Jun २७, २०२२ १७:३५ Asia/Kolkata

लेबनान के राष्ट्रपति मीशल औन ने 23 जून को 66 वर्षीय नजीब मीक़ाती को नई सरकार के गठन की ज़िम्मेदारी सौंपी है।

नजीब मीक़ाती सन 2021 से लेबनान के अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में अपनी ज़िम्मेदारियां निभा रहे हैं।  उनकी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी, देश में संसदीय चुनाव का आयोजन कराना था।  15 मई 2022 को लेबनान में संसदीय चुनाव आयोजित हुए।  अब अगले चार वर्षों के लिए मीक़ाती को लेबनान का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है।

वर्तमान समय में लेबनान के प्रधानमंत्री को कई प्रकार की चुनौतियों का सामना है जिनमें आर्थिक चुनौती सबसे महत्वपूर्ण है।  लेबनान की संसद में 128 सदस्य हैं।  उन्होंने 54 मतों से अपने प्रतिद्वदवी सालेह नवाफ़ सलाम को परास्त किया जो पहले राष्ट्रसंघ में लेबनान के प्रतिनिधि रह चुके हैं।  नए प्रधानमंत्री के चुनाव में 46 प्रतिनिधियों ने निगेटिव वोटिंग की।  इससे पता चलता है कि नजीब मीक़ाती को सऊदी अरब और उसके घटकों का समर्थन हासिल नहीं है।  सालेह नवाफ़ सलाम को सऊदी अरब का खुला समर्थन प्राप्त था।

128 सदस्यों में से 78 का समर्थन हासिल न करने के कारण उनको नए मंत्रीमण्डल के गठन में भी समस्याएं आ सकती हैं।  लेबनान में कुछ पदों को पहले से ही रिज़र्व हैं।  एसे में मंत्रीमण्डल के गठन के समय मीक़ाती को बहुत एहतियात से काम लेना होगा।  इस बारे में लेबनान के एक राजनैतिक टीकाकार वाएल नज्म कहते हैं कि संवैधानिक ढंग से लेबनान की संसद में विशेष किये जाने और विचारों में मतभेदों के कारण नए मंत्रीमाण्ड के गठन का काम आसान नहीं होगा।

कुछ जानकारों का यह कहना है कि नए मंत्रीमण्डल के गठन में अधिक समय लगने के दृष्टिगत हो सकता है कि नजीब मीक़ाती पिछले मंत्रीमण्डल में थोड़ा सा फेरबदल करके उसी को ही फिर से पेश करें।  वैसे संसद की सहमति से यह काम संभव है क्योंकि पुराने मंत्री पहले की संसद से समर्थन हासिल कर चुके हैं।  लेबनान के प्रधानमंत्री के सामने एक अन्य संवैधानिक चुनौती इस देश के नए राष्ट्रपति का चयन करने की है।

लेबनान में राष्ट्रपति 6 वर्षों के लिए चुना जाता है।  इस देश के वर्तमान राष्ट्रपति का कार्यकल 31 अक्तूबर 2022 को समाप्त हो रहा है।  लेबनान में 29 महीनों तक चलने वाले संवैधानिक संकट के बाद 2016 में मीशल औन को इस देश का राष्ट्रपति नियुक्त किया गया था।  लेबनान के संविधान के अनुसार इस देश का राष्ट्रपति ईसाई होना चाहिए।  जिन संवेधानिक चुनौतियों का उल्लेख किया गया उनके अतिरिक्त भी लेबनान को इस समय कुछ अन्य ज्वलंट समस्याओं का सामना है जिसमें आर्थिक संकट सर्वोपरि है।

पिछले ढाई वर्षों से लेबनान को गंभीर आर्थिक संकट का सामना है।  इसके अतिरिक्त डाॅलर के मुक़ाबले में लेबनान की मुद्रा की वैल्यु घटती जा रही है।  वहां पर ईंधन और दवाओं की कमी का मुद्दा भी गर्म है।  लेबनान में खाद्य पदार्थों के मूल्यों में बहुत तेज़ी से वृद्धि हो रही है।

लेबनान के वर्तमान आर्थिक संकट की गंभीरता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि विश्व बैंक ने इसे शताब्दी का सबसे गंभीर आर्थिक संकट बताया है।  लेबनान में नए मंत्रीमण्डल केे गठन और नए राष्ट्रपति के चयन में विलंब से वहां पर आर्थिक संकट, और अधिक गहरा सकता है।

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