Sep १५, २०२२ ०९:५९ Asia/Kolkata
  • बोलें तब भी परेशानी, ख़ामोश तब हैं परेशान, सैयद नसरुल्लाह की ख़ामोशी से अमरीका और इस्राईल में खलबली क्यों?

लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह की ख़ामोशी भी वाशिंग्टन और तेल अवीव को परेशान कर रही है। सैयद हसन नसरुल्लाह की ख़ामोशी ने वाशिंग्टन और तेल अवीव को प्रतिक्रिया पर मजबूर कर दिया है।

एक अरब समाचार पत्र ने इस्राईल के साथ समुद्री सीमा विवाद और इस संबंध में तेल अवीव के प्रयासों के बारे में ताज़ा ख़बरों के हवाले से हिज़्बुल्लाह के महासचिव की ख़ामोशी की वजह पर एक लेख प्रकाशित किया है।

अमरीकी राजदूत आमूस होचिश्टीन के पिछले शुक्रवार के दौरे के बाद इस्राईल के साथ समुद्री सीमाओं के निर्धारण के समझौते के निकट होने के हवाले से लेबनानी अधिकारियों के आशान्वित बयानों में बहुत अधिक वृद्धि हुई है।

हिज़्बुल्लाह के महासचिव जिन्हें इस मामले पर होने वाली वार्ता के ब्योरे से अवगत होना चाहिए, गैस फ़ील्ड के विवाद के हवाले से ज़ायोनियों को दी गयी डेड लाइन पर अब भी प्रतिबद्ध हैं और ख़ामोश हैं।

राय अलयौम ने इस मुद्दे पर एक लेख प्रकाशित करते हुए लिखा है कि यह आशापूर्ण शब्द उन शब्दों से मिलते जुलते हैं जिनको पिछले दस महीने में यूरोपीय पक्षों ने ईरान के परमाणु मुद्दों के हवाले से होने वाली वार्ताओं में किसी समझौते के निकट पहुंचने के हवाले से किया था।

लेखक लिखते हैं कि हम आशा करते हैं कि यह लेबनानी आशा सही हो और इस बात यह इस्राईली-अमरीकी नीयत और इरादों की पुष्टि करती है क्योंकि इसका विकल्प जंग है।

लेबनान के विदेशमंत्री अब्दुल्लाह बू हबीब ने वर्तमान प्रधानमंत्री नजीब मीक़ाती से मुलाक़ात के बाद इस बात पर बल दिया कि अमरीकी राजदूत ने नये प्रस्ताव पेश किए है और इस में प्रगति भी हुई है लेकिन अभी तक यह अंतिम नहीं है। लेबनान लाइन-23 और पूरे क़ाना स्क्वायर पर मालेकाना हक़ रखता है।

आर्टिकल के लेखक लिखते हैं कि हम नहीं जानते कि इस्राईल के नये प्रस्ताव का क्या मामला है जिसके बारे में उम्मीद की गयी है लेकिन हमें विश्वास है कि हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह हर ब्योरे से अवगत हैं क्योंकि उनके पास सारी जानकारियां हैं क्योंकि उन्होंने कुछ सप्ताह पहले लेबनान के अवैध अधिकृत इलाक़ों में जो चार ड्रोन भेजे थे उसने इस्राईलियों और अमरीकियों में भय पैदा कर दी है और दोनों पक्षों को विशिष्टता देने और समझौते तक पहुंचने में तेज़ी प्रदान करने के लिए प्रेरित की है।

लेखक लिखते हैं कि सैयद हसन नसरुल्लाह और प्रतिरोधक मीडिया की स्थिति की गहन समीक्षा कर रही है और साथ ही वह ख़ामोश भी हैं और उन्होंने अमरीकी मध्यस्थता से वार्ता का मामला लेबनानी सरकार पर छोड़ दिया है लेकिन अगर अमरीकी मध्यस्थता का मक़सद केवल समय ख़रीदना और वार्ता प्रक्रिया को इस्राईल में अगले नवम्बर में होने वाले चुनाव और एक सप्ताह बाद होने वाले अमरीकी चुनाव तक बढ़ाना है तो यह ख़ामोशी निश्चित रूप से जारी नहीं रहेगी। (AK)

 

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