Dec ०८, २०२१ १६:५६ Asia/Kolkata

बेरूत में आयोजित होने वाली इस्लामी प्रतिरोधी संचार माध्यमों के कार्यकर्ताओं की बैठक में ज़ायोनी शासन के साथ कुछ अरब देशों द्वारा संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों की निंदा की गई, इसमें 200 पत्रकारों, एडिटरों और प्रबंधकों ने भाल लिया।

ज़ायोनी शासन के साथ संबंधों को सामान्य बनाने का मुद्दा एक असमान्य मुद्दा है, यह स्पष्ट रूप से ग़द्दारी है, और इस प्रक्रिया में जनता की इच्छाओं को नज़र अंदाज़ किया गया है। इस ड्रामे में फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों के हनन में अमरीका की अहम भूमिका है। ...

ज़ायोनी शासन के साथ संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिश, कुछ अरब शासकों का विश्वासघाती क़दम है, लेकिन क्षेत्रीय लोग, फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों की रक्षा पर बल देते हैं। इस मार्ग में प्रतिरोधी मोर्चे के संचार माध्यमों ने हमेशा ही लोगों के मत का सम्मान किया है और दुनिया के सामने ज़ायोनियों के अत्याचारों को उजागर किया है। ...

फ़िलिस्तीनी आंदोलन हमास के वरिष्ठ सदस्य और प्रतिनिधि अहमद अब्दुल हादी ने इस सम्मेलन में कहा कि फ़िलिस्तीनियों और बैतुल मुक़द्दस के साथ ग़द्दारी करने वाले अरब शासकों का इतिहास में मुंह काला हो जाएगा। ...

संबंधों का सामान्यकरण का मुद्दा बहुत ही संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा है, अमरीकी इस तरह के प्रयासों के लिए भूमि प्रशस्त करके प्रतिरोध के हाथों अपनी और ज़ायोनी शासन की अपमानजनक हार पर पर्दा नहीं डाल सकते। ...

प्रतिरोधी संचार माध्यमों के इस सम्मेलन के समापन पर जारी होने वाले बयान में विश्व मानवाधिकार संगठनों से मांग की गई कि इस्राईल की जेलों में बंद फ़िलिस्तीनियों क़ैदियों की रिहाई के लिए और फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों की वापसी के लिए न्यायपूर्वक और सक्रिया भूमिका निभाएं।

इस बैठक में भाग लेने वालों ने बल देकर कहा कि इस्राईल के साथ संबंधों को सामान्य बनाने वाले कुछ अरब शासकों के इस क़दम से क्षेत्रीय लोगों की बैतुल मुक़द्दस की आज़ादी की इच्छा प्रभावित नहीं होगी।

हसन अज़ीमज़ादे, आईआरआईबी, बेरुत

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