Jan २९, २०२२ १२:१७ Asia/Kolkata

संयुक्त राष्ट्र संघ में सीरिया के स्थाई राजदूत बस्साम सब्बाग़ ने सुरक्षा परिषद की बैठक में हसका प्रांत पर आतंकवादी गुट दाइश के हमले की ओर इशारा करते हुए कहा कि वाशिंग्टन, सीरिया में दाइश को दोबारा ज़िंदा करना चाहता है।

उत्तरी सीरिया में दस दिनों से अजीबो ग़रीब घटनाएं घट रही हैं जिनको देखने से पता चलता है कि आतंकवादी गुट दाइश इन घटनाओं का मुख्य खिलाड़ी रहा है।  

आतंकवादी गुट दाइश ने गुरुवार को सीरिया के उत्तरी प्रांत हसका की ग़वीरान जेल पर हमला कर दिया था। इस जेल पर सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्स के छापामारों का नियंत्रण था। इस हमले के बाद भीषण झड़पें शुरु हो गयीं लेकिन झड़पों का अंदाज़ अलग ही था, दोनों ही पक्षों में लड़ने की ताक़त है और लगभग एक ही तरह से दोनों पक्ष एक दूसरे पर हमले कर रहे थे।

बताया जाता है कि इन झड़पों में दोनों तरफ़ से 150 से 230 लोग मारे गये। इसके अलावा आतंकवादी गुट दाइश ने सैकड़ों छोटे बच्चों को जेल के आसपास इंसानी ढाल के रूप में बंधक बना लिया है। संयुक्त राष्ट्र संघ की बच्चों की संस्था का कहना है कि संभव है कि छोटी उम्र के बच्चे नुक़सान उठाएं या ज़ोरज़बरदस्ती की वजह से हमलावरों के लिए काम करने लगे।

महत्वपूर्ण बिन्दु यह है कि ग़वीरान जेल पर दाइश का हालिया हमला, हालिया वर्षों में इस आतंकी गुट के महत्वपूर्ण कार्यों में से एक था, यही वजह है कि टीकाकारों का ध्यान इस ओर ख़िंच गया।

टीकाकारों का ख़याल है कि दाइश इस कार्यवाही यह संदेश देना चाहता है कि वह इससे भी जटिल और ख़तरनाक कार्यवाही करने की ताक़त रखता है।  

जेहादी ग्रुप के मामले के टीकाकार अयमन जवाद तमीमी का कहना है कि यह हमला वर्ष 2019 और दाइश की सरकार के पतन के बाद सबसे जटिल हमला था। इस कार्यवाही की तुलना वर्ष 2014 में इस गुट की कार्यवाही से की जानी चाहिए जब उसने सीरिया और इराक़ के एक बड़े भाग पर नियंत्रण कर लिया था। दाइश और युद्ध के मामले के शोधकर्ता चार्ली वेन्टर का कहना है कि हालिया कार्यवाही, दाइश की ओर से शक्ति प्रदर्शन थी और इस तरह से उसने अपने समर्थकों को यह संदेश पहुंचा दिया कि वह गुट अभी भी अपने पैरों पर खड़ा है और कार्यवाही के लिए आवश्यक हथियारों और लड़ाकों से संपन्न है।  

 

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