Jul १४, २०२० २२:३० Asia/Kolkata
  • अभी तो यह अंगड़ाई है आगे और लड़ाई है, यमन का अगला लक्ष्य क्या होगा, सऊदी अरब की तो ईंट से ईंट बज गयी, अब की रजवाड़ों की....

यमनी सेना के प्रवक्ता सोमवार को सऊदी अरब के अबहा, नजरान और जीज़ान के हवाई अड्डों, पैट्रियाट मीज़ाइल सिस्टम, पायलट के हास्टल, युद्धक विमानों और तेल प्रतिष्ठानों पर अंसारुल्लाह के ड्रोन और मीज़ाइल हमलों की सूचना दी थी।

इन हमलों के बाद हमेशा की तरह सऊदी अरब ने दावा किया कि उसने इन हमलों को विफल बना दिया किन्तु इस बात को मानना कि अंसारुल्लाह के ड्रोन विमान सनआ से उड़े थे, इस वास्तविकता को दर्शाता है कि सऊदी अरब इनकार करने की अपनी आदत के बावजूद यमनी सेना की स्वदेशी सैन्य शक्ति का लोहा मानने पर मजबूर हुआ।

अराम्को तेल रिफ़ाइनरी पर पिछले वर्ष के अंसारुल्लाह के हमलों के बाद सऊदी अरब ने दावा किया था कि यमनी ड्रोन सऊदी अरब की सीमा के निकट या किसी दूसरे देश से उड़े थे, या यूं कह लें कि इन हमलों में किसी दूसरे देश का हाथ है।

कुछ समय बाद सऊदी अरब की यह समझ में आया है कि अंसारुल्लाह के लक्ष्यपूर्ण हमलों के मुक़ाबले में उसके मान लेने में भी भलाई है।  इस प्रकार से उसने नया प्रोपेगैंडा खड़ा करना शुरु कर दिया ताकि एक ओर से यह दिखा सके कि उसने हमलों को विफल बना दिया है और दूसरी ओर यह दिखा सके कि अंसारुल्लाह, सऊदी अरब के आम नागरिकों को निशाना बना रहा है।

अभी कुछ दिन पहले ईरान के मामले में अमरीका के विशेष दूत ब्राएन हुक से आदिल अलजुबैर ने मुलाक़ात में बताया कि यमनियों ने सऊदी अरब पर 1659 हमले किए हैं। आख़िरकार मजबूर होकर उन्होंने यह स्वीकार किया जबकि कोई भी मीडिया चैनल यहां तक कि सऊदी अरब से चलने वाले चैनल भी आज तक यह साबित न कर सके कि अंसारुल्लाह के हमले में किसी आम नागरिक को कोई नुक़सान पहुंचा हो।

रोचक बात यह है कि अंसारुल्लाह की ज़बरदस्त जवाबी कार्यवाही के आगे सऊदी अरब बुरी तरह से पस्त हो चुका है और वह प्रोपेगैंडों का सहारा लेकर अंसारुल्लाह के हमलों को छोटा और प्रभावहीन दिखाने का प्रयास कर रहा है।

मिसाल के तौर पर सऊदी अरब के मीडिया ने सोमवार को अंसारुल्लाह के ताज़ा हमलों पर दावा किया कि यमन के अंसारुल्लाह ने पिछले दो साल के दौरान 157 महिलाओं का अपहरण कर लिया और उनको बुरी तरह यातनाएं दे रहा है।

यहां पर यह बात कहने की ज़रूरत है कि हर बुद्धिमान व्यक्ति जब भी इस प्रकार के दावे सुनता या देखता है तो उसकी समझ में आ जाता है कि अंसारुल्लाह के हमलों का कितना असर सऊदी अरब और उसके मीडिया पर पड़ रहा है।  

अंत में यह कहना चाहिए कि यमन पर सऊदी  अरब के निरंतर हमलों के जवाब में यमनी सेना और अंसारुल्लाह का अगला जवाब क्या होगा यह तो समय की बताएगा लेकिन यह कहना चाहिए कि अभी तो यह अंगड़ाई है आगे और लड़ाई है। (AK)

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