May १६, २०२२ १९:४७ Asia/Kolkata

.....लेबनान के संसदीय चुनावों में हिज़्बुल्लाह के एलायंस की जीत....इस बार लेबनान के शीया मतदाताओं का टर्न आउड 2018 की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक रहा और उनकी मतदान दर 60 प्रतिशत रही।.

....हिज़्बुल्लाह के नेता ने कहा कि अमरीका और इलाक़े में अमरीकी घटकों की ओर से दबाव बहुत बढ़ गया था। मगर इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन के पक्ष में जनता के भरपूर समर्थन ने अमरीका की योजनाओं पर पानी फेर दिया। अलग अलग सभाओं में हिज़्बुल्लाह प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह की तक़रीरों का भी बहुत ज़्यादा असर हुआ।....लेबनान के गृह मंत्री बस्साम मौलवी ने कहा कि लेबनान में चुनावों में जनता की भागीदारी 41 प्रतिशत रही।....एक मतदाता का कहना था कि देश की सुन्नी आबादी अपने कुछ नेताओं से बहुत निराश है।

फ़ुआद सिन्यूरा पर 11 अरब डालर के भ्रष्टाचार का आरोप है इसके बावजूद उनके एलायंस ने उम्मीद लगा रखी थी कि चुनावों में उन्हें विजय मिलेगी।...देश के ईसाई दल के नेता जिबरान बासिल का कहना था कि इस बार के चुनावों में जो नतीजा आया है उससे अमरीका और सऊदी अरब की योजना पूरी तरह नाकाम हो गई।....हमारी लड़ाई राजनैतिक दलों से नहीं थी बल्कि हमारा मुक़ाबला अमरीका से था। गत 17 अकतूबर से हमारी यह लड़ाई शुरू हो चुकी है।

अमरीका ने लेबनान को आर्थिक पहलू से ध्वस्त कर देने की कोशिश की ताकि हम यह चुनाव रद्द करने पर मजबूर हो जाएं। मगर अमरीका की योजना नाकाम रही। लेबनान के संसदीय चुनावों में 128 सीटों के लिए 718 उम्मीदवार मैदान में थे। जनता ने चार साल के लिए अपने प्रतिनिधियों का चयन किया है। अब सांसदों का पहला काम यह होगा कि देश के राष्ट्रपति से बातचीत करेंगे और नए प्रधानमंत्री को नामज़द किए जाने और नई सरकार के गठन के विषय काम किया जाएगा। बैरूत से आईआरआईबी के लिए हसन अज़ीमज़ादे की रिपोर्ट      

 

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