Jul ०९, २०२० २१:१८ Asia/Kolkata
  • सैयद हसन नसरुल्लाह ने दो बड़े जेहाद छेड़ने की बात कही तो छिड़ गई लंबी बहस...निर्णायक लड़ाई में यह कारगर नुस्ख़ा है जो इज़्ज़त की ज़िंदगी दिला सकता है, केवल लेबनान नहीं पूरी अरब दुनिया के लिए

लेबनान के हिज़्बुल्लाह आंदोलन के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह का मंगलवार की शाम का भाषण सुनते हुए मुझे अपनी मां की याद आ गई। इस भाषण में सैयद हसन नसरुल्लाह ने दो जेहादों की बात कही। एक कृषि जेहाद और दूसरा औद्योगिक जेहाद। इसका मक़सद देश को अमरीकी प्रतिबंधों के सामने आत्मनिर्भर बनाना है।

मेरी मां दस बच्चों की देखभाल करती थीं साथ ही मेरे दादा दादी और मेरे बीमार पिता भी थे। मेरी मां ने मुर्ग़ियां और कबूतर पाल रखे थे, दो बकरियां थीं। वह गेहूं और जौ पीस कर आटा और आटे से रोटी तैयार करती थीं। इस संघर्ष ने हम शरणार्थियों को भूख का सामना करने में सक्षम बनाया और हम सर उठा कर जीवन गुज़ारने के लायक़ बने। हमें अंडे, गोश्त और दूध मिल जाता था जिससे प्रोटीन की ज़रूरत भी पूरी हो जाती थी।

ज़रूरत आविष्कार की मां होती है। मैंने अपनी मां की मिसाल इसलिए नहीं दी कि लेबनान वासियों को मैं इसी प्रकार की ज़िंदगी गुज़ारने की सलाह दे रहा हूं जो ऊंचे ऊंचे टावरों में रहते हैं और उनके फ़्लैट इतने शानदार हैं कि उनमें कबूतर और मुर्ग़ी पालने का सवाल ही पैदा नहीं होता, मैं यह मिसाल इसलिए दे रहा हूं कि हर स्थिति का मुक़ाबला करने के लिए ख़ुद को हालात के हिसाब से ढालना बहुत अच्छी आदत है। इसी तरह अमरीका और इस्राईल के दबाव का सामना किया जा सकता है और लेबनान को उपभोक्ता देश से उत्पादक देश में बदला जा सकता है।

 

मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति जमाल अब्दुन्नासिर के शासन काल के अंतिम दो वर्षों में मैं इस देश में रहा जो विश्वविद्यालय में मेरी शिक्षा का समय था। उस समय मिस्र की स्थिति यह थी कि अपना पैदा किया हुआ आहार खाता था और अपने बनाए हुए कपड़े पहनता था। मिस्र ब्लेड और टूथ पेस्ट से लेकर गाड़ियों और बसों तक अपनी ज़रूरत की सारी चीज़ें बनाता था। मुझे याद है कि राष्ट्रपति जमाल अब्दुन्नासिर मिस्र के बने हुए कपड़े और जूते पहनने पर फ़ख़्र करते थे। मुझे याद है कि उस समय मिस्र में विदेशी कपड़े कहीं नहीं बिकते थे बस राजधानी क़ाहेरा में एक सड़क थी जिसका नाम शरेअ अलशवारेबी था जो मुशकिल से पचास मीटर लंबी रही होगी, इसी सड़क पर इम्पोर्टेड कपड़े मिलते थे। यह स्मगलिंग से लाए हुए कपड़े होते थे और यह कपड़े लाने वाले बैरूत क़ाहेरा रूट पर काम करने वाले लोग होते थे।

अगर कोई राष्ट्र सर उठाकर जीवना चाहता है तो उसका रास्ता तलाश कर लेता है और यदि अपमानित होकर जीवन गुज़ारना चाहता है तो उसका भी रास्ता मिल जाता है।

कृषि और उद्योग की ओर लौटना लेबनान के नागरिकों के लिए कोई शर्म की बात नहीं है। इसी तरह सरकार का पश्चिमी दुनिया से मुंह फेर कर पूरब यानी चीन, मलेशिया, रूस, इराक़, सीरिया और ईरान की ओर रुख़ करना भी कोई बुरी बात नहीं है। क्योंकि अब अमरीका और अमरीकी राजदूत की शर्मनाक हरकतें अपने चरम पर पहुंच गई हैं।

 

सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने भाषण में कहा कि पूरब का रुख़ करने का मतलब अमरीका और यूरोप को पूरी तरह छोड़ देना नहीं है, इस तरह शायद उन्होंन उन नेताओं के लिए रास्ता खुला छोड़ दिया जो अमरीका और यूरोप से चिपके रहना पसंद करते हैं।

चीन ने लेबनान में बड़ी परियोजनाओं पर काम करने पर रज़ामंदी ज़ाहिर की है और यह भी कहा है कि वह आर्थिक संकट से बाहर निकलने में लेबनान की मदद कर सकता है। चीन आत्म निर्भरता के रास्ते पर चला तो आज अमरीका उसे देखकर उसकी पोज़ीशन में पहुंचने की हसरत कर रहा है।

हम अरबों और मुसलमानों को अब वाक़ई पश्चिमी सरकारों से मुंह फेर लेना चाहिए क्योंकि इन्हीं सरकारों ने हमारे देशों यानी इराक़, सीरिया और लीबिया को तबाह किया और वही इस्राईली क़ब्ज़े का समर्थन कर रही हैं। यही सरकारें अब लेबनान पर प्रहार कर रही हैं।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने भाषण में जो कहा है वह साहसी सच की आवाज़ है, यह संकटों से बाहर निकलने के लिए कारगर समाधान की पेशकश है। यह समाधान केवल लेबनान के लिए नहीं पूरी अरब व इस्लामी दुनिया के लिए है। हम आशा करते हैं कि आने वाले दिनों में अमरीका परस्तों की तरफ़ से जो आलोचनाएं की जाएंगी सैयद हसन नसरुल्लाह उन पर कोई ध्यान नहीं देंगे क्योंकि आने वाली लड़ाई बड़ी और निर्णायक लड़ाई है इस लड़ाई में इस तरह के तत्वों को नज़रअंदाज़ करना बेहतर है।

अतवान

 

अब्दुल बारी अतवान

अरब दुनिया के विख्यात लेखक व टीकाकार

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