Feb २७, २०२० ०८:४३ Asia/Kolkata
  • सीरिया के इदिलब में रूसी एस-400 और अमरीकी पैट्रियट मिसाइलों का है मुक़ाबला, अमरीका ने फिलहाल नहीं मानी है तुर्की की मांग, वाशिंग्टन को अपना एयर डिफ़ेन्स उद्योग डूब जाने का है डर

सीरिया के इदलिब इलाक़े में इस समय एक बड़ी ज़ोर आज़माई शुरू हो गई है। इदलिब और आसपास के इलाक़ों पर क़ब्ज़ा जमाए बैठे तुर्की द्वारा समर्थित चरमपंथियों को भगाकर पूरे इलाक़े का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का सीरियाई सेना का मिशन जारी है जिसे रूस का भरपूर समर्थन भी हासिल है।

वहीं तुर्की ने इन इलाक़ों को चरमपंथियों के नियंत्रण में बाक़ी रखने के लिए सीरिया और रूस से युद्ध का रिस्क ले लिया है। अब तक के मुक़ाबले में कई सैनिक मारे जा चुके हैं।

तुर्की ने इस लड़ाई में शामिल होने की दावत अमरीका को दी है। तुर्की का कहना है कि नैटो का सदस्य होने के नाते इस समय अमरीका को तुर्की की मांग पर ध्यान देते हुए इदलिब के इलाक़े में पैट्रियट मिसाइल स्थापित करना चाहिए। पेंटागोन का कहना है कि अभी इस बारे में कोई निर्णय नहीं किया गया है। कारण यह है कि इदलिब के इलाक़े में सीरियाई विमानों के साथ ही रूसी युद्धक विमान भी हवाई हमले कर रहे हैं। अब अगर अमरीका इस इलाक़े में पैट्रियट मिसाइल स्थापित करता है तो उसे रूसी विमानों को भी निशाना बनाना पड़ सकता है और यहीं से दोनों देशों के बीच बड़ी लड़ाई शुरू हो सकती है जो न तो अमरीका चाहता है और न ही रूस।

तुर्की पैट्रियट मिसाइल स्थापित करने पर ज़ोर तो दे रहा है लेकिन वह इस बात को नज़रअंदाज़ कर रहा है कि रूस एस-400 मिसाइल सीरिया के भीतर मौजूद हैं। यह मिसाइल ढाल सिस्टम बहुत दूर से ही हमलावर विमान या मिसाइल को हवा में ध्वस्त कर देने में सक्षम है।

एस-400 की ख़ास बात यह है कि वह 600 किलोमीटर के दायरे में नज़र आने वाले किसी भी युद्धक विमान को तत्काल चिन्हित करके उसे ध्वस्त कर सकता है। अमरीकी पैट्रियट मिसाइलों की बात की जाए तो वह 180 किलोमीटर के दायरे के भीतर नज़र आने वाले टारगेट को चिन्हित और ध्वस्त करते हैं।

पैट्रियट और एस-400 मिसाइलों की तुलनात्मक समीक्षा की जाए तो एस-400 को स्थापित करने में 5 से 10 मिनट लगते हैं जबकि पैट्रियट सिस्टम को स्थापित करने के लिए 15 मिनट से आधा घंटा तक समय लगता है। एस-400 मिसाइलों की रफ़तार लगभग 4800 मीटर प्रति सेकेंड है और पैट्रियट मिसाइलों की रफ़तार 2200 मीटर प्रति सेकेंड है। यानी रूसी सिस्टम अमरीकी पैट्रियट की तुलना में दुगनी से भी ज़्यादा रफ़तार से काम करता है। एस-400 के मिसाइलों को 90 डिग्री के कोण पर भी फ़ायर किया जा सकता है जबकि अमरीकी पैट्रियट को 38 डिग्री के एंगल तक ही फ़ायर करना संभव है।

इदलिब की लड़ाई में अगर रूसी एस-400 और अमरीकी पैट्रियट का मुक़ाबला होता है तो इसका बड़ा असर एयर डिफ़ेन्स उद्योग पर पड़ेगा। चूंकि पैट्रियट मिसाइल सऊदी अरब में पूरी तरह नाकाम साबित हो चुके हैं क्योंकि वह यमन से आने वाले हमलावर मिसाइलों और ड्रोन विमानों को इंटरसेप्ट नहीं कर पा रहे हैं इसलिए पैट्रियट मिसाइलों की मांग दुनिया भर में कम हुई है जबकि रूसी मिसाइलों की मांग बढ़ी है। अमरीका इस स्थिति से पहले ही काफ़ी चिंतित है। अब अगर इदलिब की धरती पर किसी मुक़ाबले में पैट्रियट मिसाइल नाकारा साबित हुए तो अमरीका के एयर डिफ़ेन्स उद्योग को ध्वस्त होने से कोई नहीं बचा पाएगा।   

 

टैग्स

कमेंट्स