Apr ०२, २०२० ०९:२७ Asia/Kolkata
  • सीरिया और इराक़ पर इन दिनों क्यों तेज़ हो गए हैं अमरीका और इस्राईल के हमले? क्या पैट्रियट मिसाइल अमरीकी छावनियों की रक्षा कर पाएंगे? ट्रम्प से हुई बड़ी ग़लती!

आज के हालात में जब अमरीका कोरोना वायरस की गंभीर समस्या में फंसा हुआ है और रोज़ाना सैकड़ों अमरीकियों की जानें जा रही हैं तब इस्राईली युद्धक विमानों का सीरिया के हुम्स शहर के क़रीब सैनिक ठिकानों पर हमला और अमरीका का सीरिया तथा इराक़ में एनुल असद, अलताजी और अलतनफ़ छावनियों पर पैट्रियट मिसाइल सिस्टम स्थापित करना यह ज़ाहिर करता है कि सीरिया और इराक़ इस समय मध्यपूर्व के इलाक़े में अमरीका और इस्राईल की योजनाओं के मार्ग में बहुत बड़ी रुकावट बन गए हैं।

इस्राईली हमला हो या अमरीकी सैनिक गतिविधियां इनसे यह हरगिज़ ज़ाहिर नहीं होता कि वह मज़बूत पोज़ीशन में हैं बल्कि इन गतिविधियों से पता चलता है कि आने वाले दिनों के हालात के बारे में सोच कर अमरीकी और इस्राईली सरकारें गंभीर चिंता में हैं। सीरियाई सरकार ने संयम का परिचय दिया जो उसकी समझदारी का सुबूत है।

पिछले वर्षों में इस्राईली युद्धक विमानों ने सीरिया पर 230 से अधिक बार हमले किए हैं मगर इस्राईल अपना कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया। सीरिया आज भी उसी तरह से ताक़तवर और इस्राईल की आंख का कांटा बना हुआ है। सीरियाई सरकार और सेना ने अपनी धरती के 80 प्रतिशत इलाक़ों को विदेशों द्वारा समर्थित चरमपंथियों के क़ब्ज़े से आज़ाद करा लिया और साथ ही सारे नागरिक, सुरक्षा व रक्षा संस्थानों की सुरक्षा की।

अब आते हैं इराक़ में अमरीकी छावनियों की तरफ़। पैट्रियट मिसाइल सिस्टम अमरीकी छावनियों की रक्षा नहीं कर पाएगा क्योंकि यह सिस्टम सऊदी अरब में पूरी तरह नाकात साबित हुआ है। वहां यमनी फ़ोर्सेज़ आए दिन ड्रोन और मिसाइलों से हमले कर रही हैं और यह मिसाइल अपने ठिकानों पर पहुंचकर तबाही मचा रहे हैं। यानी सऊदी अरब में स्थापित अमरीकी पैट्रियट मिसाइल सिस्टम खिलौना बनकर रह गया है।

इराक़ में संसद से पास होने वाले अमरीकी सैनिको को बाहर निकालने के प्रस्ताव पर अमल होना तय है यानी अमरीकी सैनिकों को हर हाल में इराक़ से निकलना पड़ेगा।

कोरोना वायरस ने इस समय अमरीकी विमानवाहक युद्धपोतों को संकट में झोंक दिया है। बहुत जल्द अमरीकी सैनिक बंदूक़ें छोड़कर कोरोना वायरस से लड़ते दिखाई देंगे।

अमरीका कोरोना वायरस की महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई हार चुका है, उसकी राजनैतिक और रक्षा कमज़ोरियां सारी दुनिया के सामने आ चुकी हैं। अमरीकी सुपरमेसी की बातें करने वाले केवल अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।

इराक़ बहुत जल्द अपने हर सेक्टर को पूरी तरह संभाल लेगा और वहां मौजूद राजनैतिक शून्य की स्थिति बहुत जल्द दूर होगी क्योंकि इसका कारण अमरीका है। सीरिया भी पहले से ज़्यादा ताक़तवर बनकर उभरेगा और इस्राईली हमलों का सही समय पर जवाब देगा।

दोनों देशों के लिए यह गौरव की बात है कि उन्हें अमरीका और इस्राईल का दुष्ट एलायंस निशाना बना रहा है वह भी एसे समय में जब बहुत से अरब शासक इस्राईली प्रधानमंत्री नेतनयाहू से हाथ मिलाने के लिए लंबी लाइन लगाकर खड़े हैं जबकि नेतनयाहू तो ख़ुद अपनी रक्षा करने में असमर्थ हैं। नेतनयाहू ग़ज़्ज़ा पट्टी और वहां के मिसाइलों की कल्पना करके कांप जाते हैं।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के प्रख्यात लेखक व टीकाकार

 

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