Mar २५, २०२० १९:५४ Asia/Kolkata
  • कोरोना के सामने जब पश्चिम ने घुटने टेक दिए हैं, ऐसे वक़्त में एक नज़र ग़ज्ज़ा पर भी डाल लीजिए

पश्चिमी देशों के अस्पताल कोरोना वायरस के कारण सांस लेने में तकलीफ़ से जूझ रहे गंभीर रूप से बीमार रोगियों की सुनामी से पटे पड़े हैं।

ब्रिटेन में कार कंपनियां वेंटिलेटर के उत्पादन के लिए हाथ पैर मार रही हैं। स्टेडियमों और कांफ़्रेंस हालों में अस्थायी अस्पतालों के निर्माण के लिए सेनाएं योजनाएं बना रही हैं। कनाडा के ओंटारियो में वार्डों की साफ़ सफ़ाई की जा रहा है, योजनाएं बनाई जा रही हैं, संक्रमित रोगियों की जांच की जा रही है। कहा जा रहा है कि अगर 70 प्रतिशत आबादी सामाजिक संपर्क को नहीं तोड़ती है तो लॉडाउन से काम नहीं चलेगा। यह सब देख और सुनकर किसी भी इंसान के दिमाग़ की रगें झनझना उठेंगी।

लेकिन ज़रा ठहरिए, क्या आपको लगता है कि कोरोना वायरस की महामारी से निपटने के लिए ग़ज्ज़ा पट्टी में भी ऐसे ही कुछ इंतेज़ामात हो रहे हैं? यह एक ऐसा सवाल है जो आजकल कोई सुनने के लिए तैयार नहीं है। पिछले 14 वर्षों से इस्राईली नाकाबंदी का शिकार ग़ज्ज़ा के फ़िलिस्तीनियों को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने मानो भुला दिया है और इंसानियत की दुहाईयां, ग़ज्ज़ा की सीमा तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दे रही हैं।

कोई भी यह सवाल नहीं पूछ रहा है कि 20 लाख से ज़्यादा की आबादी वाले ग़ज्ज़ा में 40 आईसीयू बेड और 56 वेंटिलेटर कोरोना के प्रकोप का मुक़ाबला करने के लिए क्या काफ़ी हैं?

ओईसीडी के आंकड़ों के अनुसार, जर्मनी में प्रति एक लाख की आबादी पर 29.2 आईसीयू बेड हैं, बेल्जियम में 22, इटली में 12.5, फ्रांस में 11.6 और ब्रिटेन में 6.5 प्रतिशत। जबकि ग़ज्ज़ा में केवल दो बेड।

अमरीका से लेकर यूरोप तक विशेषज्ञ और चिकित्सक यही कह रहे हैं कि कोविड-19 ने उन्हें घुटनों पर लाय दिया है। लेकिन अगर यही बात ग़ज्ज़ा के बारे में सोची जाए तो...?

लेकिन अब यह सवाल कहीं नहीं पूछा जा रहा है, विश्व समुदाय ने अपने कानों में रुई ठूंस ली है।

ग़ज्ज़ा में अल मीज़ान सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में 25,658 फिलिस्तीनियों ने एन्क्लेव के बाहर उपचार के लिए आवेदन किया था। लेकिन इस्राईली अधिकारियों ने 9,890 आवेदनों को सीधे ख़ारिज कर दिया और बाक़ी को भी बहुत देर से परमिट जारी किया।

इस तरह से इस्राईल ग़ज्ज़ा में फ़िलिस्तीनियों को सामूहिक दंड दे रहा है, बाहर की दुनिया जिसकी कल्पना भी नहीं कर सकती। msm

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