Aug १६, २०२२ १०:०७ Asia/Kolkata
  • सलमा अलशहाब की यह तस्वीर, वर्ष 2014 में रियाज़ में अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले में एक साक्षात्कार के दौरान ली गई थी।
    सलमा अलशहाब की यह तस्वीर, वर्ष 2014 में रियाज़ में अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले में एक साक्षात्कार के दौरान ली गई थी।

सऊदी अरब में एक समाजिक शिया कार्यकर्ता महिला को इस देश की दिखावटी अदालत ने 34 साल की सज़ा सुनाई है।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, सऊदी अरब के आले सऊद शासन में जब से मोहम्मद बिन सलमान युवराज बने हैं तब से वह लेखकों और सिविल एक्टिविस्टों के ख़िलाफ़ हर दिन कड़ी से कड़ी कार्यवाही कर रहे हैं। अब तक उन्होंने दसियों धर्मगुरुओं, राजकुमारों, लेखकों, कवियों और नागरिक एवं धार्मिक कार्यकर्ताओं को विभिन्न बहानों से ग़िरफ़्तार करवा कर जेल भेज चुके हैं। गिरफ़्तार किए गए लोगों में दर्जनों को मौत की सज़ा भी दी जा चुकी है। इस बीच वॉशिंग्टन में स्थित "फ्रीडम इनिशिएटिव" नामक एक क़ानूनी संगठन ने सूचना दी है कि सऊदी अरब की एक अदालत ने सिविल एक्टिविस्ट सलमा शहाब को 34 साल क़ैद की सज़ा सुनाई है।

सऊदी अरब की जेलों में आले सऊद शासन के अत्याचारों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले कार्यकर्ताओं की हर दिन बढ़ती संख्या

"फ्रीडम इनिशिएटिव" की रिपोर्ट के अनुसार सलमा शहाब पिछले वर्ष जब सऊदी अरब विदेश की यात्रा से पहुंची थीं तभी उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था। आले सऊद द्वारा उन्हें गिरफ़्तार करने से पहले शहाब ने फ़िलिस्तीन के मुद्दे पर और सऊदी अरब में महिलाओं के अधिकारों पर कई ट्वीट किए थे। सलमा शहाब ने इसी तरह सऊदी अरब की जेलों में क़ैद राजनीतिक कार्यकर्ताओं की आज़ादी की भी मांग की थी। फ्रीडम इनिशिएटिव ने बताया है कि सलमा शहाब पूर्वी सऊदी अरब की रहने वाली एक शिया मुस्लिम महिला हैं। उनके ख़िलाफ़ जो अदालत ने फ़ैसला सुनाया है वह सऊदी अरब के इतिहास में किसी महिला नागरिक कार्यकर्ता को मिलने वाली अब तक की सबसे लंबी सज़ा है। (RZ)   

हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए

हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन कीजिए

हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!

ट्वीटर पर हमें फ़ालो कीजिए 

फेसबुक पर हमारे पेज को लाइक करें

टैग्स