May २५, २०२० १०:४८ Asia/Kolkata
  • इराक़ की नई सरकार क्या ईरान और अमरीका के बीच संतुलन बनाने में सफल रहेगी? क्या सऊदी अरब, इरक़ में ईरान की जगह ले सकता है?

इराक़ के उप प्रधान मंत्री और वित्त और तेल के कार्यवाहक मंत्री अली अल्लावी के शनिवार को रियाज़ के दौरे के बाद, सऊदी अरब ने बग़दाद में फिर से अपने राजदूत की तैनाती का एलान कर दिया है।

ग़ौरतलब है कि इराक़ी अधिकारी सऊदी अरब पर आतंकवादी गुटों, ख़ास तौर पर तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश के समर्थन का आरोप लगाते रहे हैं, जिसकी वजह से दोनों देशों के बीच तनाव था और रियाज़ ने बग़दाद से अपना राजदूत वापस बुला लिया था।

अल्लावी से मुलाक़ात के बाद, सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रहान का कहना थाः इससे दोनों देशों के बीच रिश्तों को मज़बूत करने की इच्छा का पता चलता है।

सऊदी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, कोरोना वायरस महामारी के कारण दुनिया भर में तेल की मांग में भारी कमी से तेल निर्यात पर टिकी इराक़ और सऊदी अरब की अर्थव्यवस्थाओं को भारी संकट का सामना है।

इराक़ी उप प्रधान मंत्री की सऊदी अरब की यात्रा को आर्थिक समर्थन और नए प्रधान मंत्री मुस्तफ़ा अल-काज़ेमी की पड़ोसी देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की विदेश नीति के तौर पर देखा जा रहा है।

सऊदी अरब की अपनी यात्रा के दौरान, इराक़ी मंत्री ने वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जादान समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात की और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और व्यापार में वृद्धि करने पर विचार विमर्श किया।

सऊदी टीवी चैनल अल-अरबिया ने अल्लावी का हवाला देते हुए कहा है कि इराक़ ने सऊदी अरब को अक्कास गैस फ़ील्ड में निवेश के लिए आमंत्रित किया है।

ग़ौरतलब है कि अक्कास गैस फ़ील्ड इराक़ की सबसे बड़ी ऊर्जा फ़ील्ड है, जो पश्चिमी प्रांत अल-अंबार में सीरिया से लगने वाली सीमा पर स्थित है।

अमरीका की कोशिश है कि वह इराक़ की ऊर्जा ज़रूरतों की आपूर्ति में ईरान की भूमिका को कम कर दे और उसकी जगह अपनी कंपनियों और सऊदी अरब जैसे अपने सहयोगी देशों की भूमिका में वृद्धि कर दे।

इराक़ गैस और बिजली की आपूर्ति में काफ़ी हद तक ईरान पर निर्भर है, लेकिन ईरान पर अमरीका के एकपक्षीय प्रतिबंधों के कारण वाशिंगटन, बग़दाद पर ईरान से ऊर्जा आयात में कमी पर दबाव डालता रहा है।

हालांकि राष्ट्रीय ज़रूरतों और हितों के मद्देनज़र अब तक इराक़ी सरकारें अमरीकी दबाव को अनदेखा करती रही हैं, लेकिन अल-काज़मी के बग़दाद की सत्ता संभालने के बाद इराक़ की रणनीति में बदलाव हो सकता है।

इराक़ की ख़ुफ़िया एजेंसी के प्रमुख रह चुके नए प्रधान मंत्री को अमरीका और उसके सहयोगियों का विश्वास पात्र माना जाता रहा है, लेकिन हाल ही में एक लम्बे राजनीतिक गतिरोध के बाद जब उन्होंने अपनी सरकार का गठन किया तो उन्हें इराक़ के सभी राजनीतिक दलों का समर्थन मिला, जिसके कारण काज़मी नई सरकार बनाने में सफल हो सके।

सरकार के गठन के बाद, काज़मी ने सबसे पहले ईरान के प्रभाव वाले स्वयं सेवी बल हशदुश्शाबी के सैन्य ठिकाने का दौरा करके यह संकेत दिया कि वह आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई हो या नए इराक़ का निर्माण हो स्वयं सेवी बलों और शिया राजनीतिक दलों को नज़र अदांज़ नहीं कर सकते।

काज़मी इराक़ में ईरान और अमरीका के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन इस कोशिश को पहले से ही परिणामहीन इसलिए माना जा सकता है, क्योंकि इराक़ी जनता और अधिकांश राजनीतिक दलों की यह प्रबल मांग है कि अमरीकी सैनिक उनके देश से बाहर निकलें।

क़ुद्स डे पर अपने महत्वपूर्ण भाषण में ईरान के सुप्रीम लीडर ने एक बार फिर साफ़ शब्दों में यह एलान कर दिया है कि ईरान, इराक़ और सीरिया से अमरीका को बाहर निकाल कर दम लेगा। सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा सैयय्द अली ख़ामेनई की इस चेतावनी की गूंज काफ़ी दिनों तक व्हाइट हाउस और पेंटागन में गूंजती रहेगी।

इससे ईरान ने इराक़ की नई सरकार को भी यह संदेश दे दिया है कि उसके लिए भी इराक़ी जनता की इस मांग को नज़र अंदाज़ करना आसान नहीं होगा और इस मुद्दे पर किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

पिछले कई दशकों से इराक़, सऊदी अरब और अन्य क्षेत्रीय देशों में अमरीकी सैन्य उपस्थिति से क्षेत्रीय शांति व स्थिरता भंग हुई है और आतंकवाद को बढ़ावा मिला है। इसलिए ईरान और इस्लामी प्रतिरोध क्षेत्र में अमरीका की उपस्थिति पर किसी भी तरह का कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। msm

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