Mar २२, २०२० १६:५५ Asia/Kolkata
  • लेबनान में हिज़्बुल्लाह के लिए बेहद कठिन चुनौती... हसन नसरुल्लाह को क्यों गुस्सा आया? अब्दुलबारी अतवान का गहरा विश्लेषण.

हम ने लेबनान के हिज़्बुल्लाह आंदोलन के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह को इतने गुस्से में कभी नहीं देखा है। उनका यह गुस्सा उस वक्त नज़र आया जब वह कल इस्राईली एजेन्ट, आमिर अलफाखूरी को अमरीकी हेलीकाप्टर से साइप्रेस और फिर वहां से अमरीका भगाए जाने के बारे में बात कर रहे थे।

इस घटना से पूरे लेबनान में हंगामा है क्यों कि यह इस्लामी प्रतिरोध मोर्चे के दुश्मनों की बड़ी सफलता समझी जा रही है।

    बेगुनाहों के हत्यारे के इस तरह से भागने और उस में हिज़्बुल्लाह पर मिली भगत का आरोप लगने की वजह से सैयद हसन नसरुल्लाह काफी गुस्से में देखे और यही वजह थी कि उन्होंने टीवी पर एक घंटा 40 मिनट तक भाषण दिया जिससे कई बातें समझ में आती हैं!

    पहलाः हिज़्बुल्लाह पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि वह अमरीकी मध्यस्थों द्वारा लेबनानी सरकार पर डाले गये दबाव जो इस्राईली एजेन्ट को रिहा न करने की दशा में लेबनान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने तक की धमकी के रूप में सामने आए थे, और इस संदर्भ में होने वाली कथित " डील" में शामिल था। सैयद हसन नसरुल्लाह ने इस आरोप का कड़ाई के साथ खंडन किया।

    दूसरीः हसन दयाब की सरकार गिराने की मांग की जा रही है और इस में अमरीकी राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रम्प व्यक्तिगत रूप में दिलचस्पी रखते हैं क्योंकि आरोप यह लगाया जा रहा है कि हसन दियाब की सरकार वास्तव में हिज़्बुल्लाह की सरकार है। सैयद हसन नसरुल्लाह ने इस आरोप का कड़ाई के साथ खंडन किया।  इसके साथ ही यह भी कहा कि हिज़्बुल्लाह को इस्राईली एजेन्ट के भागने की डील के बारे में पता नहीं था।

 

हम सैयद हसन नसरुल्लाह की बात की पुष्टि करते हैं हमें यक़ीन है कि इन हालात में उन्होंने जो फैसला किया वह सही था। क्योंकि आर्थिक मंदी और कोरोना से उपजे संकट के दौरान अगर हिज़्बुल्लाह इस्राईली एजेन्ट को अमरीकी दूतावास तक पहुंचने से रोकने या उसके अपहरण की कोशिश करते या उस हेलीकाप्टर को मार गिराते जिसमें वह एजेन्ट लेबनान से साइप्रेस भाग रहा था तो इस बात की आशंका थी कि कोई बड़ा युद्ध छिड़ जाए इसके अलावा लेबनान में गृहयुद्ध भी शुरु हो सकता था लेकिन यह तो कहना ही पड़ेगा कि इस मामले पर शुरु से ही अधिक ध्यान नहीं दिया गया वर्ना नौबत यहां तक पहुंचती ही न। यह पहले से ही पता था कि अमरीका इस इस्राईली एजेन्ट को जेल में नहीं रहने देगा और लेबनानी सरकार को संकट में डालने की कोशिश करेगा।

    इस्राईली एजेन्ट फाखूरी की इतनी हैसियत नहीं थी कि उसकी वजह से लेबनान में गृहयुद्ध के फलीते में आग लगायी जाए या उसकी वजह से किसी युद्ध में फंसा जाए लेकिन यह भी सच्चाई है कि लेबनान से जिस तरह से उसे भगाया गया है वह लेबनान के लिए अपमानजनक है और उसकी संप्रभुता और अखंडता का उल्लंघन है और इससे लेबनान में इस तरह के आप्रेशन के लिए उसका दुस्साहस बढ़ेगा।

    इस पूरे आप्रेशन से यह बात भी साबित हो गयी कि लेबनान पर हिज़्बुल्लाह का शासन नहीं है जैसा कि इस्राईल और उसके घटक आरोप लगाते हैं लेकिन यह भी सही है कि लेबनान में हिज़्बुल्लाह की बात बहुत चलती है और यह देश में उसकी लोकप्रियता और जन समर्थन की वजह से है।

    अगर यह सही है कि इस्राईल के इस एजेन्ट को लेबनान से भगाने के पीछे कोई डील नहीं थी, और हमें सैयद हसन नसरुल्लाह की यह बात सही भी लग रही है क्योंकि हम सैयद हसन नसरुल्लाह पर पूरा भरोसा करते हैं तो फिर यह मुफ्त का सौदा अपमानजनक होने के साथ ही साथ मूर्खता भी है और वह कलंक का टीका जिसे अमरीकी डॉलर धो नहीं पाएंगे।

अब्दुलबारी अतवान 

 

हमें बहुत अच्छी तरह से मालूम है कि हिज़्बुल्लाह ने इस्राईल को दो बार घूल चटाई है, दक्षिणी लेबनान को आज़ाद कराया है और लेबनान को बचाने और उसकी मदद के लिए हज़ारों का बलिदान दिया है इस लिए अमरीका और इस्राईल की तरफ से उसे हमेशा निशाने पर रखा जाता है। इसी तरह हिज़्बुल्लाह को लेबनान के भीतर भी उन लोगों के हमलों का निशाना बनना पड़ता है जो इन लोगों के एजेन्ट हैं लेकिन हमें उम्मीद है कि हिज़्बुल्लाह शांत रहेगा और संयम से काम लेगा क्योंकि हिज़्बुल्लाह सामने भविष्य में बड़ी लड़ाइयों और युद्धों की चुनौती है। इस लिए एक एजेन्ट का यह मामला कुछ दिनों में भुला दिया जाएगा।

    हम सैयद हसन नसरुल्लाह को इस हालत में देख कर दुखी हैं कि वह इस्राईली एजेन्ट के मामले उस हिज़्बुल्लाह और इस्लामी मोर्चे की तरफ से सफाई दे रहे थे जिस इस्राईल और उसकी सेना को बार बार धूल चटाई है, उससे लेबनान की भूमि आज़ाद करायी और अजेय इस्राईली सेना की कल्पना को चकनाचूर कर दिया, उनका शब्द शब्द सही था और हम उनके दुख को महसूस करते हैं।  

    लेबनान में इस्राईली एजेन्ट के भागने का पूरा मामला निश्चित रूप से हिज़बुल्लाह के लिए एक बड़ी चुनौती और परीक्षा था लेकिन अगर उसके बाद के हालात पर काबू नहीं किया  गया तो फिर हिज़्बुल्लाह को उससे बड़ी और कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। Q.A. साभार, रायुल यौम

 

 

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