Jan १८, २०२२ १२:०५ Asia/Kolkata
  • यमन के अल-हौसी आंदोलन ने यूएई पर हमला क्यों कर दिया?

सोमवार को यमन के अल-हौसी आंदोलन ने अबू-धाबी और दुबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और मुसफ़्फ़ाह तेल रिफ़ाइनरी जैसे रणनीतिक स्थानों पर ड्रोन विमानों और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है।

हमले में 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 6 अन्य घायल हो गए हैं।

2015 में सऊदी सैन्य गठबंधन द्वारा कि जिसमें यूएई भी शामिल है, यमन के ख़िलाफ़ छेड़े गए युद्ध के बाद से अबू-धाबी के ख़िलाफ़ अल-हौसी आंदोलन का यह अब तक का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है।

यहां हर किसी के दिमाग़ में यह सवाल उठ रहा है कि यमन के अल-हौसी आंदोलन ने यूएई के ख़िलाफ़ इतनी बड़ी कार्यवाही क्यों की है?

ग़ौरतलब है कि यूएई ने 2019 में यमन युद्ध में अपनी भूमिका कम करने और युद्ध के मोर्चे से अपने सैनिकों की बात कही थी। लेकिन इस घोषणा के बावजूद, यूएई युद्ध में भरपूर तरीक़े से शामिल है और अंसारुल्लाह या अल-हौसी आंदोलन के विरोधी लड़ाकों का समर्थन कर रहा है।

पिछले साल के आख़िरी महीनों में जब सऊदी सैन्य गठबंधन ने यमन के ख़िलाफ़ अपने हवाई हमले तेज़ किए तो 25 दिसम्बर 2021 को यमन जवाबी कार्यवाही करते हुए सऊदी पर मिलाइल से हमला कर दिया।

इस हमले में 3 लोगों की मौत हो गई थी और यमन के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता यहया सरी ने सऊदी अरब को चेतावनी दी थी कि अगर उसने अपने हमले बंद नहीं किए तो उसे और भी गहरे ज़ख़्म दिए जायेंगे।

हालिया हफ़्तों में यमन के तेल समृद्ध प्रांत मारिब में जारी लड़ाई में यूएई ने विद्रोही लड़ाकों का भरपूर समर्थन किया, जिससे अल-हौसियों की नाराज़गी बढ़ गई और उन्होंने यूएई को सबक़ सिखाने की ठान ली।

दो हफ़्ते पहले ही यमनी बलों ने यूएई का एक जहाज़ भी ज़ब्त किया था, जो सशस्त्र विद्रोहियों के लिए हथियार लेकर जा रहा था।

इसके बाद सना में अंसारुल्लाह आंदोलन के एक नेता ने कहा था कि हम यूएई को इसलिए लक्ष्य बना रहे हैं, क्योंकि वह फिर से हमारे ख़िलाफ़ लड़ने के लिए युद्ध के अग्रिम मोर्चे पर लौट आया है, जबकि हम मारिब पर पूर्ण निंयत्रण के बहुत क़रीब थे।

अल-हौसी आंदोलन के सूत्रा का कहना था कि हम यूएई को यह संदेश देना चाहते हैं कि अगर उसने अपने हमले बंद नहीं किए तो हम उसके भीतर जहां चाहेंगे, लक्ष्यों को निशाना बनायेंगे।

उसने कहाः हमारे यूएई में हर स्थान को लक्ष्य बनाने की शक्ति है, लेकिन वह हमारे हमलों को नहीं झेल पाएगा। अगर वे अमरीका और इस्राईल के लिए लड़ते रहेंगे तो हम सऊदी अरब पर किए गए हमले जैसा ही उस पर भी हमला करेंगे।

अंतरराष्ट्रीय संकट समूह के वरिष्ठ विश्लेषक पीटर सेलिसबरी का कहना हैः यूएई दावा कर रहा है कि अब वह यमन युद्ध में शामिल नहीं है, लेकिन यमनियों को वास्तविकता पता है। इसीलिए हौसियों का कहना है कि जब तक यमन पर हमले होते रहेंगे, तो वे सऊदी अरब और यूएई को निशाना बनाते रहेंगे। msm

टैग्स