Jan २४, २०२२ १३:०२ Asia/Kolkata

अरब संघ अपने गठन के मक़सद से पूरी तरह से हटता दिखाई दे रहा है जब अरब देशों ने मिलकर अरब संघ का गठन किया था तो उसका मुख्य लक्ष्य और दायित्य, अरब देशों के सामने मौजूद संकटों और समस्याओं को हल करना था लेकिन आज कुछ और ही नज़र आ रहा है।

अरब देशों की वर्तमान स्थिति विशेषकर 2011 में पैदा होने वाली स्थिति को देखने के बाद कुछ लोगों को अरब संघ की याद आई लेकिन अरब संघ ने संकटों के समाधान में कुछ भी नहीं किया और एक बार फिर यह साबित कर दिया कि इसका गठन बेकार और लाभहीन ही रहा।

इराक़, सीरिया, फ़िलिस्तीन, लेबनान,सूडान, लीबिया, अलजीरिया और मोरक्को जैसे देशों में पैदा होने वाली स्थिति इस बात का गवाह है कि यह संघ अपने गठन की मुख्य ज़िम्मेदारी से काफ़ी दूर हो चुका है और सऊदी अरब के हाथों का खिलौना बना हुआ है।

सात साल से यमन पर सऊदी अरब के नेतृत्व में अरब गठबंधन के भीषण हमले हो रहे हैं और इन वर्षों के दौरान अरब संघ ने न केवल इस संकट के समाधान के लिए को प्रयास किए बल्कि वह यमन पर हमला करने वाले देशों की नीतियों को बढ़ाने वाला ही साबित हुआ है।

इस परिधि में रविवार को संयुक्त अरब इमारात की अपील पर अरब संघ ने अपातकालीन बैठक बुलाई जिसमें संघ के स्थाई सदस्यों ने भाग लिया। इस बैठक का मक़सद, यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों की यूएई पर जवाबी कार्यवाही की निंदा करना था। बताया जाता है कि अरब संघ की अगली बैठक विदेशमंत्री स्तर पर होगी जिसमें यमन की राष्ट्रीय साल्वेशन सरकार के विरुद्ध फ़ैसला लिए जाने की आशा है और उम्मीद है कि अमरीका तथा अरब देशों से अपील की जाएगी कि वह यमन के जनांदोलन अंसारुल्लाह को ब्लैक लिस्ट करें।

यमन की नेश्नल साल्वेशन सरकार के विदेशमंत्रालय ने अरब संघ की बैठक पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कि 40 साल पहले ही राष्ट्रों के ज़मीन में यह संघ मर चुका है और आज भी यह बुरी तरह अलग अलग पड़ चुका है। (AK)

 

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