Jan २२, २०२० १०:०९ Asia/Kolkata
  • हैरतअंगेज़! राष्ट्र संघ में सीरियाई राजदूत के लिए रेड कारपेट बिछाने के लिए बेचैन है सऊदी अरब, कहा दोनों देशों के मतभेद गर्मी के बादलों के समान जो जल्दी उड़ जाते है!

संयुक्त राष्ट्र संघ में सऊदी अरब के राजदूत  अब्दुल्लाह अलमुअल्लेमी अपनी तमन्ना ज़ाहिर करते हैं कि वह सऊदी मंत्री के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में सीरियाई राजदूत बश्शार जाफ़री को आमंत्रित करना चाहते हैं।

सऊदी मंत्री फ़हद बिन अब्दुल्लाह अमरीका जा रहे हैं जहां वह सऊदी अरब में होने जा रहे गुट-20 के शिखर सम्मेलन की तैयारियों को आगे बढ़ाएंगे। बश्शार जाफ़री ने सऊदी राजदूत का न्योता स्वीकार भी कर लिया है। सऊदी राजदूत और मंत्री दोनों ने सीरिया के लिए अपनी गहरी मुहब्बत की बात की है। यह सब कुछ जो हुआ है वह कोई संयोग नहीं बल्कि सीरिया के बारे में सऊदी अरब की नीति में आने वाला बुनियादी बदलाव है।

सऊदी अरब इस समय काफ़ी हद तक अलग थलग पड़ा हुआ है क्योंकि उसके मुक़ाबले में क़तर और तुर्की का गठबंधन है जो लगातार अपनी ताक़त बढ़ा रहा है। क़तर से विवादों को कम करने की सऊदी अरब की कोशिश भी नाकाम हो गई और दोनों देश एक बार फिर पुरानी हालत में एक दूसरे के आमने सामने हैं। जिसके बाद क़तर का अलजज़ीरा टीवी चैनल एक बार फिर सऊदी अरब पर जमकर हमले कर रहा है।

फ़िलहाल तो यह समझ में नहीं आ रहा है कि आगे हालात किस रुख़ पर जाएंगे क्योंकि तीन साल पहले यह बात सामने आई थी कि सीरिया के सबसे बड़े सुरक्षा व इंटेलीजेन्स अधिकारी अली ममलूक और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान की मुलाक़ात रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतीन ने करवाई है। मगर इसके बाद भी दोनों देशों के विवाद अपनी जगह बाक़ी रहे। अलबत्ता एक बात यह भी है कि इस समय हालात बदले हुए हैं। सीरिया पुनरनिर्माण के चरण में पहुंच चुका है जबकि सऊदी अरब को अरब दुनिया में अपने संबंध ठीक करने की ज़रूरत है। सऊदी अरब यमन युद्ध हार चुका है और अमरीका पर वह जहां भी भरोसा कर रहा है निराशा ही हाथ लग रही है।

कूटनैतिक पटल पर होने वाली इस बड़ी घटना का महत्व किसी भी तरह कम नहीं है खासकर इसलिए भी कि इससे पहले इमारात अपना प्रभारी राजदूत दमिश्क़ भेज चुका है जिसने सीरियाई राष्ट्रपति बश्शार असद की सूझबूझ की तरीफ़ के पुल बांधे। सीरिया के इंटेलीजेंस अधिकारी अली ममलूक और तुर्की के इंटेलीजेन्स चीफ़ हक़ान फ़ीदान की भी मुलाक़ात हो चुकी है। इन सारी घटनाओं का यह मतलब है कि सीरिया बहुत तेज़ी से अपनी मज़बूत पोज़ीशन में लौट रहा है जहां वह अरब दुनिया और इस्लामी दुनिया में एक प्रभावी रोल निभाता है। इसीलिए देशों के बीच सीरिया का दिल जीतने की होड़ सी लग गई है।

टैग्स

कमेंट्स