May १४, २०२२ २०:५० Asia/Kolkata
  • सऊदी अरब में दो अन्य को फांसी

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मांग करने वाले दो सऊदी नागरिकों को इस देश में फांसी दे दी गई।

अलअहद के अनुसार सऊदी अरब के अधिकारियों ने क़तीफ़ के रहने वाले दो बंदियों को फांसी देदी जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के आरोप में जेल में थे।

"मुहम्मद ख़ज़र अलअवामी" और "हुसैन आलेबू अब्दुल्लाह" को फ़ांसी की सज़ा दी गई।  सऊदी अरब में हर साल बहुत से सरकार के विरोधियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष के बहाने मौत की सज़ा दे दी जाती है।

इस देश में इतने अधिक लोगों को मौत की सज़ा देने के कारण मानवाधिकार संगठन हमेशा की सऊदी अरब की सरकार की आलोचना करते आ रहे हैं।  सऊदी अरब की सरकार ने कुछ समय पहले विभिन्न आरोप लगाकर 81 लोगों को फांसी की सज़ा दी थी जिनमें से 40 का संबन्ध वहां के शिया बाहुल्य क्षेत्र क़तीफ़ से था।

पिछले ढाई महीनों के दौरान सऊदी अरब में 100 लोगों को फांसी दी जा चुकी है।  पिछले साल इसी दौरान सऊदी अरब में 69 लोगों को मौत की सज़ा दी गई थी।  सऊदी अरब में सन 2019 में 184 लोगों को फांसी दी गई थी।

याद रहे कि सऊदी अरब में जिन लोगों को मृत्युदंड दिया जाता है उनमें से आधे राजनीतिक बंदी होते हैं।  वहां पर सामान्तः राजनीतिक कारणों से सरकार विरोधियों को फांसी दी जाती है। यही नहीं जिन लोगों को राजनीतिक कारणों से फांसी दी जाती है उसके औचित्य में यह कहा जाता है कि आतंकवाद से मुकाबले के तहत इन लोगों को फांसी दी जाती है।  सऊदी अरब की तानाशाही सरकार पर आपत्ति जताना अपराध है जिसकी सज़ा लंबे समय तक जेल में रहने बाद फांसी के फंदे पर लटकना है।

जिस समय मुहम्मद बिन सलमान, सऊदी युवराज बने थे उस समय उन्होंने कहा था कि इस देश में मृत्युदंड दिये जाने वाले व्यक्तियों की संख्या में कमी की जाएगी परंतु उनका यह कथन केवल ज़बान की सीमा तक था। व्यवहारिक रूप से इसका उल्टा हुआ है अर्थात सऊदी अरब में मृत्युदंड पाने वाले व्यक्तियों की संख्या में ध्यान योग्य वृद्धि हो गयी है।

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