Aug १०, २०२२ १८:०३ Asia/Kolkata

दोस्तो जैसाकि आपको ज्ञात है कि जायोनी सेना ने गत शुक्रवार को ग़ज्ज़ा पट्टी पर हमला करके दर्जनों फिलिस्तीनियों को शहीद व घायल कर दिया था।

फिलिस्तीन से जो सूचनायें मिली हैं उनके अनुसार इस तीन दिवसीय युद्ध में 45 फिलिस्तीनी शहीद और 360 से अधिक घायल हुए हैं। शहीद होने वालों में 15 बच्चे भी शामिल हैं।

जायोनी शासन अपने संचार माध्यमों के ज़रिये इस बात का प्रचार कर रहा है कि इस तीन दिवसीय युद्ध में हमास ने जेहादे इस्लामी का साथ नहीं दिया किन्तु जायोनी शासन जिस वास्तविकता की अनदेखी कर रहा है वह यह है कि इस युद्ध में जेहादे इस्लामी ने अकेले इस्राईल के अपराधों का मुंहतोड़ जवाब दिया इस प्रकार से कि हमलावर इस्राईल तीन दिन के भीतर ही होश में आकर युद्ध विराम कर लिया।

यही नहीं जेहादे इस्लामी ने युद्धविराम की अपनी शर्तों को इस्राईल को मानने पर बाध्य कर दिया। इस आधार पर जो प्रचार किया जा रहा है उसके विपरीत इस तीन दिवसीय युद्ध का परिणाम कोई विशेष इस्राईल के हित में नहीं रहा विशेषकर इसलिए कि जेहादे इस्लामी ने इस आंदोलन के एक वरिष्ठ कमांडर को स्वतंत्र करने पर भी इस्राईल को बाध्य कर दिया।  

इसी प्रकार इस तीन दिवसीय युद्ध से इस्राईल के कार्यवाहक प्रधानमंत्री याइर लैपिड के वास्तविक चेहरे से विश्व जनमत अधिक स्पष्ट हो गया।  चूंकि लैपिड का कोई सैनिक अतीत नहीं है इसलिए बहुत से लोग यह सोचते थे कि लैपिड दूसरे जायोनी नेताओं से भिन्न हैं और वे अतिवादी सोच नहीं रखते हैं परंतु तीन दिवसीय युद्ध ने स्पष्ट कर दिया कि लैपिड न केवल नेतनयाहू और दूसरे अतिवादी जायोनी नेताओं से भिन्न नहीं हैं बल्कि उनसे भी बदतर और अतिवादी हैं क्योंकि जायोनी सेना ने उन्हीं के आदेश से तीन दिवसीय युद्ध आरंभ किया था जिसके दौरान 15 मासूम बच्चों सहित 45 फिलिस्तीन शहीद हो गये और 360 से अधिक घायल हो गये। घायल होने वालों में सबसे अधिक संख्या बच्चों की है।

इसी प्रकार इस तीन दिवसीय युद्ध के दौरान फिलिस्तीनियों के एक हज़ार मकानों को नुकसान पहुंचा। चूंकि ग़ज्जा पट्टी का क्षेत्रफल 350 वर्ग किलोमीटर है और उसकी जनसंख्या लगभग 20 लाख से अधिक है इस बात के दृष्टिगत वहां की अधिकांश जनसंख्या जवान, नौजवान और बच्चे हैं इसलिए घायल होने वालों में अधिकांश बच्चे ही हैं और ग़ज़्ज़ा पट्टी में सैनिक एवं गैर सैनिक लक्ष्यों को अलग करना बहुत कठिन बल्कि संभव नहीं है। इसी वजह से जब भी इस्राईल गज्ज़ा पट्टी पर हमला करता है उसके पाश्विक हमलों में अधिकतर आम लोग और बच्चे अधिक मारे जाते हैं।

यद्यपि याइर लैपिड इस्राईल के भीतर स्वंय को विजयी समझ रहे हैं और अतिवादी जायोनियों के मध्य उनकी लोकप्रियता अधिक हो गयी है परंतु वास्तविकता यह है कि इस तीन दिवसीय युद्ध में भी जायोनी शासन को मुंह की खानी पड़ी है और उसके अंदर जेहादे इस्लाम के जवाबी मिसाइलों व राकेटों को सहन करने की अधिक ताकत नहीं थी इसलिए तुरंत जेहादे इस्लामी की मांगों को स्वीकारते हुए उसने युद्ध विराम कर लिया।

कुल मिलाकर सैनिक और नैतिक दृष्टि से लैपिड युद्ध हार गये और अगर लैपिड अच्छी पोज़िशन में होते तो वे कभी भी युद्ध विराम न करते और इस्राईली सेना के अपराधों के जारी रहने पर बल देते परंतु मिस्र की मध्यस्थता में उन्होंने जेहादे इस्लामी आंदोलन की शर्तों को स्वीकार करके विश्व जनमत के सामने अपनी हार कबूल कर ली। लेबनान के इस्लामी आंदोलन हिज्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह के उस बयान को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा था कि इस्राईल के अंदर इससे अधिक जेहादे इस्लामी के मिसाइलों को बर्दाश्त करने की ताक़त नहीं है। MM

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