Jul ०१, २०२० १५:२५ Asia/Kolkata
  • कुत्तों और अमरीकी अधिकारियों में क्या है समानता? ... इराक़ी सुरक्षों बलों ने हिज़्बुल्लाह पर हमला क्यों किया? रूसी न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट  

अभी कुछ दिन पहले इराक़ के आतंकवाद निरोधक बल ने अमरीका के सहयोग से इराक़ के हिज़्बुल्लाह ब्रिग्रेड की एक छावनी पर हमला किया और इस हमले को अमरीका व इस्राईल तथा सऊदी अरब के मीडिया ने खूब कवरेज दी।

जब इराक़ी हिज़बुल्लाह की छावनी पर आतंकवाद निरोधक दस्ते ने हमला किया तो  छावनी में मौजूद हिज़्बल्लाह के सैनिक, आत्मरक्षा में लड़ सकते थे लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया और इराकी एन्टी टेरर युनिट के सदस्यों को आसानी से छावनी के भीतर घुसने दिया। अगर वह लड़ते तो हमला की योजना बनाने वालों का मक़सद पूरा हो जाता क्योंकि वह यह प्रचार करते कि उस छावनी में कुछ था जिसकी वजह से झड़प की नौबत आ गयी।

बहरहाल इराक़ के आतंकवाद निरोधक बल ने हिज़्बुल्लाह की छावनी में घुस कर तलाशी ली और कई को गिरफ्तार भी किया। यह हमला इस लिए भी बहुत अहम है क्योंकि इराक़ के आतंकवाद निरोधक बल को अमरीका ने ट्रेनिंग दी है और कहा जाता है कि उस पर अमरीका का काफी प्रभाव है। इसी तरह कहा जाता है कि  इराक़ का हिज़्बुल्लाह ब्रिगेड ईरान का समर्थक है। इन तथ्यों के मद्दे नज़र यह समझा जा सकता है कि इस क़दम को क्यों मीडिया में इतना महत्व दिया जा रहा है?  अस्ल में अमरीकी इस तरह से हिज़्बुल्लाह को परखना चाह रहे थे।

जब मुस्तफा अलकाज़ेमी इराक़ के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने ब्रिगेडियर अब्दुल वह्हाब साएदी को आतंकवाद निरोधक बल का कमांडर बना दिया। वह पहले भी इसी बल के कमांडर थे और दाइश के खिलाफ युद्ध का संचालन किया लेकिन इराक़ के पूर्व प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी ने अमरीका से बेहद करीबी संबंधों की वजह से साएदी को उनके पद से हटा दिया था लेकिन अलकाज़ेमी ने उन्हें फिर वही पद दे दिया है।

इराक़ी प्रधानमंत्री अलकाज़ेमी

 

जब इराक़ में सड़कों पर हंगामे हुए और उनकी वजह से इराक़ की सरकार गिर गयी तो उन हंगामों में यही ब्रिगेडियर साएदी अमरीका के लिए एक महत्वपूर्ण हथकंडा थे। इराक़ के स्वंय सेवी बल अलहश्दुश्शाबी के प्रति साएदी की दुश्मनी से बहुत से लोग अवगत हैं तो ज़ाहिर है सत्ता में वापसी को बाद वह स्वंय सेवी बल से बदला ज़रूर लेना चाहेंगे।

इसके साथ यह भी ध्यान रहे कि स्वंय मुस्तफा अलकाज़ेमी के भी अमरीका और सऊदी अरब से निकट संबंध हैं और जल्द ही वह इन दोनों देशों की यात्रा करने वाले हैं ताकि यह साबित कर सकें कि वह इराक़ के उन शियों में से नहीं हैं जो ईरान का समर्थन करते हैं।

इन हालात में यह समझा जा सकता है कि स्वंय सेवी बल अलहश्दुश्शाबी ने क्यों बगदाद के ग्रीन ज़ोन में घुस कर अमरीकी दूतावास को घेर लिया ? अस्ल में स्वंय सेवी बल अलहश्दुश्शाबी उन क्षेत्रों में तैनात है जहां आतंकवादी संगठन दाइश सक्रिय है इस लिए किसी ने यह नहीं सोचा था कि वह इतनी जल्दी बगदाद के सब से अधिक सुरक्षित क्षेत्र में इतनी जल्दी अपने इतने सैनिकों के साथ पहुंच सकता है।

अस्ल में स्वंय सेवी बल के कई संगठनों का इराक़ी हिज़्बुल्लाह से मतभेद है और चूंकि कताइब हिज़्बुल्लाह औपचारिक रूप से स्वंय सेवी बल अलहश्दुश्शाबी का भाग भी नहीं है इस लिए इराक़ में कुछ अधिकारियों को यह लगा था कि स्वंय सेवी बल हिज़्बुल्लाह ब्रिगेडियर की मदद में सोच विचार करेगा विशेष कर इस लिए भी स्वंय सेवी बल इराक़ी सेना का हिस्सा है और उसकी कमान इस देश के प्रधानमंत्री के हाथ में है। अमरीका ने यह सोचा था कि चूंकि स्वंय सेवी बल अलहश्दुश्शाबी के अधिकांश सदस्य इराक़ी सेना से वेतन लेते हैं इस लिए उन्हें स्वंय सेवी बल से अधिक अपने हितों की चिंता होगी।

लेकिन अमरीकी सोच गलत साबित हुई और अलहश्दुश्शाबी ने यह साबित कर दिया कि स्वंय सेवी बल सब से ऊपर है और किसी भी तरह का आर्थिक लाभ उन्हें अमरीका या अमरीका से संबंधित अधिकारियों के आदेशों के पालन पर मजबूर नहीं कर सकता।

आतंकवाद निरोधी दस्ते के प्रमुख साएदी

 

जब हालात इस हद तक खराब हो गये तो इराक़ी प्रधानमंत्री अलकाज़ेमी ने हस्तक्षेप किया और माफी मांगते हुए हिज़्बुल्लाह के सभी सदस्यों को रिहा करने का आदेश दिया और यह भी कहा कि उन्हें इस कार्यवाही के बारे में पता नहीं था। हालांकि इस बात की कम ही संभावना है लेकिन बात यह है कि स्वंय सेवी बल की प्रतिक्रिया और  इराक़ में अमरीकियों के लिए खतरा पैदा होने की वजह से इराकी प्रधानमंत्री को लीपापोती करना पड़ी।

इराक़ में जो कुछ हुआ उससे यह तो साबित हो गया कि अमरीकी खूब हंगामे के साथ शक्ति प्रदर्शन करते हैं लेकिन जब उन्हें तगड़ा जवाब मिलता है तो उतनी ही तेज़ी से पीछे हट जाते हैं, अमरीकी उसी वक्त सीना ताने आगे बढ़ते हैं जब उन्हें यकीन होता है कि उनकी राह में कोई रुकावट नहीं है। इस लिए यह बात पक्की है कि इराक़ में हिज़्बुल्लाह की छावनी पर हमले का जो मकसद था उसका परिणाम उल्टा निकला है।

इराक़ में जो कुछ हुआ उसे देख कर कुत्ते के बारे में कही जाने वाली एक बात याद आ जाती है। कहते हैं कि अगर कोई कुत्ता भौंकते हुए आप पर हमला करे और आप उससे डर कर भागने लगें तो वह ज़रूर काटेगा लेकिन अगर आप रुक कर डंडा उठा लें और कुत्ते को लगे कि आप उससे डर नहीं रहे हैं और उसे मार देंगे तो वह यकीनी तौर पर भाग जाएगा। अमरीकियों का हाल भी यही है। QA साभार, स्पूतनिक न्यूज़ एजेन्सी, पार्स टूडे का सहमत होना आवश्यक नहीं।

 

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