May २७, २०२० ०८:०१ Asia/Kolkata
  • नसरुल्लाहः हिज़्बुल्लाह के पास वह सैनिक शक्ति है जो 2006 से पहले नहीं थी, युद्ध हुआ तो इस्राईल का मिट जाना तय, युद्ध के बग़ैर भी इस्राईल ख़त्म हो जाएगा!

लेबनान के हिज़्बुल्लाह आंदोलन के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि हिज़्बुल्लाह के पास आज वह सैनिक शक्ति है जो 2006 के इस्राईल युद्ध से पहले नहीं थी जबकि रणनीति तैयार करने की हिज़्बुल्लाह की ताक़त में अपूर्व विस्तार हुआ है।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने एक विस्तृत इंटरव्यू में कई मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह जज़्बा जिसने इस्राईल को धूल चटा दी आज भी जवान हे और हमें अपने संघर्षकर्ताओं पर बड़ा भरोसा है।

इस्राईली क़ब्ज़े से दक्षिणी लेबनान की धरती की आज़ादी की 20वीं वर्षगांठ पर सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि इस्राईल के युद्ध मंत्री के पास दक्षिणी लेबनान पर इस्राईली क़ब्ज़े के समय मिलने वाले भारी पराजय का अच्छा अनुभव है। सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने एतिहासिक भाषण का हवाला देते हुए कहा कि उस भाषण में उन्होंने इस्राईल को मकड़ी के जाले से भी ज़्यादा कमज़ोर बताया था तो इसकी वजह यह थी कि ठीक उसी समय इस्राईली सेना को लगातार पराजय हो रही थी।

हिज़्बुल्लाह के प्रमुख ने कहा कि अब तक इस्राईली नेतृत्व उस भाषण की बात करता है। उन्होंने कहा कि इस्राईल पर अंकुश लगाने वाली हमारी प्रतिरोधक ताक़त ज़मीनी सतह पर किए गए प्रयासों का नतीजा है। सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि इस्राईल का भविष्य यह है कि वहां आकर बसने वाले याहूदी फ़िलिस्तीन छोड़कर अपने असली घरों की ओर लौटेंगे, यह होना तय है।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि भविष्य की किसी भी लड़ाई में इस्राईल की पराजय तय है। उन्होंने कहा कि जब वह विदेशी सहारा जिसकी वजह से इस्राईल अब तक बाक़ी है कमज़ोर पड़ रहा है तो उसका ध्वस्त हो जाना निश्चित है। सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि इलाक़े में अमरीका की प्रत्यक्ष उपस्थिति का यह मतलब है कि उसके घटक कमज़ोर पड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि यहीं से प्रतिरोध मोर्चे की ताक़त का अनुमान लगाया जा सकता है।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने इस्राईल के बारे में कहा कि वह यहूदियों की धार्मिक सरकार नहीं बल्कि एक नस्लपरस्त सरकार है। उन्होंने कहा कि इस्राईल के क़ब्ज़े वाले इलाक़े में मौजूद फ़िलिस्तीनियों में आज प्रतिरोध की भावना हर दौर से ज़्यादा है और यह प्रतिरोधक मोर्चे की एक बड़ी ताक़त है।

सीरिया के बारे में बात करते हुए सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि दुशमनों को उम्मीद थी कि बश्शार असद सरकार गिर जाएगी, सीरिया की सेना और धरती टुकड़ों में बंट जाएगी और हिज़्बुल्लाह आंदोलन के सारे संघर्षकर्ता लेबनान लौट जाएंगे। उन्होंने कहा कि सीरिया सरकार के विरुद्ध लड़ने वाले कुछ विद्रोही संगठन तो इस्राईल के सीधे संपर्क में थे।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने क़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर जनरल क़ासिम सुलैमानी की शहादत को याद करते हुए कहा कि जनरल क़ासिम सुलैमानी पर अमरीका के आतंकी हमले के बाद अब अमरीका से लड़ाई केवल सामरिक मैदान में सीमित नहीं है बल्कि बहुत विस्तृत हो गई है। उन्होंने कहा कि इराक़ में जनता के भीतर यह भावना पायी जाती है कि अमरीकी सैनिकों को बाहर निकालना है और सीरिया में ग़ैर क़ानूनी रूप से मौजूद अमरीकी सैनिकों को भी बाहर निकलना पड़ेगा।

हिज़्बुल्लाह के प्रमुख ने इसके साथ ही कहा कि ईरान और अमरीका के बीच युद्ध की संभावना बहुत कम है और इस्राईल भी लेबनान के ख़िलाफ़ कोई युद्ध शुरू करने की पोज़ीशन में नहीं है। सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि यदि इस्राईल ने बड़ा युद्ध शुरू किया तो उसके नतीजे में इस्राईल का मिट जाना तय है। उन्होंने कहा कि वैसे भी हालात बदलने के साथ साथ ही वह बुनियादें ख़त्म होती जा रही हैं जिन पर इस्राईल टिका हुआ है तो इसका मतलब यह है कि युद्ध के बग़ैर भी इस्राईल ख़त्म होने वाला है।

 

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