Jun २६, २०२२ १२:५३ Asia/Kolkata

9 वर्षों के अंतराल के बाद क़तर के नरेश, आधिकारिक यात्रा पर मिस्र की राजधानी क़ाहिरा पहुंचे हैं।

शेख तमीम बिन हम्द आले सानी का क़ाहिरा में मिस्री राष्ट्रपति अब्दुल फ़त्ताह अस्सीसी ने स्वागत किया।

सन 2011 से मिस्र और क़तर के संबन्धों में तनाव आरंभ हो गया था।  इसका मुख्य कारण यह था कि मिस्र में जनवरी 2011 से इस देश के तत्कालीन राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के विरुद्ध प्रदर्शनों का क्रम आरंभ हो चुका था।  क़तर के अलजज़ीरा टीवी चैनेल ने इन विरोध प्रदर्शनों का व्यापक कवरेज किया।  बाद में मिस्र के मुस्लिम ब्रदरहुड ने इन प्रदर्शनों का नेतृत्व अपने हाथों में ले लिया।  उस समय क़तर की सरकार ने इसका खुलकर समर्थन किया। यही मुद्दा मिस्र की सेना और क़तर के बीच संबन्धों में तनाव का कारण बना। 

बाद के चरण में जब सऊदी अरब और क़तर के संबन्धों में तनाव पैदा हुआ तो मिस्र ने सऊदी अरब, यूएई, और बहरैन का साथ देते हुए क़तर से संबन्ध विच्छेद कर लिए।  यह विषय मिस्र और क़तर के बीच अधिक तनाव का कारण बना।  जनवरी 2021 में जो बाइडेन के वाइट हाउस पहुंचने के बाद मिस्र, सऊदी अरब, यूएई, और बहरैन ने क़तर के साथ कूटनीतिक संबन्धों को सामान्य बनाने के प्रयास आरंभ कर दिये। क़तर के नरेश की हालिया मिस्र यात्रा को इसी परिप्नेक्ष्य में देखा जा सकता है।

शेख तमीम बिन हम्द आले सानी की यह पहली आधिकारिक मिस्र यात्रा है।  हालांकि इससे पहले वे 2015 में अरब शिखर सम्मेलन में भाग लेने के उद्देश्य से मिस्र के शर्मुश्शैख़ गए थे किंतु यह उनकी आधिकारिक मिस्र यात्रा नहीं थी।  इस हिसाब से क़तर नरेश की दो दिवसीय मिस्र यात्रा को 9 वर्षों के बाद क़तर के किसी शासक की मिस्र की आधिकारिक यात्रा माना जा रहा है।  इस बार उनको आधिकारिक रूप में मिस्र के राष्ट्रपति की ओर से आमंत्रित किया गया है।  इससे पता चलता है कि दोनो देशों के बीच तनाव के बादल छंट रहे हैं।

राजनैतिक टीकाकारों का कहना है कि अब्दुल फ़त्ताह अस्सीसी के आधिकारिक निमंत्रण पर क़तर के शासक शेख तमीम बिन हम्द आले सानी की क़ाहिरा यात्रा का आर्थिक महत्व अधिक है।  पांच महीनोंं पहले आरंभ हुए यूक्रेन युद्ध के बाद मिस्र को कई प्रकार की आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।  मिस्र की वर्तमान आर्थिक समस्याओं में सबसे महत्वपूर्ण समस्या देश में खाद्य पदार्थों का अभाव है।

अभी हाल ही में सऊदी अरब के युवराज मुहम्मद बिन सलमान मिस्र आए थे।  उन्होंने क़ाहिरा में कई आर्थिक समझौतों पर हस्ताक्षर किये।  इस बात की आशा की जा रही है कि शेख तमीम बिन हम्द आले सानी की मिस्र यात्रा के दौरान इसी प्रकार के कुछ आर्थिक समझौते हो सकते हैं।

क़तर नरेश की इस यात्रा को उनकी कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि क़तर पर कूटनीतिक दबाव बनाने में मिस्र को सफलता नहीं मिल पाई बल्कि उसने एक प्रकार से हार मानते हुए क़तर नरेश को अपने यहां आने का आधिकारिक निमंत्रण दिया और साथ ही अपनी आर्थिक समस्याओं को पेश करके उसने इनडायरेक्ट वे में अपना संदेश भी पहुंचा दिया है।

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