Feb १८, २०२० ०९:१२ Asia/Kolkata
  • दक्षिणी लेबनान में जनरल सुलैमानी का स्टेचू लगाने का क्या अर्थ है?

दक्षिणी लेबनान के मारूनुर्रास शहर में जनरल क़ासिम सुलैमानी की एक विशाल प्रतिमा लगाई गई है। इसमें दो बातें बेहद महत्वपूर्ण हैं जिन्होंने सबका ध्यान अपनी ओर ख़ींचा है।

पहली बात तो यह कि जब प्रतिमा का अनावरण किया गया तो वहां एकत्रित लेबनानियों की भारी भीड़ में जनरल क़ासिम सुलैमानी के दोनों बेटे भी मौजूद थे जबकि हिज़्बुल्लाह के बड़े कमांडर और दक्षिणी लेबनान की आम जनता वहां मौजूद थी। दूसरी महत्वपूर्ण बात जिसने सभी देखने वालों का ध्यान अपनी ओर केन्द्रित किया वह प्रतिमा के पीछे नज़र आने वाला फ़िलिस्तीन का फ़्लैग था और जनरल क़ासिम सुलैमानी अपनी उंगली से अलजलील शहर की ओर संकेत कर रहे हैं जो फ़िलिस्तीनी शहर है मगर इस्राईल ने उस पर क़ब्ज़ा कर रखा है।

जहां एक तरफ़ मारूनुर्रास में जनरल क़ासिम सुलैमानी के स्टेचू का अनावरण किया गया वहीं दूसरी ओर इसी समय इराक़ की राजधानी बग़दाद के अलख़ज़रा इलाक़े में अमरीकी दूतावास के पास अमरीकी सैनिक छावनी पर तीन राकेट फ़ायर किए गए जबकि उत्तरी शहर करकूक में अमरीकी छावनी पर के-1 मिसाइल दाग़े गए।

हम यह कहना चाहते हैं कि ईरान और प्रतिरोध मोर्चे की ओर से भरपूर कोशिश हो रही है कि जनरल सुलैमानी अमर हो जाएं और उनकी तसवीर करोड़ों लोगों के मन में हमेशा जिंदा रहे। मारूनुर्रास में स्थापित किए गए जनरल सुलैमानी के स्टेचू को देखने हर रोज़ बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे। इसके साथ ही यह संदेश भी दिया जा रहा है कि जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या का इंतेक़ाम रुकने वाला नहीं है। एनुल असद पर ईरान का मिसाइल हमला पूरा इंतेक़ाम नहीं बल्कि इंतेक़ाम की शुरुआत था।

 लेबनान के मारूनुर्रास शहर में शहीद क़ासिम सुलैमानी का स्टेचू

 

जनरल सुलैमानी के स्टेचू के पीछे फ़िलिस्तीन का फ़्लैग और अलजलील शहर की ओर इशारा करती उनकी उंगली ख़ास पैग़ाम देने के लिए है। इससे यह बताया गया कि इस महान कमांडर ने फ़िलिस्तीनी संगठनों की बेमिसाल मदद की। लेबनान में हमास के प्रतिनिधि ने बताया कि जनरल क़ासिम सुलैमानी ने ग़ज़्ज़ा पट्टी का ख़ुफ़िया दौरा भी किया। इस कमांडर को इन्हीं महान सेवाओं के कारण शहीद किया गया। इसलिए हम अगर कभी अचानक सुनें कि इस्राईली और अमरीकी हितों पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू हो गए हैं तो हमें हैरत नहीं होना चाहिए।

ईरान ने इलाक़े में जो प्रतिरोध मोर्चा बनाया है वह बेहद शक्तिशाली है और उसका संयम भी बहुत ज़्यादा है वह जल्दबाज़ी में पड़े बग़ैर अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार काम करता है। इराक़ के भीतर 18 छावनियों में मौजूद 5200 अमरीकी सैनिकों को बाहर निकालने का फ़ैसला इराक़ी संसद से जारी हो चुका है और बग़दाद और करकूक में अमरीकी छावनियों पर राकेट हमले या तो इंतेक़ाम की तैयारी है या फिर बड़े बदले की शुरूआत। ईरान के नेतृत्व वाले मोर्चे की शायद पहली प्राथमिकता यही है।

साभार रायुल यौम

 

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