Aug १८, २०२२ १५:१२ Asia/Kolkata

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान और इस्राईल के नस्लभेदी प्रधानमंत्री यायीर लापीद ने टेलीफ़ोनी वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों तथा क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार विमर्श किया।

इसी मध्य ज़ायोनी प्रधानमंत्री ने तुर्की के संबंधों को सामान्य बनाने और दोनों पक्षों के बीच राजदूतों को भेजने के बारे में ख़बर दी और कहा कि तुर्की और इस्राईल ने पूरी तरह से संबंधों को सामान्य करने और अंकारा तथा तेलअवीव में अपने अपने राजदूतों की वापसी का एलान कर रहे हैं।

तुर्की की जस्टिस एंड डवलपमेंट पार्टी के अधिकारी विशेषकर रजब तैयब अर्दोग़ान पिछले दो दशकों से अधिक समय से ज़ायोनी शासन के अपराधों और अतिग्रहण के मुक़ाबले में हमेशा से फ़िलिस्तीन के मज़लूम राष्ट्र के समर्थन का दावा करते रहे हैं।

तुर्की के राष्ट्रपति ने साथ ही इस बारे में कई स्थान पर दिखावा भी किया। एसा लगता है कि इस्राईल की नस्लभेदी सरकार के मुक़ाबले में अंकारा सरकार की सारी कार्यवाहियां केवल जमा ख़र्ची और पूर्वनियोजित कार्यक्रम के अंतर्गत की रही है।

वास्तव में हालिया दो दशकों के दौरान अंकारा के अधिकारियों की ओर से मज़लूम फ़िलिस्तीनी राष्ट्र का समर्थन केवल बातों की हद तक ही रहा है और अंकारा के मीडिया द्वारा किए जाने वाले राज़फ़ाश से पता चलता है कि तुर्की और इस्राईल के बीच हमेशा से ही गुप्त वार्ता रही है और सैन्य, सुरक्षा और राजनैतिक मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच वार्ताएं होती रही हैं।       

इस संभावना की भी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान अंकारा के अधिकारियों ने तुर्की में फ़िलिस्तीन की मज़लूम जनता के अधिकारियों की सूचनाएं एकत्रित करके ज़ायोनी शासन को दी हैं।

रजब तैयब अर्दोग़ान की सरकार तब से ज़ायोनी शासन के साथ संबंध शुरु कने में रुचि रखती थी जब यह शासन अपनी कमज़ोरी के चरम पर थे। इस कार्यवाही का परिणाम यह निकला कि तुर्की ने अपने देश की यात्रा के लिए इस्राईल के नस्लभेदी राष्ट्रपति को निमंत्रण दिया था जिस पर मुस्लिम जगत में काफ़ी हंगामा मचा था। (AK)

 

हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए

हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन कीजिए

हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!

ट्वीटर पर हमें फ़ालो कीजिए 

फेसबुक पर हमारे पेज को लाइक करें

टैग्स