Jul ११, २०२० १३:५४ Asia/Kolkata
  • क्या होगा ईरान का जवाब? ईरानी कार्यवाही के डर से इस्राईल में हाई अलर्ट ... ईरान को कैसी सरकार मानता है इस्राईल?  लेबनान के अलअखबार ने लिया बेहद रोचक  जायज़ा

बैरुत से छपने वाले समाचार पत्र अलअखबार ने लिखा है कि जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या के बाद ईरान के सिलसिले में हालात बड़ी तेज़ी से बदल रहे हैं और बदलाव की यह लहर अब तक जारी है , ईरान में दुर्घटनाएं निरंतरता के साथ घट रही हैं।

अमरीका, इस्राईल के पीछे छुप कर तेहरान के लिए इस तरह के हालात पैदा करना चाहता है ताकि वह पीछे क़दम हटा कर अमरीका के साथ वार्ता पर तैयार हो जाए। फिलहाल अमरीका में युद्ध प्रेमी टोली का यह प्रयास है कि वह किसी तरह से ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम में बाधा और ईरान पर कड़ा दबाव डाले। ईरान में अब तक सार्थक गोपनीयता बरती जा रही है और सब लोगों को यह इंतेज़ार है कि ईरान  की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद इस बारे में क्या फैसला करती है? ईरान अगर अमरीका में युद्ध प्रेमी टोली के लिए लाभदायक सीधे टकराव का फैसला न भी करे तब भी इस बात की बहुत संभावना है कि ईरान जटिल प्रतिक्रिया का रास्ता अपनाए अर्थात बिना किसी चिन्ह के ज़िम्मेदारों को गहरे और संवेदनशील घाव लगाए। इसी मध्य ईरान की संभावित जवाबी कार्यवाही की वजह से इस्राईल में हाई अलर्ट है।

    

ईरान की जवाबी कार्यवाही में देरी होगी लेकिन ...

     इस्राईल की दो राजनीतिक व सुरक्षा संस्थाओं ने नतन्ज़ में ईरान के परमाणु प्रतिष्ठान में धमाके के बाद ईरान की संभावित प्रतिक्रिया का जायज़ा लिया है।

      कुछ साल पहले इस्राईली सरकार ने ईरानी व्यवस्था में तर्क के स्तर का जायज़ा लेने के लिए एक बैठक का आयोजन किया जिसमें इस्राईल के तत्कालीन सुरक्षा मंत्री एहुद बाराक, बेनी गांट्स और मोसाद के प्रमुख मेईर दागान भी मौजूद थे और सब ने इस बात की गवाही दी कि ईरानी व्यवस्था में तर्क भरपूर मात्रा में मौजूद है।

     उस समय मोसाद के प्रमुख दागान ने बल दिया कि ईरानी व्यवस्था तर्क पर आधारित व्यवस्था है लेकिन इससे आशय पश्चिमी बुद्धिमत्ता और तर्क नहीं है  बल्कि एसे तर्क पर आधारित है जिसमें सब कुछ पहले से निर्धारित और एक प्रकार का संतुलन है। इस्राईली अधिकारियों का मानना है कि ईरानी व्यवस्था हालात का गहरायी से जायज़ा लेती है और इस मार्ग में ईरान के वरिष्ठ नेता, उच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और अन्य बड़ी हस्तियां फैसला करती हैं और जब फैसला करती हैं तो फिर उसे बहुत अधिक गंभीरता के व्यवहारिक बनाती हैं।

 

     ईरानी व्यवस्था के बारे में इस्राईली अधिकारियों का यह सोचना है और उनकी यह सोच, नतंज धमाके पर ईरान की संभावित प्रतिक्रिया के बारे में उनके जायज़े में लाभदायक सिद्ध होगी। यह सही है कि नतन्ज़ प्रतिष्ठान को काफी नुक़सान पहुंचा है लेकिन यह नुकसान ज़मीर के ऊपर एक इमारत को हुआ है और भूमिगत इमारतों को कोई नुक़सान नहीं पहुंचा है इस लिए ईरान का परमाणु कार्यक्रम जारी रहेगा। इस बात पर इस्राईली अधिकारी भी बल दे रहे हैं।

     कुल मिलाकर यह जो कुछ हुआ है वह वास्तव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए साइबर हमले और ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या जैसे दुश्मनों की कार्यवाहियों का भाग हो सकता है लेकिन इन सब के बावजूद ईरान अंतराष्ट्रीय सहयोग के बिना ही अपने परमाणु कार्यक्रम को विकसित करने में सफल रहा और उसने पश्चिम के प्रतिबंधों को भी सफलता से पार कर लिया।

     ईरान ने अपनी गतिविधियों और अपने रुख से पूरी दुनिया के सामने यह स्पष्ट कर दिया कि अगर उसके परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया तो उसका जवाब एसा होगा जिससे पूरे इलाक़े में आग भड़क जाएगी। अमरीका व इसाईल तक भी यह संदेश पहुंचा इसी लिए वह ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर सीधे हमलों से बचते रहे हैं और उसके बजाए छुप कर और कभी कभी तरह तरह के वार करने को प्राथमिकता दी लेकिन यह सच्चाई है कि उनकी इस तरह की कार्यवाहियों से ईरान का परमाणु कार्यक्रम रुकने वाला नहीं है।

 

     ईरान के संभावित जवाब के बारे में इस्राईल के विशेषज्ञों का कहना है कि उनका यह मानना है कि नतन्ज़ में धमाके का ज़िम्मेदार इस्राईल है और उनका ख्याल है कि अब ईरान आईएईए की मांगों पर ध्यान नहीं देगा जिसकी वजह से इस्राईल के लिए यह संभव हो जाएगा कि वह ईरान के मामले में सुरक्षा परिषद में उठाने और ईरान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को बढ़ा दें।

     इस्राईली टीकाकारों के अनुसार अमरीकी राष्ट्रपति की कम होती लोकप्रियता के बीच, ईरान का कोई भी ड्रामाई जवाब, ट्रम्प की बहुत बड़ी सेवा होगा क्योंकि उसकी वजह से जनमत , देशी और विदेश स्तर पर ट्रम्प की विफलताओं को भूल जाए और ईरान पर केन्द्रित हो जाए। इस लिए इस्राईली टीकाकारों का मानना है कि ईरान युद्ध विराम का चयन करेगा और वर्तमान समय में जवाब देना बेहतर नहीं समझेगा।

     दूसरी तरफ इस्राईली खुफिया एजेन्सी के पूर्व अधिकारी ने नतंज़ पर हमले के लिए जवाबी कार्यवाही के रूप में कुछ विकल्पों का उल्लेख किया है। उनके अनुसार ईरान जवाब के तौर पर यूरेनियम का संवर्धन 20 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है, गुप्त साइबर हमले कर सकता है और इस्राईल , सऊदी अरब या फार्स की खाड़ी में अमरीकी अड्डों पर मिसाइल या ड्रोन से हमले कर सकता है। Q.A. साभार, अलअखबार , लेबनान

 

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