Jun ०३, २०२० ११:०३ Asia/Kolkata
  • मस्जिदुल अक़सा के भविष्य को लेकर सऊदी अरब और इस्राईल के बीच ख़ुफ़िया वार्ता का हुआ पर्दाफ़ाश

सऊदी अरब और इस्राईल ने अमरीका की मध्यस्थता से मुसलमानों के तीसरे सबसे पवित्र स्थल मस्जिदुल अक़सा के भविष्य को लेकर ख़ुफ़िया वार्ता शुरू कर दी है।

इस्राईल हयूम की रिपोर्ट के मुताबिक़, सऊदी अरब और इस्राईल पिछले दिसम्बर से अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की तथाकथित डील ऑफ़ द सेंचरी को लागू करने को लेकर बातचीत कर रहे हैं। इस बातचीत में इस्राईल, सऊदी अरब और अमरीका के वरिष्ठ राजनयिकों की टीम शामिल है।

फ़िलिस्तीन-इस्राईल मुद्दे के समाधान के लिए ट्रम्प द्वारा पेश की गई विवादित डील ऑफ़ द सेंचरी में बैतुल मुक़द्दस या यरूशलम को इस्राईल की अविभाजित राजधानी के रूप में मान्यता दी गई है। इसी तरह से यह डील फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों से उनकी घर वापसी का अधिकार भी छीन लेती है।

हालांकि फ़िलिस्तीनियों ने एकमत होकर इस अमरीकी-इस्राईली डील को ठुकरा दिया है, लेकिन सऊदी अरब और उसके सहयोगी अरब देश ज़ायोनियों के हाथों फ़िलिस्तीन और मस्जिदुल अक़सा का सौदा करने में लगे हुए हैं।

इस्राईल और सऊदी अरब मस्जिदुल अक़सा की देखभाल करने वाली इस्लामी वक़्फ़ परिषद में आले सऊद शासन को शामिल करने का प्रयास कर रहे हैं, विशेष रूप से जिसके अधिकार जॉर्डन के शाही परिवार के पास हैं।

सऊदी अरब के एक वरिष्ठ राजनयिक का कहना है कि शुरूआत में जॉर्डन सरकार ने इसका विरोध किया था, लेकिन अमरीका और इस्राईल के दबाव में आकर सऊदी अरब को इस परिषद का सदस्य बनाने पर सहमति दे दी।

हाल ही में यमनी बुद्धिजीवियों के संगठन ने एक बयान जारी करके इस्राईल और अरब देशों के बीच रिश्तों को सामान्य करने के लिए जारी प्रयासों की निंदा की थी। इस बयान में सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात को इन प्रयासों के किसी भी नकारात्मक परिणाम के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया था।

यमन के इस संगठन ने बैतुल मुक़द्दस और मस्जिदुल अक़सा की इस्लामी पहचान के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ के प्रति चेतावनी देते हुए कहा था कि ज़ायोनियों को यहां की एक बालिश्त ज़मीन भी हड़पने नहीं दी जाएगी। msm

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