Nov २५, २०१९ १६:४१ Asia/Kolkata
  • हिज़्बुल्लाह की सामाजिक स्थिति को कमज़ोर करने की एक और चाल

लेबनान के हिज़्बुल्लाह और अमल संगठनों ने प्रदर्शनकारियों पर रविवार की रात हमले करने वाले लोगों से अपने किसी भी प्रकार के संबंध का खंडन किया है।

कुछ पश्चिमी व क्षेत्रीय मीडिया हल्क़ों की कोशिश है कि प्रदर्शनकारियों पर हमले करने वालों को हिज़्बुल्लाह का समर्थक बताया जाए। लेबनान के संचार माध्यमों ने बताया है कि राजधानी बैरूत के केंद्र में स्थित एक पुल के पास प्रदर्शनकारियों और एक अन्य गुट के बीच झड़प हुई जिसके नतीजे में कई दुकानों और गाड़ियों को नुक़सान पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने रविवार को लोगों को विरोध के लिए आमंत्रित किया था और सोमवार के दिन को नागरिक अवज्ञा का दिन घोषित किया है। उन्होंने अपने बयान में सुरक्षा बलों से कहा है कि वे उन लोगों से कड़ाई से निपटें जिन्होंने बैरूत में रात के समय प्रदर्शनकारियों पर हमला किया था। इसके बाद से ही सऊदी अरब के पिट्ठू मीडिया ने हमलावरों को हिज़्बुल्लाह का समर्थक बताना शुरू कर दिया है।

 

अलअरबिया टीवी चैनल ने सोमवार को अपनी एक ब्रेकिंग न्यूज़ में बताया कि हिज़्बुल्लाह के समर्थकों ने प्रदर्शनकारियों पर हमला कर दिया है। चैनल ने दावा किया कि यह हमला बैरूत के केंद्र में किया गया है। सऊदी अरब के इस चैनल ने इसी तरह दावा किया कि हिज़्बुल्लाह के समर्थकों ने रिंग नामक पुल पर टायरों में आग लगाई है। अलहदस टीवी चैनल ने भी रिपोर्ट दी है कि सुरक्षा बलों ने बैरूत के उक्त पुल पर से हिज़्बुल्लाह के समर्थकों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले फ़ायर किए हैं।

 

यह दावे ऐसी स्थिति में किए गए हैं कि जब लेबनान के हिज़्बुल्लाह और अमल संगठनों ने प्रदर्शनकारियों पर रविवार की रात हमले करने वाले लोगों से अपने किसी भी प्रकार के संबंध का खंडन किया है। ऐसा लगता है कि प्रदर्शनकारियों पर हमले और लेबनान के प्रतिरोधकर्ता गुटों पर इसका आरोप लगाने का उद्देश्य जनता और प्रदर्शनकारियों के बीच हिज़्बुल्लाह की स्थिति को कमज़ोर बनाने का प्रयास है लेकिन यह चाल कभी भी सफल नहीं हो पाएगी क्योंकि देश में व्यापक सामाजिक सेवाएं करने और इसी तरह ज़ायोनी शासन के हमलों के मुक़ाबले में प्रतिरक्षात्मक भूमिका निभाने के कारण लेबनान में हिज़्बुल्लाह की स्थिति बहुत मज़बूत है। यह स्थिति केवल शियों तक सीमित नहीं है बल्कि सुन्नी और ईसाई तक हिज़्बुल्लाह से प्यार करते हैं। अमरीका, ज़ायोनी शासन और उनके क्षेत्रीय घटक, हिज़्बुल्लाह की इसी मज़बूत स्थिति को कमज़ोर करने की विफल कोशिश कर रहे हैं। (HN)

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