घण्टों के भीतर सऊदी अरब छोड़ने का आदेश जारी कर दिया।

वास्तव में सऊदी अरब के क्रोध का कारण यह नहीं था कि क़रदाही ने अपने बयान में यमन का समर्थन कर दिया था बल्कि रेयाज़ के क्रोध का कारण उनके बयान का वह हिस्सा था जिसमें उन्होंने हिज़बुल्लाह के बारे में कहा था।

सऊदी अरब को सबसे अधिक क्रोधित करने वाली बात यह है कि कोई लेबनान के प्रतिरोध संगठन हिज़बुल्लाह का समर्थन करे।  यही कारण है कि क़रदाही के बयान में सऊदी अरब ने अपनी प्रतिक्रिया में उन्हें ही बुराभला नहीं कहा बल्कि हिज़बुल्लाह के विरुद्ध अधिक ज़हर उगला।  वहां के संचार माध्यमों ने हिज़बुल्लाह के विरुद्ध बहुत सी निराधार बातें फैलाईं।

पिछले एक वर्ष के दौरान सऊदी अरब के विरुद्ध बोलने पर त्यागपत्र देने वाले क़रदाही दूसरे लेबनानी मंत्री हैं।  इससे पता चलता है कि सऊदी अरब, लेबनान को एक स्वतंत्र देश के रूप में नहीं देखता।  इससे पहले सऊदी अरब की ओर से लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री सअद अलहरीरी को रेयाज़ बुलाया गया जहां पर उनको यातनाएं दी गईं।

सऊदी अरब, लेबनान पर इतना अधिक दबाव बनाए रखता है कि 19 मई को जब लेबनान के तत्कालीन विदेशमंत्री ने सऊदी अरब के आलोचक पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी के बारे में कुछ कहा तो उनको अपने पद से त्यागपत्र देने पर विवश होना पड़ा था।

जार्ज क़रदाही का त्यागपत्र एसे हालात में दिया गया है कि जब फ़्रांसीसी राष्ट्रपति के नेतृत्व में एक बड़ा शिष्टमण्डल इस समय फ़ार्स की खाड़ी के देशों की यात्रा पर है।  उन्होंने अपना त्यागपत्र शायद उन तत्वों और गुटों को चुप कराने के लिए भी दिया है जो लेबनान की एकता और अखंण्डता को समाप्त करने के लिए इस देश में रहते हुए सऊदी अरब के लिए काम कर रह हैं जैसे समीर जाजा और उन जैसे कई अन्य लोग।

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