Apr ०१, २०२० १२:३६ Asia/Kolkata
  • अंसारुल्लाह ने फिर दिया आरामको पर हमले का इशारा तो सऊदी एलायंस का बदला सुर, अब बड़ी लड़ाई का मोर्चा है मारिब प्रांत!

यमन युद्ध अपने छठें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस बीच सऊदी अरब ने यमन की राजधानी सनआ और अन्य शहरों पर कई हवाई हमले किए हैं। अंसरुल्लाह आंदोलन ने बैलिस्टिक मिसाइलों से रियाज़ और जाज़ान को निशाना बनाया है और साथ ही यह ही कह दिया है कि यह तो सऊदी हमलों के जवाब में हमलों की शुरूआत है।

सऊदी अरब ने भी इसी प्रकार का बयान दिया है कि उसने सनआ पर हमला रियाज़ पर होने वाले मिसाइल हमले के जवाब में किया है।

दोनों ही पक्षों का कहना है कि यह शुरुआत है। यमन की सेना और स्वयंसेवी बलों के प्रवक्ता ने कहा कि हम सऊदी अरब के भीतर हमले करेंगे और सऊदी अरब ने धमकी दी कि वह यमन की मिसाइल ताक़त को पूरी तरह ध्वस्त कर देने के लिए हमले करेगा।

मगर मंगलवार को अचानक एक बड़ा बदलाव देखने में आया। यमन के लिए सऊदी अरब के राजदूत आले जाबिर ने वाल स्ट्रीट जनरल को साक्षात्कार देते हुए कहा कि सऊदी अरब अंसारुल्लाह के साथ लड़ाई बढ़ाना नहीं चाहता बल्कि युद्ध ख़त्म करने के लिए अंसारुल्लाह आंदोलन से रोज़ वार्ता हो रही है। आले जाबिर ने कहा कि सनआ पर हालिया हमला यमनी सेना और अंसारुल्लाह के हमले का जवाब था।

सनआ सरकार के सूचना मंत्री ज़ैफ़ुल्लाह शामी ने अलजज़ीरा टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि कुछ मध्यस्थों के माध्यम से सऊदी अरब से हमारा संपर्क होता है लेकिन सऊदी राजदूत ने हर रोज़ वार्ता की जो बात कही है वह सही नहीं है।

अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो ने भी बयान दिया कि यमन युद्ध के पक्षों को चाहिए कि युद्ध समाप्त करें।

बहुत ज़्यादा तनाव के बाद 24 घंटे के भीतर शांति और वार्ता की बातें शुरू होने से पहले यह हुआ कि यमन की सेना और स्वयंसेवी बलों की ओर से सऊदी अरब की तेल कंपनी आरामको को निशाना बनाने के इशारे दिए गए जिसके बाद सऊदी अरब ने फ़ौरन अपना स्वर बदल लिया।

सऊदी अरब और अमरीका दोनों ने यह आंकलन किया है कि अगर इस समय यमनी सेना और स्वयंसेवी बलों ने आरामको पर हमला कर दिया तो सऊदी अरब बहुत गंभीर स्थिति में फंस जाएगा इसलिए कि तेल की क़ीमतें गिरने की वजह से सऊदी अरब की आमदनी बुरी तरह प्रभावित हुई अब अगर आरामको पर कोई बड़ा हमला हुआ और तेल की सप्लाई रुक गई तो रियाज़ सरकार बेबस होकर रह जाएगी।

दूसरी बात यह है कि अमरीका को इस समय इराक़ में बड़ी गंभीर स्थिति का सामना है। अमरीकी सैनिकों पर लगातार हमले हो रहे हैं जिसकी वजह से उन्होंने कई छावनियां ख़ाली कर दी हैं और दो छावनियों में एकत्रित हो रहे हैं। कहा जाता है कि अमरीका इराक़ में हश्दुश्शाबी फ़ोर्सेज़ पर हमला करने की तैयारी कर रहा है जो ईरान की समर्थक मानी जाती हैं। अब अगर इन हालात में यमन में भी लड़ाई तेज़ हो जाती है तो यह अमरीका के लिए बड़ा सिर दर्द होगा।

सऊदी अरब के सामने एक तरफ़ तो कोरोना का संकट है और दूसरी ओर रूस से उसका शीत युद्ध चल रहा है, तेल की क़ीमतें बहुत गिर गई हैं, अमरीकी कांग्रेस के भीतर सऊदी अरब के ख़िलाफ़ गतिविधियां शुरू हो गई हैं।

यमन के भीतर अंसारुल्लाह ने अलजौफ़ प्रांत पर नियंत्रण करने के बाद अब मारिब प्रांत पर नियंत्रण की तैयारी कर ली है जहां तेल और गैस के भंडार हैं। इससे यमन के भीतर अंसारुल्लाह की स्थिति और भी मज़बूत हो जाएगी।  यमन में संयुक्त राष्ट्र संघ के समन्वयक ने भी चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में मारिब में लड़ाई तेज़ हो सकती है।

युद्ध के छठें साल में यमन में बुनियादी बदलाव आ रहा है और इस बदलाव में हर मोर्चे पर यमनी सेना और अंसारुल्लाह आंदोलन की स्थिति बहुत मज़बूत होती नज़र आ रही है।

 

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