Jul ०४, २०२० १८:०६ Asia/Kolkata
  •  सऊदी अरब आयतुल्लाहिल उज़मा सीस्तानी का अपमान क्यों कर रहा है?  जानें वजह!

सऊदी अरब के समाचार पत्र अश्शरकुल अवसत ने एक कार्टून प्रकाशित किया जिस पर पूरी दुनिया विशेष कर इराक़ में आक्रोश है क्योंकि इस कार्टून में इराक़ के वरिष्ठ धर्मगुरु आयतुल्लाहिल उज़मा अली सीस्तानी का अपमान किया गया है।

     हालांकि इराक़ी जनता का आक्रोश देख कर अश्शरुकल अवसत समाचार पत्र ने स्पष्टीकरण दिया है कि इस कार्टून से आशय आयतुल्लाहिल उज़मा अली सीस्तानी नहीं और  समाचार पत्र ने उनका अपमान नहीं करना चाहा है बल्कि यह इराक़ में ईरान के हस्तक्षेप के खिलाफ था। जिन लोगों को इराक़ में सऊदी अरब की भूमिका का इतिहास पता है वह किसी ही रूप में सऊदी अरब की यह बहाने बाज़ी स्वीकार नहीं कर सकते।

    

सऊदी अरब आयतुल्लाह सीस्तानी से नफरत करता है

     सऊदी अरब को इराक़ में आयतुल्लाह सीस्तानी से जिस तरह की नफरत है वह किसी से ढकी – छुपी नहीं है और इस नफरत की वजह भी सब को मालूम है। अस्ल में आयतुल्लाह सीस्तानी एक तो शिया मुसलमानों के वरिष्ठ धर्म गुरु हैं और दूसरे इराक़ में एकता के प्रतीक हैं और उन्ही के फतवे की वजह से इराक़ में स्वंय सेवी बल हश्दुश्शाबी बना जिसने दाइश जैसे आतंकवादी संगठन को धूल चटा दी और इराक़ से खदेड़ दिया।

     इराक़ी सांसद काज़िम अलसैयादी इस बारे में कहते हैं कि “ जब सऊदी अरब के आतंकवादी और उनके द्वारा बिछायी गयी बारुदी सुरंगों को हश्दुश्शाबी बल ने बेअसर पर कर दिया तो अब सऊदी अरब समाचार पत्रों में कार्टूनों द्वारा आयतुल्लाह सीस्तानी के अपमान जैसी हरकतों पर उतारू हो गया है।

     दर अस्ल आयतुल्लाह सीस्तानी सीस्तानी से सऊदी अरब ही नहीं बल्कि अमरीका भी नाराज़ है क्योंकि इराक़ के लिए साज़िश तो उसी ने तैयार की थी जिसे  लागू करने की ज़िम्मेदारी सऊदी अरब को दी गयी थी इस लिए स्वंय सेवी बल द्वारा इस साज़िश की नाकामी के बाद, आयतुल्लाह सीस्तानी से इन दोनों देशों का गुस्सा स्वाभाविक है जो अब इस तरह से निकल रहा है। हालिया महीनों में अमरीका ने कई बार इराक़ के स्वंय सेवी बल हश्दुश्शाबी पर हमले किये हैं जिसके बाद अब सऊदी अरब, हश्दुश्शाबी के संस्थापक पर इस तरह से हमला कर रहा है।

     सऊदी अरब ने इस तरह से यह भी बता दिया कि वह इराक़ के सिलिसले में किसी भी रेड लाइन की परवाह नहीं करता। इराक़ी संसद में अलफत्ह गठबंधन के प्रमुख हादी अलआमेरी ने कहा है कि सऊदी अरब ने इराकी जनता की रेड लाइन पार कर ली है।

 

     सऊदी अरब के समाचार पत्र में अपमानजनक कार्टून में आयतुल्लाह सीस्तानी पर इराक़ की संप्रभुता को नुक़सान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है जबकि इस से पहले इराक़ी सरकार बगदाद में सऊदी अरब के राजदूत साबिर सुबहान को इराक़ के आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप के आरोप में देश से निकाल चुकी है।

 

जानबूझ कर या गलती हो गयी?

     सऊदी अरब ने इसे समझने की गलती बताया है और कहा है कि इस से आयतुल्लाह सीस्तानी दृष्टिगत नहीं थे लेकिन अस्ल में यह क़दम जानबूझ कर उठाया गया है सऊदी अरब इस तरह से इराक़ में कई उद्देश्यों की पूर्ति चाहता है। सऊदी अरब इराक़ में राजनीतिक विभाजन करना चाहता है। वास्तव में आले सऊद, इस तरह से जैसा कि उस कार्टून में भी कहा गया है, आयतुल्लाह सीस्तानी को इराक़ी सरकार की राह में बाधा साबित करना चाहता है।

     इसके अलावा सऊदी अरब इस तरह से इराक़ में सांप्रदायिकता की आग भड़काना चाहता है। दर अस्ल इराक़ की एक मुख्य समस्या यह भी है कि इस देश के कई राजनीतिक दल बुरी तरह से सांप्रदायिक विचारधारा में फंसे हैं जिसका लाभ सऊदी अरब जैसे देश उठाते हैं और उन्हें अपने उद्देश्यों के लिए प्रयोग करते हैं। सऊदी अरब ने इस खास अवसर पर आयतुल्लाह सीस्तानी का अपमान करके इराक़ में सांप्रदायिकता भड़काने की कोशिश की है।

     इराक़ी सांसद मुहम्मद गलबान इस बारे में कहते हैं। अश्शरकुलअवसत में आयतुल्लाह सीस्तानी के अपमान जनक कार्टून का प्रकाशन सऊदी अरब के संचार माध्यमों में सांप्रदायिकता की आग को भड़काने की निरंतर कोशिशों का ही क्रम है।

     सऊदी अरब के इस क़दम का एक और मक़सद, उन लोगों का समर्थन करना था जिन्होंने स्वंय सेवी बल  से जुड़े कताइब हिज़्बुल्लाह संगठन के सदस्यों को गिरफ्तार किया था।

     स्वंय सेवी बल के कड़े विरोध के बाद, इराक़ी प्रधानमंत्री अलकाज़ेमी ने माफी मांगी और गिरफ्तार सदस्यों को रिहा कर दिया और उसके कुछ ही दिनों बाद सऊदी अरब ने स्वंय सेवी बल के संस्थापक आयतुल्लाह सीस्तानी पर इराक़ की संप्रभुता को नुक़सान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए उनका अपमान जनक कार्टून प्रकाशित कर दिया।

     पश्चिमी एशिया में अमरीका के नेतृत्व में साम्राज्यवाद के हितों की पूर्ति करने वाले दो सहायक, सऊदी अरब और इस्राईल, यथावत इलाक़े को नुकसान पहुंचा कर साम्राज्यवाद के हितों की रक्षा कर रहे हैं लेकिन देखना यह है कि सऊदी अरब की कमज़ोर हो चली पीठ कब तक अमरीका को सवार करने की ताक़त रखती है? Q.A.

 

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