Jan २४, २०२२ २३:४१ Asia/Kolkata
  • क्यों बढ़ रही हैं दाइश की वापसी की संभावनाएं

हालिया दिनों में इराक़ और सीरिया में दाइश ने कुछ नई कार्यवाहियां की हैं जिनमें दसियों लोग हताहत और घायल हुए हैं।

दाइश के आतंकवादियों ने पिछले कुछ दिनों के दौरान इराक़ और सीरिया में कुछ एसी आतंकी कार्यवाहियां की हैं जिसके कारण इस आतंकी गुट की वापसी की संभावनाएं जताई जा रही हैं।  इन कार्यवाहियों से पता चलता है कि शायद वे आगे भी कुछ करने की फिराक़ में हैं।

कुछ दिन पहले इराक़ में हमला करके दाइश के आतंकवादियों ने इस देश के 11 सुरक्षा कर्मियों की हत्या कर दी जबकि सीरिया में एक जेल पर नियंत्रण करने के बाद कम से कम 120 लोगों को जान से मार दिया।  इस घटना में कई लोग घायल हो गए।  दाइश ने 2021 में इराक़ में 170 छोटी-बड़ी कार्यवाहियां अंजाम दीं।  दाइश की यह कार्यवाहियां इराक़ी अधिकारियों की चिंता का कारण बनी हैं।

इराक़ के भूतपूर्व प्रधानमंत्री हैदर अलआबेदी ने ट्वीट करके लिखा है कि आतंकवाद और राजनीतिक शून्य, देश की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है।  यहां पर यह सवाल पैदा होता है कि इस काल खण्ड में दाइश की गतिविधियां क्यों बढ़ी हैं।  आइए देखते हैं कि इसकी क्या भूमिका है।

हालिया कुछ दिनों के दौरान दाइश की बढ़ती गतिविधियों के पीछे का एक कारण इराक़ में पाया जाने वाला राजनैतिक शून्य भी है। दाइश सामान्यतः उन क्षेत्रों में अधिक सक्रिय रहता है जहां पर राजनीतिक शून्य पाया जाता और और एसी सरकार हो जो हर तरफ नज़र न रख सके।

इराक़ में संसदीय चुनाव हुए 4 महीनों का समय बीत चुका है लेकिन वहां पर अभी तक सरकार का गठन नहीं हो पाया है।सीरिया के उत्तरी क्षेत्रों में अमरीका और तुर्की के सैनिकों की उपस्थिति के कारण वहां पर सीरिया की केन्द्रीय सरकार की पकड़ उतनी मज़बूत नहीं है जितनी होनी चाहिए।

इसके अलावा इराक़ में दाइश ने हमले उस समय बढ़ाए हैं जब वहां से अमरीकी सैनिकों की वापसी की समय सीमा निकट आई है।  अमरीकी एसे में यह तर्क पेश करेंगे कि जब हमारी वापसी की तिथि के साथ ही दाइश ने हमले तेज़ कर दिये जो फिर हमारे इराक़ से चले जाने के बाद वे क्या नहीं करेंगे।  इस बहाने से वे अधिक समय इराक़ में गुज़ारना चाह रहे हैं।  कुछ जानकारों का कहना है कि दाइश की कार्यवाहियां उन्हीं के इशारों पर हो रही हैं ताकि वे अपने रहने का औचित्य दर्शा सकें।

टीकाकारों का कहना है कि हो सकता है कि समय-समय पर दाइश की गतिविधियों में वृद्धि हो लेकिन कभी भी एसा नहीं होगा जैसा दाइश ने इराक़ और सीरिया में 2014 में किया था।  जैसाकि हम पहले बता चुके हैं कि राजनैतिक शून्य के कारण ही दाइश की इतनी हिम्मत बढ़ी है लेकिन जैसे ही यह शून्य समाप्त होगा तो उसी के साथ वे समस्याएं भी बाक़ी नहीं रहेंगी जो उसके साथ लगी हुई हैं।

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