Jun ०८, २०१९ १८:४४ Asia/Kolkata
  • क़तर ने सऊदी अरब की पोल खोल दी, पहले अपने गरेबान में झांकें सऊदी

क़तर के पूर्व प्रधानमंत्री हमद बिन जासिम आले सानी ने ब्रिटिश समाचार पत्र डेली टेलीग्राफ़ से बातचीत में कहा कि दाइश के अधिकतर तत्व सऊदी हैं।

क़तर के पूर्व प्रधानमंत्री ने डेली टेलीग्राफ़ से बात करते हुए कहा कि क़तर का परिवेष्टन करने वाले विशेषकर सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात, आतंकवाद का बहाना बनाकर क़तर के विरुद्ध हमला करके अपने लक्ष्यों और उद्देश्यों की प्राप्ति के प्रयास में हैं।

बिन जासिम ने यह बयान करते हुए कि दाइश का एक बड़ा भाग सऊदी तत्वों पर आधारित है, कहा कि वे हम पर आतंकवाद और इन जैसा झूठा आरोप ऐसी स्थिति में लगा रहे हैं कि जब एक भी अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने खुलकर उनके दावे का समर्थन नहीं किया है। अमरीका और कोई भी यूरोपीय संस्थाओं ने हम पर आतंकवाद का आरोप नहीं लगाया बल्कि केवल सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात ही हैं जो यह राग अलापते रहते हैं।

उन्होंने कहा कि वे हम पर आतंकवाद का आरोप लगाते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि आतंकवाद से युद्ध का विषय, पश्चिम की प्राथमिकता है और अमरीका और यूरोप में सभी यह चाहते हैं कि जब भी आतंकवाद के मुद्दे पर बात होती है तो उसे सुना जाता है।

क़तर के इस पूर्व अधिकारी ने कहा कि क़तर पर प्रतिबंध और नाकाबंदी के दो साल बीतने के बाद हम को यह तक पता नहीं कि वे हम पर क्या आरोप लगाते हैं।

उनका कहना था कि 11 सितम्बर 2001 में न्यूयार्क में होने वाले आतंकवादी हमले में शामिल 19 आतंकियों में से 15 का संबंध सऊदी अरब से, 2 का संबंध संयुक्त अरब इमारात, एक का मिस्र से और एक का लेबनान से संबंध था।

बिन जासिम ने कहा कि क्या हमें नहीं कहना चाहिए कि इन पंद्रह सऊदी नागरिकों को सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात और मिस्र की सरकारों की ओर से भरपूर समर्थन प्राप्त था? क्या हमें चुप रहना चाहिए कि वाशिंग्टन में सऊदी अरब के दूतावास ने इन लोगों के व्यक्तिगत एकाउंट में पैसे ट्रांस्फ़र किए थे।

क़तर के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि सऊदी अरब के कितने अधिक बेरोज़गार लोग आईएसआईए में शामिल हैं? दाइश में शामिल अधिकतर तत्व सऊदी हैं।

उन्होंने कहा कि मैं समझता हूं कि हम सबको चाहिए कि मिलकर सऊदी अरब का समर्थन करें क्योंकि इस देश में स्थिरता क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है किन्तु इसके साथ ही उन्हें यह भी जान लेना चाहिए कि सऊदी अरब को क़तर सहित समस्त पड़िसयों के साथ शांतिपूर्ण और अच्छे संबंध होने चाहिए।

ज्ञात रहे कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात, बहरैन और मिस्र ने पांच जून 2017 से क़तर पर आतंकवादी संगठनों के समर्थन का आरोप लगाकर अपने कूटनयिक संबंध तोड़ लिए थे और इस देश के लिए अपनी ज़मीनी, हवाई और समुद्री सीमाओं को भी बंद कर दिया था। इन तीनों देशों ने दोहा के साथ संबंधों को बहाल करने के लिए 13 शर्तें रखी थीं किन्तु दोहा ने इन शर्तों को अपनी अखंडता और संप्रभुता का हनन क़रार दते हुए किसी पर भी अमल नहीं किया। (AK)

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