May २१, २०२२ १४:३१ Asia/Kolkata

सैफ़ुल कुद्स की लड़ाई को एक साल बीत चुका है लेकिन उस 12 दिवसीय जंग के परिणाम अब तक ख़त्म नहीं हुए हैं।

सैफ़ुल कुद्स की लड़ाई 10 मई, 2021 को शुरू हुई और 21 मई को अर्थात 12 दिन के बाद समाप्त हुई। इस युद्ध को एक साल बीत चुका है और अवैध अधिकृत क्षेत्रों और फिलिस्तीन के हालात तथा ज़ायोनी शासन और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष के आयाम में कुछ बदलाव अवश्य हुआ है।

अवैध अधिकृत क्षेत्रों में बिनयामिन नेतेनयाहू ने सत्ता में बाक़ी रहने के लिए फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ जंग शुरु की लेकिन 12 साल के बाद आख़िरकार उन्हें सत्ता से हाथ धोना ही पड़ा और प्रधानमंत्री पद से नेतेनयाहू को हटाने के लिए यह जंग उनके विरोधियों के हाथ अच्छा बहाना बन गयी। नेतन्याहू के सत्ता से हटने के बाद इस्राईल में एसा मंत्रीमंडल बना जो शुरु से ही टूटफूट का शिकार नज़र आया।

नेफ्ताली बेनेत ने कैबिनेट की बागडोर संभाली है जिसमें वामपंथी, उदारवादी और अरब पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। नेफ़्ताली बेनेत खुद भी दक्षिणपंथी कट्टरपंथी पार्टी पामीना का नेतृत्व कर रहे हैं। इस्राईल में बहुत ही कम कैबिनेट रहा है जिसमें इतने अलग तरह के और व्यक्तिगत संघर्षों से भरे हुए लोग शामिल रहे हों। प्रधानमंत्री का पद भी नेफ़्ताली बेनेत और यायीर लापेद के बीच घूमता रहेगा, लापीद नवम्बर 2023 में बेनेत से यह पद ले लेंगे।

गठबंधन मंत्रिमंडल से 6 अप्रैल को ईदियत सुलैमान के इस्तीफ़े से विपक्ष की उम्मीदें फिर से जग उठी। ईदियत सुलैमान के इस्तीफ़े का नेतन्याहू ने भरपूर स्वागत किया।

सैफ़ुल कुद्स की लड़ाई के एक साल बाद, इस्राईल का खिचड़ी गठबंधन के मंत्रीमंडल की स्थिति और भी ख़राब नज़र आ रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि बेनेत-लापिद कैबिनेट की इस दुर्दशा का सेहरा फ़िलिस्तीनियों के सिर जाता है।

नेतन्याहू की कैबिनेट की तरह इस कैबिनेट ने भी फिलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसा की नीति अपनाई और यहां तक हिंसाओं के बाज़ार को और भी गर्म कर दिया जिसकी वजह से अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में शहादतप्रेमी कार्यवाहियां देखी गयीं और दो महीने में 5 शहादत प्रेमी कार्यवाही की गयी जिसमें 19 ज़ायोनी मारे गए और दस अन्य घायल हो गए। (AK)

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