Jan १३, २०२२ १३:३८ Asia/Kolkata
  • इस्राईली सैनिकों में ख़ुदकुशी का बढ़ता रुझान

इस्राईली अख़बार हयूम की रिपोर्ट के मुताबिक़, वर्ष 2021 में 31 ज़ायोनी सैनिकों की मौत हुई है, जिसमें से 11 ने ख़ुदकुशी की है।

इतनी बड़ी संख्या में इस्राईली सैनिकों के हताहत होने के कई कारण हो सकते हैं। लेकिन इसका सबसे महत्वपूर्ण कारण, ज़ायोनी शासन की नीतियां हैं। ज़ायोनी शासन एक सैन्य शासन है। इस्राईल हमेशा ही फ़िलिस्तीनियों और फ़िलिस्तीन के पड़ोसी देशों में नागरिकों और सैनिकों को निशाना बनाता रहता है और उन पर बमबारी करता रहता है, प्रतिरोधी मोर्चे के जवाबी हमलों में भी ज़ायोनी सैनिकों की मौत होती रहती है। 2021 में ग़ज्ज़ा पट्टी और इस्राईल के बीच हुए 12 दिवसीय युद्ध में 12 इस्राईली सैनिक हताहत और 330 अन्य घायल हुए थे।

किसी भी युद्ध के परिणाम, सिर्फ़ युद्ध जारी रहने तक ही सीमित नहीं होते हैं, बल्कि इसके मानसिक और सामाजिक परिणाम भी होते हैं, जिससे इस्राईली सैनिक हमेशा दबाव में रहते हैं और वह कभी इस स्थिति से उबर नहीं पाते हैं। इस्राईली सेना को निंरतर लड़ाईयों और जंगों का सामना है, जिससे उन पर भारी मानसिक दबाव पड़ता है और वे अवसाद का शिकार हो जाते हैं। इस्राईली सैनिकों की बड़ी संख्या में ख़ुदकुशी की एक अहम वजह भी यही है।

इसी दबाव और तनाव की वजह से इस्राईली सैनिकों में नशे की लत एक आम बात है। हालांकि सेना में कड़े नियमों के चलते नशे का शिकार होने वाले ज़ायोनी सैनिकों का कोई सही आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन इस्राईली सैनिकों और समाज में बढ़ते हुए ख़ुदकुशी के रुझान की एक बड़ी वजह यह है। 2010 से 2020 तक अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में 5380 लोगों ने ख़ुदकुशी की कोशिश की थी। इसका मतलब है कि हर साल 500 लोगों ने ख़ुदकुशी और अपने ही हाथों अपनी जान लेने की कोशिश की, इसमें 100 इस्राईली सैनिक शामिल हैं, हालांकि ख़ुदकुशी की कोशिश करने वाले हर व्यक्ति की जान नहीं गई।

फ़िलिस्तीन अल-यौम की रिपोर्ट के मुताबिक़, ख़ुदकुशी करने या ख़ुदकुशी का प्रयास करने वाले अधिकांश इस्राईली सैनिकों ने अपने भविष्य की अनिश्चितता के कारण ऐसा किया था। आंकड़ों के मुताबिक़, 2020 में 1710 ज़ायोनी सैनिकों ने मानसिक उपचार के लिए अनुरोध किया था, जिसमें से 26 सैनिकों की स्थिति बहुत ही चिंता जनक थी, जो कभी भी अपनी जान ले सकते थे।

आख़िर में ध्यान योग्य बिंदू यह है कि इस्राईली अधिकारी और सेना मरने वाले सैनिकों का सही आंकड़ा कभी भी सार्वजनिक नहीं करते हैं।      

 

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