Jul ०४, २०२० १३:४० Asia/Kolkata
  • आले सऊद को इराक़ियों की खुली वाॅर्निंग, आयतुल्लाह सीस्तानी का अनादर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

सऊदी अरब इराक़ में जनता के बीच फूट डालने के उद्देश्य से इस देश के उच्च धार्मिक नेताओं के अनादर के लिए अपने मीडिया को इस्तेमाल कर रहा है।

अश्शरक़ुल औसत नामक अरबी समाचारपत्र ने इराक़ के वरिष्ठ धर्मगुरू आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली सीस्तानी का एक अपमानजनक कैरिकेचर प्रकाशित किया है। सऊदी अरब के इस अख़बार की इस हरकत पर पूरे इराक़ी राष्ट्र में आक्रोश फैल गया है। इराक़ के राजनैतिक व सामाजिक हल्क़ों ने इस अपमानजनक हरकत की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि यह सऊदी समाचारपत्र इससे पहले भी इराक़ में फ़ित्ना पैदा करने और फूट डालने के लिए इस राष्ट्र के ख़िलाफ़ अपमानजनक लेख और ख़बरे प्रकाशित करता रहा है।

 

इराक़ के अनेक धर्मगुरुओं ने एक संयुक्त बयान जारी करके अख़बार अश्शरक़ुल औसत की कड़ी निंदा की है और कहा है कि इराक़ में फूट डालने और वरिष्ठ धार्मिक नेतृत्व पर कीचड़ उछालने के संबंध में आले सऊद के तरीक़े में कोई बदलाव नहीं आया है और इराक़ के ख़िलाफ़ उसकी शत्रुतापूर्ण नीतियां जारी हैं। सोशल मीडिया पर भी सऊदी अरब की बड़ी फ़ज़ीहत हो रही है और "सऊदी अरब, मध्यपूर्व के लिए कलंक है" हेशटैग शुक्रवार की रात से ही ट्रेंड कर रहा है।

 

सऊदी अरब, जो ख़ुद ही कोरोना वायरस, यमन युद्ध में निरंतर पराजय और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं व बुद्धिजीवियों की गिरफ़्तारी जैसी अनेक समस्याओं में घिरा हुआ है, इन सारी बातों की अनदेखी करके अपने पिट्ठू मीडिया के सहारे नफ़रत के बीच बोने और अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप जैसी नीति अपनाए हुए हैं ताकि क्षेत्र में शांति व सुरक्षा को ख़तरे में डाल दे। आयतुल्लाह सीस्तानी का अपमानजनक कार्टून भी इसी का एक उदाहरण है। सऊदी अरब की विध्वंसक भूमिका किसी से छिपी हुई नहीं है। वह वैसे तो अपने आपको इराक़ का भाई बताता है लेकिन इस देश में हज़ारों आतंकियों को भेजता है ताकि वे वहां विध्वंसक कार्यवाहियां कर सकें।

 

अमरीका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने अपनी एक किताब में इस बात को खुल कर स्वीकार किया था कि आतंकी गुट दाइश को अमरीका ने ही अस्तित्व प्रदान किया है। उन्होंने इसी के साथ यह भी लिखा था कि दाइश को सऊदी अरब का पूरा आर्थिक समर्थन हासिल था। इराक़ के वरिष्ठ धर्मगुरू आयतुल्लाह सीस्तानी ने दाइश के ख़िलाफ़ जेहाद का फ़त्वा दे कर अमरीका व सऊदी अरब का खेल बिगाड़ दिया। तभी से ये दोनों देश उनके दुश्मन बने हुए हैं। इराक़ के स्वयं सेवी बल के कमांंडरों से अमरीक व सऊदी अरब की बहुत अधिक दुश्मनी की वजह भी यही है कि आयतुल्लाह सीस्तानी के फ़त्वे के परिप्रेक्ष्य में बनने वाले इस बल ने इराक़ में दाइश की कमर तोड़ने में अहम रोल निभाया है। सऊदी अरब के एमबीसी चैनल ने कुछ ही दिन पहले शहीद अबू महदी अलमुहंदिस का अनादर किया था जिस पर इराक़ के सरकारी व सामाजिक हल्क़ों ने कड़ी प्रतिक्रिया दिखाई थी।

 

इस अपमानजनक कार्टून के प्रकाशन का समय भी ध्यान योग्य है। यह कार्टून ठीक उस समय छापा गया जब तुर्की की अदालत में सऊदी अरब के युवराज मुहम्मद बिन सलमान के बीस क़रीबी साथियों के ख़िलाफ़ सरकार विरोधी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या में लिप्त होने के केस में मुक़द्दमा शुरू हुआ है। इस लिए बेहतर होगा कि यह सऊदी अख़बार आयतुल्लाहिल उज़मा सीस्तानी के ख़िलाफ़ ज़हर उगलने के बजाए अपनी पूरी शक्ति आले सऊद के अपराधों को दुनिया तक पहुंचाने में ख़र्च करे। (HN)

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