Feb २४, २०२० ०९:३० Asia/Kolkata
  • क्या यमन के मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम ने सऊदी पैट्रियट मिसाइलों के बाद अब सऊदी युद्धक विमानों को नाकारा कर दिया, तीन महत्वपूर्ण घटनाएं जिनसे लगता है कि लड़ाई का यह साल बिल्कुल अलग होगा!

यमन की जंग पांच साल पूरा करके छठें साल में प्रवेश करने वाली है तो सऊदी गठबंधन और यमन की सेना तथा स्वयंसेवी बलों के बीच लड़ाई और भी तेज़ हो गई है। इसका मतलब यह है कि आने वाले दिन और हफ़्ते ज़्यादा भीषण लड़ाई के होंगे।

तीन घटनाएं यमन के पटल पर बहुत महत्वपूर्ण नज़र आ रही हैं जिनसे पता चलता है कि सऊदी अरब के लिए जंग के मैदान में हालात बेहद कठिन हो चुके हैं।

पहली घटना यह कि यमनी सेना और स्वयंसेवी बलों के प्रवक्ता यहया अस्सरी ने चार नए मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम बना लिए जाने की घोषणा की और कहा कि वर्ष 2020 वायु रक्षा का शानदार साल होगा।

दूसरी घटना सऊदी गठबंधन के सैनिक प्रवक्ता जनरल तुर्की मालेकी की यह घोषणा है कि लाल सागर के दक्षिणी भाग में बाबुल मंदब स्ट्रेट के पास तेज़ रफ़तार ड्रोन नौका से एक जहाज़ पर हमला करने की योजना को नाकाम बना दिया गया। यह नौका हुदैदा बंदरगाह से चली थी।

तीसरी घटना पश्चिमी सऊदी अरब में लाल सागर पर के तट पर यंबो बंदरगाह पर यमनी सेना और स्वयंसेवी बलों का बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन विमानों से हमला है जो यमन की राजधानी सनआ से 1400 किलोमीटर दूर स्थित है।

यमन की सेना के प्रवक्ता ने जिन चार नए मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टमों की घोषणा की है उनकी सटीक निशाना लगाने और युद्धक विमान को मार गिराने की क्षमता उस घटना से साबित होती है जिसमें यमनी सेना ने अपने मिसाइल से सऊदी अरब का युद्धक विमान टोरनीडो 14 फ़रवरी को मार गिराया था और उसके दोनों या एक पायलट को जीवित गिरफ़तार कर लिया था। इस प्रकार के ब्रिटिश निर्मित युद्धक विमान आधुनिक समझे जाते हैं जिन्हें पारंपरिक एयर डिफ़ेन्स सिस्टम से गिराया नहीं जा सकता।

इन घटनाओं के बीच शायद यमन की सेना और अंसारुल्लाह आंदोलन की ओर से ड्रोन नौकाओं का भी अनावरण कर दिया जाए जिनके माध्यम से लाल सागर में टारगेट को ध्वस्त किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि अंसारुल्लाह आंदोलन जिसे ईरान का समर्थन हासिल है अब सऊदी गठबंधन की नौकाओं को निशाना बनाने और बाबुल मंदब स्ट्रेट बंद कर देने में पूरी तरह सक्षम है।

सऊदी अरब जिसने मार्च 2015 में यमन पर हमले शुरू किए थे यह सोच रहा था कि वह इमारात, क़तर और अन्य देशों की मदद से कुछ हफ़्तों के भीतर यमनी सेना और अंसारुल्लाह का काम तमाम कर देगा। मगर यमनी सेना और अंसारुल्लाह आंदोलन के ताक़तवर प्रतिरोध ने सारे अनुमानों को उलट पलट दिया। अब तो यमनी सेना और स्वयंसेवी बल सऊदी अरब के भीतर संवेदनशील प्रतिष्ठानों को बार बार निशाना बना रहे हैं।

अगर अंसारुल्लाह के मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम का प्रभावी रूप से प्रयोग शुरू हो गया तो इसका मतलब यही होगा कि सऊदी ज़मीनी सेना की तरह सऊदी वायु सेना भी बेबस हो चुकी है। जल्दी कुछ कहना ठीक नहीं होगा क्योंकि सऊदी अरब ने अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस से हालिया वर्षों में 200 अरब डालर के हथियार ख़रीदे हैं लेकिन यह भी हक़ीक़त है कि ग़रीब यमन देश कठिन हालात में बैलिस्टिक मिसाइल बनाने में सक्षम हुआ है जो सऊदी अरब के रियाज़, जिद्दा, ताएफ़ और ख़मीस मुशैयत शहरों तक पहुंच रहे हैं जबकि जीज़ान, नजरान और अबहा हवाई अड्डों को तो आए दिन निशाना बना रहे हैं। इस बीच पैट्रियट मिसाइल का हौवा समाप्त हो चुका है क्योंकि यह मिसाइल यमनी मिसाइलों और ड्रोन विमानों के सामने लाचार नज़र आते हैं।

इमारात ने यमन युद्ध की आग भड़काने में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया लेकिन कुछ हफ़्ता पहले अपने सारे सैनिकों को यमन से वापस बुलाकर युद्ध से बाहर निकल आने का जश्न मनाया ताकि अब और जानी व माली नुक़सान न उठाना पड़े। यह भी हो सकता है कि सऊदी अरब भी बहुत जल्द इमारात की राह पर चलते हुए यमन युद्ध से ख़ुद को बाहर निकाल कर चैन की सांस ले। इस बात की संभावना है कि इस समय मोर्चों पर लड़ाई में आने वाली तेज़ी लड़ाई को रोकने के लिए वार्ता की मेज़ पर अपनी पोज़ीशन मज़बूत करने की कोशिश हो।

साभार रायुल यौम

 

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