Jul ०२, २०२० १८:०६ Asia/Kolkata
  • क्या आर्थिक दबाव की वजह से ईरान से दूर हो जाएगा ओमान?

​​​​​​​इलाक़े में ओमान को ईरान का बहुत बड़ा और अच्छा दोस्त समझा जाता है लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। एलमानिटर ने इस संभावना का जायज़ा लिया है।

फार्स की खाड़ी के तटवर्ती अरब देश, ओमान में पुंजीनिवेश में दिलचस्पी दिखा रहे हैं लेकिन इस बारे में विशेषज्ञों का ख्याल है कि इससे ओमान की स्वाधीनता पर असर पड़ सकता है। हालिया बैठक में ओमान के साथ आर्थिक संबंधों के बारे में चर्चा हुई । 11 जून के प्रकाशित होने वाली रिपोर्ट के अनुसार इस बैठक में आर्थिक सहयोग पर तो कोई फैसला नहीं हो पाया लेकिन इस पर सहमति बनी कि ओमान अपने पड़ोसियों से आर्थिक सहायता ले सकता है।

     विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ओमान की सहायता उसके अरब पड़ोसी देशों ने की तो उससे उसकी आर्थिक स्वाधीनता प्रभावित हो सकती है याद रहे कि ओमान ने सऊदी अरब के नेतृत्व में यमन में सैन्य कार्यवाही और क़तर के खिलाफ घेराबंदी से स्वंय को दूर रखा।

     विशेषज्ञों की राय में दो कारणों से क्षेत्र के अरब देश, ओमान की आर्थिक मदद कर सकते हैं। एक तो यह कि उन्हें डर है कि ओमान की आर्थिक समस्याएं उनके बाज़ारों पर भी प्रभाव डाल सकती हैं। दूसरे यह कि वह ओमान की विदेश नीति को प्रभावित करना चाहते हैं।

 

     इस वक्त फार्स की खाड़ी देशों के बीच जिस तरह के मतभेद हैं उनको देखते हुए यह नहीं लगता कि वह सन 2011 की तरह 20 अरब डालर का कोई फंड अपने ओमान और बहरैन की मदद के लिए बना पाएंगे।

 फार्स की खाड़ी में जिस प्रकार का ध्रुवीकरण है उसके दृष्टिगत कुछ लोगों का कहना है कि कुछ देशों के हित, क्षेत्रीय एकजुटता को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इन हालात में ओमान को दी जाने वाली हर प्रकार की मदद के लिए सऊदी अरब और यूएई की नीतियों का समर्थन ज़रूरी है लेकिन इन हालात में ओमान की ईरान से दोस्ती सऊदी अरब के लिए एक समस्या है।

     अगर सऊदी अरब या  यूएई ओमान की मदद करेंगे तो वह उससे यह मांग कर सकते हैं कि वह वाशिंग्टन के साथ अपने अच्छे संबंधों का इस्तेमाल करके उनके हितों की रक्षा करे।

     इन हालात में विशेषज्ञों का कहना है कि ओमानी अधिक ठोस क़दमों के साथ ध्रुवीकरण के इस दौर में किसी एक खैमे की तरफ बढ़ सकते हैं।

     ओमान को कुवैत से मदद की उम्मीद है जो एकमात्र देश है जो इस संकटमय स्थिति में भी अपनी आर्थिक दशा संभालने में सफल रहा इसी तरह क़तर भी ओमान की मदद कर सकता है क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों ने उसकी अर्थ व्यवस्था को ही नुक़सान नहीं पहुंचाया है।

     विशेषज्ञों के अनुसार अगर ओमान क़तर की तरफ बढ़ता है तो फिर इस बात की संभवना नहीं है कि उसकी विदेश नीतियों पर कोई प्रभाव पड़ेगा लेकिन जो हालात हैं उनमें यह नहीं कहा जा सकता कि उस दशा में सऊदी अरब और यूएई की क्या प्रतिक्रिया होगी?

      ओमान ने सऊदी अरब के नेतृत्व में क़तर की घेराबंदी के दौरान, क़तर की मदद की और इस दौरान क़तर और ओमान के बीच व्यापार भी तीन गुना अधिक बढ़ गया है।  

     इसी मध्य अमरीका भी तेज़ी के साथ ओमान के निकट जा रहा है और हालिया वर्षों में दोनों देशो के मध्य कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अमरीका ओमान के साथ समझौत करके चीन को पीछे छोड़ना चाहता है क्योंकि ओमान पर चीन का सब से अधिक कृपा दृष्टि है इस लिए अमरीका उस पर अधिक ध्यान दे रहा है। Q.A.

 

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