Jul १३, २०२० २२:१४ Asia/Kolkata
  • क्या अमरीका, हिज़्बुल्लाह से जलन की आग में लेबनान को तबाह कर देगा? हिज़्बुल्लाह को चारों ओर से घेरने की कोशिश, क्या हिज़्बुल्लाह हाथ पर हाथ धरे बैठा रहेगा या...

पूर्वी मामलों के एक इस्राईली टीकाकार अपने लेख में लिखते हैं कि वाशिंग्टन ने ईरान के प्रभावों को ख़त्म करने की परिधि में हिज़्बुल्लाह के विरुद्ध अपनी कार्यवाहियां तेज़ कर दी यहां तक कि यह हालात, लेबनान के पतन की क़ीमत पर ख़त्म हो।

इस्राईल के पूर्वी मामलों के टीकाकार तेस्फ़ी बाराईल ने ज़ायोनी समाचार पत्र हारेट्ज़ में अपने लेखे में दावा किया कि लेबनान पर आर्थिक संकट जितना गहरा होगा, हिज़्बुल्लाह के प्रति लोगों का ग़ुस्सा उतना ही अधिक होगा। उनका कहना था कि वर्तमान सरकार में स्वास्थ्य मंत्रालय का पद हिज़्बुल्लाह के पास है।

इस इस्राईली टीकाकार ने दावा किया कि हिज़्बुल्लाह, लेबनान को नुक़सान पहुंचाने वाला कारक बन गया है क्योंकि इस देश ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से आर्थिक मदद और सहायता की अपील की है और इस देश को यह मदद हासिल करने में बहुत अधिक नुक़सान पहुंचेगा।

लेबनान सरकार ने विदेशी मुद्रा के क़र्ज़े को दूर करने, देश में बेरोज़गारी को कम करने, नेश्नल करेंसी को मज़बूत करने, बैंकिंग सिस्टम और अन्य आर्थिक मामलों के सुधार के लिए हाल ही में एक कार्यक्रम पेश किया है।

लेबनान के प्रधानमंत्री हस्सान दय्याब ने भी आर्थिक सुधार की इस योजना के पास होने के बाद अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 20 अरब डॉलर की मदद की अपील की और उन्हें आशा है कि यह मदद उन्हें मिल जाएगी।

इस्राईल का यह लेखक लिखता है कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ लेबनान की हालिया वार्ताएं विफल रही हैं और यह पता चल गया है कि यह संस्था ने अमरीका के दबाव में क़र्ज़ के लिए कड़ी शर्तें रख दी हैं और इन शर्तों में केवल गहरे आर्थिक सुधार का ही मुद्दा शामिल नहीं है बल्कि इसमें सरकार से हिज़्बुल्लाह को निकालने की भी शर्त रखी गयी है।

इस रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक मदद का मुद्दा वास्तव में अमरीकी सरकार और यूरोपीय देशों के बीच मतभेद का कारण बनेगा क्योंकि यूरोपीय देश लेबनान के संपूर्ण बिखराव को रोकने के लिए रास्ता तलाश करने के प्रयास में हैं किन्तु वाशिंग्टन हिज़्बुल्लाह को रास्ते से हटाना चाहता है ताकि इस तरह से ईरान के प्रभाव को सीमित करने के लिए अपनी नीतियों को आगे बढ़ा सके। यद्यपि इस नीति को आगे बढ़ाने की क़ीमत लेबनान का पूर्ण विनाश की क्यों न हो।

इस्राईली लेखक तेस्फ़ी बाराईल अपने लेख में सीरिया के विरुद्ध अमरीका के हालिया प्रतिबंध क़ैसर की ओर इशारा करते हुए लिखते हैं कि इस प्रतिबंध की परिधि में सीरिया सरकार के साथ हर प्रकार के चरण पर अमल शुरु हो गया और लेबनान भी उन देशों में से एक है जिसके द्वारा सीरिया में वस्तुएं पहुंचाई जाती। इन प्रतिबंधों से लेबनान को भी नुक़सान उठाना पड़ेगा।

इस्राईली टीकाकार के अनुसार लेबनान सरकार ने हाल ही में अमरीका से क़ैसर क़ानून को माफ़ करने की मांग की किन्तु अमरीकी सरकार ने सख़्ती के साथ कहा कि कोई भी देश, चाहे दोस्त देश ही क्यों न हो, इस क़ानून से अलग नहीं रह सकता।  

उनका कहना था कि अमरीकी सरकार इस वक़्त दक्षिणी लेबनान में यूनीफ़ेल के कर्मियों द्वारा हिज़्बुल्लाह से सामान ख़रीदने के मार्ग में रुकावट पैदा करना चाहती है ताकि इस प्रकार से हिज़्बुल्लाह की आय के साधन को बंद कर सके।

अब सवाल यह है कि इस संवेदनशील चरण में हिज़्बुल्लाह का जवाब क्या होगा? मैंने सोचा कि मैं हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह के 16 जून के बयान को नक़ल कर दूं जिसमें उन्होंने अमरीका और उसके घटकों को  साफ़ संदेश दिया था। लेबनान के हिज़्बुल्लाह आंदोलन के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि अमरीका क़ैसर एक्ट के तहत जो नए प्रतिबंध लगाने जा रहा है उनका मक़सद सीरिया और लेबनान को भुखमरी में झोंकना है यह सीरिया के ख़िलाफ़ इस्तेमाल होने वाला अमरीका का आख़िरी हथियार है।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि यदि हमारे सामने भूखों मर जाने या हथियार उठाने के दो ही विकल्प हों तो हम हथियार उठाना पसंद करेंगे और आगे बढ़ने वाले हाथ को काट देंगे। उन्होंने कहा कि दमिश्क़ की घटक ताक़तें इस बात का मौक़ा नहीं देंगी कि अमरीका क़ैसर एक्ट के ज़रिए सीरिया पर कड़े प्रतिबंध लगाकर उसे हरा दे।

अलमनार टीवी चैनल से प्रसारित होने वाले अपने भाषण में सैयद हसन नसरुल्लाह ने मंगलवार को कहा कि अमरीका ने अब क़ैसर क़ानून का सहारा लिया है तो इसका साफ़ यह मतलब है कि मैदान में सामरिक लड़ाई में सीरिया की विजय हो चुकी है और अब अमरीका आख़िरी हथियार के रूप में क़ैसर क़ानून का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि सीरिया के घटक जो राजनैतिक और सामरिक क्षेत्रों में उसके साथ खड़े रहे वह आर्थिक लड़ाई में भी सीरिया को अकेला नहीं छोड़ेंगे।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने चेतावनी दी कि यदि इस्लामी प्रतिरोध मोर्चे के सामने दो ही विकल्प बचेंगे कि भूखों मर जाए या हथियार उठाए तो यह मोर्चा हथियार ही उठाएगा और रेड लाइन पार करने वाले हाथ काट देगा। (AK)

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