Sep १७, २०१९ १०:४४ Asia/Kolkata
  • ड्रोन हमले के बारे में अंसारुल्लाह के सैनिक प्रवक्ता ने चौंका देने वाली जानकारियां दीं, इमारात पर अब तक हमला क्यों नहीं हुआ? क्या सऊदी अरब की तरफ़ से ईरान पर हमला करेंगे ट्रम्प?

अरब जगत के टीकाकार अब्दुल बारी अतवान का जायज़ा अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो ने सऊदी अरब के बक़ैक़ इलाक़े में दुनिया के बहुत बड़े तेल प्रतिष्ठान पर बड़ा ड्रोन हमला होते ही ईरान पर आरोप लगा दिया कि वह इस हमले में लिप्त है।

इस हमले के कारण प्रतिदिन 60 लाख बैरल तेल, दो ट्रिलियन घन फ़ुट गैस, तथा हज़ारों टन पेट्रोकेमिकल पदार्थों का उत्पादन रुक गया। सऊदी अरब की राष्ट्रीय तेल कंपनी आरामको के शेयर अंतर्राष्ट्रीय मंडियों में बेचने की योजना को टाल दिया गया।

पोम्पेयो ने कहा कि इस बात का कोई सुबूत नहीं है कि बक़ैक़ पेट्रो काम्पलेक्स को निशाना बनाने वाले दस ड्रोन विमान यमन से उड़े हों बल्कि यह ड्रोन ईरान से उड़े थे। अलबत्ता पोम्पेयो ने इस दावे का कोई सुबूत देने का कष्ट नहीं किया। एक बात यह भी है कि इस मामले की जटिल जांच अब तक शुरू भी नहीं हो पाई है रविवार को जो कुछ हुआ है वह बहुत सीमित जांच है।

यमन पर युद्ध थोपने वाले सऊदी सैनिक एलायंस के प्रवक्ता तुर्की अलमालेकी ने कहा कि आरंभिक जांच में साबित हुआ है कि ख़रैस और बक़ैक़ तेल प्रतिष्ठानों में प्रयोग होने वाले हथियार और विस्फोटक ईरान निर्मित थे। तो इस पर यमन का अंसारुल्लाह आंदोलन जिसे हूती भी कहा जाता है यह कह सकते हैं कि यमन पर पांच साल से जारी हमलों में जो हथियार प्रयोग हो रहे हैं वह अमरीका निर्मित हैं, इसमें समस्या क्या है?

सोमवार को रायुल यौम अख़बार ने यमन की सेना और स्वयंसेवी बलों के सैनिक प्रवक्ता यहया अस्सरीअ से बात की जिसमें उन्होंने साफ़ साफ़ कहा कि बक़ैक़ और ख़रैस तेल प्रतिष्ठानों पर हमला करने वाले ड्रोन विमान यमन के भीतर बनाए गए हैं, यमन की धरती से ही उड़े। इनके निर्माण में वह धातुएं और सामग्री प्रयोग की गई है कि सऊदी अरब के आधुनिकतक राडार भी उन्हें डिटेक्ट नहीं कर सकते। यमन के भीतर एक स्थान पर आप्रेटिंग सिस्टम स्थापित किया गया है जो इस पूरी कार्यवाही पर नज़र रख रहा था।

यहया अस्सरीअ ने कहा कि देखिए हम झूठ बोलने वाले लोग नहीं हैं, हमारे पास बिना किसी हिचकिचाहट के सच्चाई बयान करने का साहस है, हम बहुत जल्द एक बहुत बड़े सैनिक आप्रेशन का एलान करने वाले हैं जिसके माध्यम से हम सऊदी अरब की 500 वर्ग किलोमीटर भूमि पर क़ब्ज़ा करेंगे और हमारे सैनिक सऊदी अरब के हज़ारों सैनिकों को बंदी बना लेंगे। प्रवक्ता ने कहा कि जब हम यह कहते हैं कि सऊदी अरब के भीतर कुछ भले लोग हैं जो हमसे सहयोग कर रहे हैं तो इन भले लोगों से हमारा तात्पर्य हमारे शीया भाई नहीं हैं, हम से सहयोग करने वाले दूसरे लोग सऊदी अरब के भीतर बल्कि ख़ुद प्रशासन के भीतर मौजूद हैं।

यहया अस्सरीअ ने कहा कि इस समय हम यमन के भीतर हर दिन 6 ड्रोन विमान बना रहे हैं जो बेहद आधुनिक तकनीक से लैस होते हैं। प्रवक्ता ने एक और बड़ी जानकारी देते हुए कहा कि बहुत से लोग पूछते हैं कि आप इमारात पर हमला क्यों नहीं करते तो उनके लिए हमारा जवाब यह है कि इमारात ने यमन युद्ध में अपनी भागीदारी बहुत कम कर दी है लेकिन अगर इमारात ने भी कोई उत्तेजक कार्यवाही की तो उस पर भी हमारा हमला उसी आकार का होगा जिसका नमूना सऊदी अबर में नज़र आ रहा है।

ध्यान से सुन लीजिए अंसारुल्लाह का संबंध उस प्रतिरोधक मोर्चे से है जिसमें लेबनान का विख्यात शक्तिशाली हिज़्बुल्लाह आंदोलन शामिल है, जिसमें इराक़ की स्वयंसेवी फ़ोर्स हश्दुश्शअबी शामिल है, जिसमें फ़िलिस्तीन के हमास और जेहादे इस्लामी संगठन शामिल हैं और जिसका नेतृत्व और निगरानी ईरान के क्रांति संरक्षक बल आईआरजीसी के हाथ में है। यह लग रहा है कि एक फ़ैसला किया जा चुका है कि इस प्रतिरोधक मोर्चे में शामिल सारी ताक़तें हरकत में आ जाएं और अमरीकी प्रशासन पर दबाव चरम सीमा पर पहुंच जाए ताकि वह ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने पर मजबूर हो और परमाणु समझौते का पुनः पालन शुरू करे। इस फ़ैसले में इस्राईल को पूरी तरह अस्थिर करना भी शामिल है। अतः जब तक यह लक्ष्य पूरा नहीं हो जाता उस समय तक सऊदी अरब के काफ़ी भीतर तेल प्रतिष्ठानों पर हमले होते रहेंगे और वह देश भी निशाना बनेंगे जो अमरीकी ख़ैमे में शामिल हैं।

इस हमले ने चाहे वह मिसाइल हमला हो या ड्रोन का हमला, यह हमला यमन से किया गया हो या कहीं और से किया गया हो, यह तो साबित कर ही दिया है कि देश की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी समझे जाने वाले तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए सऊदी अरब ने जो कुछ प्रबंध किए थे सब नकारा थे। इससे यह भी साबित हो गया कि अमरीका अपने घटकों से सैकड़ों अरब डालर एंठने के बावजूद कठिन समय में उनकी मदद के लिए आगे नहीं आएगा।

यहां एक सवाल यह भी पैदा होता है कि आने वाले दिनों में हालात का रुख़ क्या हो सकता है? दूसरे शब्दों में यह कहा जाए कि क्या अमरीका सऊदी अरब पर होने वाले इस पीड़ादायक हमले के बाद ईरान से इंतेक़ाम लेगा और अगर लेगा तो इस इंतेक़ाम का रूप क्या होगा, क्या सीमित मिसाइल हमला करेगा या व्यापक युद्ध छेड़ेगा या और प्रतिबंध लगाएगा?

हमारे पास वैसे तो भविष्य को पढ़ने वाला ज्ञान नहीं है लकिन इतना तो हम ज़रूर कह सकते हैं कि जब हुरमुज़ स्ट्रेट के ऊपर ईरान ने अमरीकी वायु सेना का ताज समझे जाने वाले ड्रोन विमान ग्लोबल हाक को मार गिराया तो ट्रम्प प्रशासन इस पर ईरान के खिलाफ़ कोई कार्यवाही इसलिए नहीं कर पाया कि उसे ईरान की तरफ़ से की जाने वाली इंतेक़ामी कार्यवाही का डर था। तो हमें नहीं लगता कि ट्रम्प प्रशासन सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर हमले के बाद इंतेक़ाम लेने के लिए ईरान के ख़िलाफ़ कुछ कर पाएगा। मगर इस समय कोई भी चीज़ असंभव नहीं है।

बक़ैक़ पर हमले के बाद पारम्परिक युद्ध साइबर वार में बदल गया है या यूं कहा जाए कि दोनों का मिला जुला एक रूप सामने आया है। शायद यह किसी और शहर के मूल प्रतिष्ठानों पर इससे भी बड़े हमले की भूमिका है। जो कुछ भी होगा उसके ज़िम्मेदार अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प होंगे क्योंकि उन्होंने परमाणु समझौते से बाहर निकलकर और ईरान पर प्रतिबंध लगाकर तनाव की शुरुआत की है। ईरान जिसने जिमी कार्टर का पत्ता साफ़ करवा दिया था आने वाले चुनाव में ट्रम्प का भी पत्ता साफ़ करवाने जा रहा है, बाक़ी ईश्वर ही बेहतर जानता है।

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