Feb १८, २०२० १७:२४ Asia/Kolkata

शायद आपको विश्वास न हो लेकिय यह सच है कि इन इमारतों में ऐसे लोग जीवन गुज़ार रहे हैं जो 70 वर्षों से विस्थापन की ज़िन्दगी व्यतीत कर रहे हैं, इन विस्थापितों में शायद की इनकी पहली पीढ़ी से कोई बचा हो, यह वे लोग हैं जिन्होंने जबसे आंखे खोली हैं अपने आपको इराक़ में ही देखा है, लेकिन अभी भी ख़ुद को फ़िलिस्तीनी मानते हैं।

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