May २१, २०२२ १०:५६ Asia/Kolkata
  • फ़िलिस्तीनियों की अरब देशों से उम्मीद ख़त्म हो गयी, प्रतिरोध ने लेबनान को स्वतंत्र करायाः सैयद हसन नसरुल्लाह

लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह का कहना है कि फ़िलिस्तीन को अब अरब देशों से कोई उम्मीद नहीं रही।

हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह ने शुक्रवार को हिज़्बुल्लाह के सीनियर कहान्डर मुस्तफ़ा बद्रुद्दीन की शहादत की छठीं बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि फ़िलिस्तीन को अब अरब देशों का इंतेज़ार नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रतिरोध ने लेबनान को स्वतंत्र कराया है।  

सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने संबोधन में क्षेत्रीय और लेबानन के मुद्दों पर रोशनी डाली और कहा कि अरब देशों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के सीनियर कमान्डर मुस्तफ़ा बद्रुद्दीन 13 मई 2016 को सीरिया की राजधानी दमिश्क़ के एक उपनगरीय क्षेत्र  में सैन्य एयरपोर्ट पर तकफ़ीरी आतंकियों के राकेट और तोपख़ाने के हमले में शहीद हो गये थे।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि अरब जगत कभी भी लेबनान को ज़ायोनी अतिक्रमण से बचा नहीं सकता। उन्होंने कहा कि शहीद बद्रुद्दीन एक बुद्धिमान कमान्डर थे जिन्होंने सीरिया में ज़ायोनी दुश्मन और तकफ़ीरी गुटों के विरुद्ध अनेक रणक्षेत्रों में भाग लिया।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि इस्राईली दुश्मनों के मुक़ाबले में लेबनान का प्रतिरोध 1982 के हमले के तुरंत बाद शुरु हुआ था। सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि शहीद बद्रुद्दीन का संबंध प्रतिरोध की उस पीढ़ी से है जिसने इस्राईली दुश्मन से लड़ने के लिए अरब देशों के आधिकारिक समर्थन का इंतेज़ार नहीं किया।

लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के महासचिव का कहना कि अरब देशों की सरकारें कभी भी लेबानन को इस्राईली हमलों से सुरक्षित नहीं रख सकतीं क्योंकि वह उस समय विफल रहीं जब वह शक्तिशाली और एकजुट थीं।

हिज़्बुल्लाह के सेक्रट्ररी जनरल ने कहा कि लेबनानी सरकार भी 1982 में राष्ट्र को इस्राईली हमलों से बचाने में विफल रही यहां तक कि 17 कई को दुश्मनों के साथ हथियार डालने के समझौते पर हस्ताक्षर कर लिए।

सैयद हसन नसरुल्लाह का कहना था कि हिज़्बुल्लाह, लेबनान की रक्षा और उसकी पहचान और सुरक्षा के लिए सबसे दृढ़ संकल्पित संगठन है।  

सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि फ़िलिस्तीनी राष्ट्र ने वर्षों पहले ही अपना फ़ैसला कर लिया था और वर्तमान समय में वह सारे मोर्चों और मैदानों पर मौजूद है।

उनका कहना था कि फ़िलिस्तीनी राष्ट्र को अब अरब देशों, अरब संघ, इस्लामी सहयोग संगठन, संयुक्त राष्ट्र संघ और सुरक्षा परिषद की आवश्यकता नहीं है। (AK)

 

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