Dec ०४, २०२१ १५:५२ Asia/Kolkata

लेबनान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री जार्ज क़रदाही ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र दे दिया, इस त्यागपत्र के बाद फ़्रांस के राष्ट्रपति ने लेबनान के ख़िलाफ़ पैदा किए गये संकट के समाधान के बारे में सऊदी अधिकारियों से वार्ता के बारे में ख़बर दी है।

राजनैतिक टीकाकार अब्दुल हादी महफ़ूज़ का कहना है कि इस त्यागपत्र की मुख्य वजह, सऊदी अरब के साथ वार्ता के लिए फ़्रांसीसी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मीक़ाती के बीच हुआ समझौता थी लेकिन लेबनान में सऊदी अरब की साज़िशों का सिलसिला जारी है, मुख्य वजह यमन पर सऊदी अरब के हमले हैं कि जिनके बारे में सभी को पता है कि वे फ़्रांस सहित पश्चिमी हथियारों से किए जा रहे हैं और अब मैंक्रां से मुलाक़ात की मुख्य वजह हथियारों की बिक्री है, हो सकता है कि विदित रूप से कुछ और ही मामला हो लेकिन चार साल पहले पूर्व प्रधानमंत्री साद हरीरी के ज़बरदस्ती के त्यागपत्र का अनुभव दर्शाता है कि सऊदी अरब को लेबनान के हितो की कोई परवाह नहीं है।

 लेबनान और क्षेत्र के सोशल मीडिया पर लेबनानी सूचनामंत्री के इस क़दम की जमकर सराहना कीक जा रही है और सोशल मीडिया पर स्वतंत्र आदमी और महान इंसान जैसे हैश टैग ट्रेंड कर रहे हैं और यमन के जनांदोलन अंसारुल्लाह के प्रवक्ता मुहम्मद अब्दुस्सलाम ने ट्वीट किया कि यमन पर हमला करने वाले देशों ने मूर्खता करते हुए लेबनानी मंत्री जार्ज क़रदाही पर बहुत ज़ुल्म किया, सऊदी अरब की यही आदत है, वह दुश्मनी में इतना बढ़ गया कि उसने सारे लेबनान को अपना दुश्मन बना लिया और ख़ुद को नीच साबित किया जबकि लेबनान का यह मंत्री अपने राष्ट्रीय और देश प्रेमी दृष्टिकोण की वजह से यमन में महान बन गया।

 एक टीकाकार का कहना है कि जार्ज क़रदाही ने अपने मन से वह बात कही जो पूरा इलाक़ा कहना चाहता था, सऊदी अरब, यमन पर सात साल से हमले कर रहा है और 17 हज़ार लोगों के मारे जाने के बावजूद भी सऊदी अरब को कुछ हासिल नहीं हुआ और आख़िरकार बेइज़्ज़त होकर वह यमन से निकलेगा... सऊदी अरब के विदेशमंत्री के निरंतर इस बयान से कि लेबानान के साथ उनकी समस्या, जार्ज क़रदाही के बयान से आगे का मामला है, पता चलता है कि लेबनान में सऊदी अरब की साज़िशों का सिलिसिला जारी रहेगा, लेबनानी टीकाकारों का कहना है कि जार्ज क़रदाही के त्यागपत्र देने के बावजूद लेबनान के ख़िलाफ़ सऊदी अरब की साज़िशें ख़त्म नहीं होंगी और उसका लक्ष्य लेबनान के 2022 के संसदीय चुनावों को निशाना बनाना है। (AK)

 

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