Apr ०६, २०२० ०९:५८ Asia/Kolkata
  • लेबनान में चल रही है भयानक साज़िश, हिज़्बुल्लाह को गृह युद्ध और टारगेट किलिंग में घसीटने की गतिविधियां, सैयद हसन नसरुल्लाह ने अब तक संयम दिखाया है, लेकिन आगे क्या होगा?

हिज़्बुल्लाह लेबनान के एक बड़े कमांडर मुहम्मद अली युनुस की घात लगाकर की गई टारगेट किलिंग से पता चलता है कि हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ एक और भयानक साज़िश शुरू हो गई है जिसका मक़सद उसे लेबनान के भीतर इस्राईल के एजेंटों की हत्या के लिए उकसाना है।

हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह ने बड़ी समझदारी दिखाई जब उन पर दबाव डाला गया कि वह लेबनान में इस्राईल के गिरफ़तार एजेंट आमिर फ़ाख़ूरी को लेबनान से भागने से रोकें। उन्होंने बहुत अधिक संयम दिखाया। मगर लगता है कि इस बड़ी साज़िश की कई कड़ियां हैं और इसके माध्यम से लेबनान को गृह युद्ध की ओर ढकेला जा रहा है।

जो ताक़त फ़ाख़ूरी को अमरीका से लेबनान लाई और लेबनान में उसे भरपूर सुरक्षा दी उसे पता था कि यह बड़ी मछली है और इसे टारगेट किलिंग और गृह युद्ध की आग भड़काने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस्राईल के पूर्व एजेंट फ़ाख़ूरी का इतना ही महत्व है कि वाशिंग्टन पहुंचने पर अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ख़ुद उसका स्वागत किया। फ़ाख़ूरी लेबनान में इस्राईल के लिए काम कर चुका है और सैकड़ों लोगों की हत्या का ज़िम्मेदार है।

यह बात भी सोचने वाली है कि फ़ाख़ूरी के लेबनान से भागने के कुछ ही दिन बाद दक्षिणी लेबनान के मिया इलाक़े में अंतवान अलहायक की हत्या हुई। वह फ़ाख़ूरी का सहयोगी था। इस हत्या के बाद अब हिज़्बुल्लाह के कमांडर मुहम्मद युनुस की हत्या कर दी गई है।

लेबनान में टारगेट किलिंग की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं लेकिन हालिया समय में इन घटनाओं का शुरू होना बताता है कि टारगेट किलिंग का सिलसिला शुरू हो गया है और जल्दी रुकने वाला नहीं है। हो सकता है कि कुछ और इस्राईली एजेंट मारे जाएं और हिज़्बुल्लाह के कमांडरों और संघर्षकर्ताओं की हत्या की जाए।

कुछ लोगों का कहना है कि फ़ाख़ूरी के मामले में हिज़्बुल्लाह ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया और वह लेबनान की जेल से निकलकर बैरूत में अमरीकी दूतावास पहुंचाया गया और वहां से अमरीका भाग गया तो इसका नतीजा यह निकला कि लेबनान में हिज़्बुल्लाह के विरोधी गुट की हिम्मत बढ़ गई। जिस समय हिज़्बुल्लाह का ध्यान लेबनान के आंतिरक हालात, प्रदर्शनों और कोरोना वायरस जैसे संकटों की ओर केन्द्रित था उसी समय इस्राईली ख़ुफ़िया एजेंसी मुसाद अपनी साज़िश के जाल बुन रही थी।

यह ख़तरनाक स्थिति है। इसकी योजना बनाने वाले लेबनान को अशांति और हिंसा की खाई में झोंक देना चाहते हैं। यह साज़िश तैयार करने वालों को अमरीका, इस्राईल और कुछ अरब सरकारों का समर्थन हासिल है।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने हमेशा और ख़ास तौर पर इन दिनों बहुत अधिक संयम दिखाया और हमें नहीं लगता कि वह इस जाल में फंसेंगे जिसमें उनके दुशमन उन्हें फंसाना चाहते हैं। लेकिन अगर हालात इसी तरह विस्फोटक बने रहे तो हिज़्बुल्लाह का जवाब दहला देने वाला होगा। हम कामना करते हैं कि लेबनान इस प्रकार के हालात से दूर रहे।

साभार रायुल यौम

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