Aug ०२, २०२० १४:४८ Asia/Kolkata
  • कैसे ईरानी विदेशमंत्री की वजह से सऊदी शासक को होना पड़ा बीमार?  अलजज़ीरा की दिलचस्प रिपोर्ट

अलजज़ीरा सेन्टर फॉर स्टडीज़ ने लेक़ा मक्की का एक लेख छापा है जिसमें सऊदी अरब, इराक़ और ईरान के संबंधों और इराक़ी प्रधानमंत्री अलकाज़मी की यात्रा का जायज़ा लिया गया है।

इराक़ के प्रधानमंत्री अलकाज़मी पर ईरान की यात्रा के बाद दबाव काफी बढ़ गया है, उनके सामने अब बहुत सी चुनौतियां हैं, इसी लिए उन्होंने विदेश नीति पर ध्यान देना बेहतर समझा। उन्हें उम्मीद थी कि इस तरह से वह स्वाधीन और स्वतंत्र नीति अपनाने में सफल होंगे। इराक के प्रधानमंत्री ने, सऊदी अरब को  अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए चुना और उसके बाद ईरान और अमरीका की यात्रा का कार्यक्रम बनाया लेकिन हालात अलकाज़ेमी क इच्छा के अनुसार आगे नहीं बढ़े और उनकी सऊदी अरब की यात्रा अनिश्चित काल तक के लिए स्थगित कर दी गयी।

      10 जून को इराक़ का एक उच्च प्रतिनिधिमंडल सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ पहुंचा, उसका उद्देश्य, अलकाज़मी की सऊदी अरब की यात्रा की भूमिका तैयार करना था। लेकिन अचानक ही उसी दिन बिना किसी कार्यक्रम के ईरान के विदेशमंत्री बगदाद पहुंचे और कई शिया नेताओं तथा स्वंय सेवी बल के प्रमुख से भेंट की। ईरानी विदेशमंत्री की अचानक बगदाद यात्रा से कई सवाल खड़े हो गये। विशेषकर इस लिए भी कि यह यात्रा, इराक़ी प्रधानमंत्री की सऊदी यात्रा से सिर्फ दो दिन पहले की गयी और ईरानी विदेशमंत्री की अचानक बगदाद यात्रा का कोई कारण भी पता नहीं चल पाया। दूसरे दिन जब अलकाज़ेमी को सऊदी अरब की यात्रा की तैयारी करना था, सऊदी अधिकारियों ने अचानक एलान किया कि इराक़ी प्रधानमंत्री की यात्रा के स्थगित कर दिया गया है क्योंकि सऊदी शासक की तबीअत खराब हो गयी है। इसके साथ ही किंग सलमान को अस्पताल में भरती करा दिया गया।

सऊदी अरब के इस नये एलान की वजह से इराक़ी प्रधानमंत्री की यात्रा का पूरा कार्यक्रम बदल गया जिसके बाद वह 11 जून को तेहरान गये और दो दिन तक ईरान की राजधानी में रहे जबकि इराक़ी अधिकारी, अलकाज़मी की अमरीका यात्रा के बारे में कुछ नहीं बोल रहे हैं।

वरिष्ठ नेता से भेंट के समय अलकाज़ेमी

 

     सरकारी एलान के अनुसान किंग सलमान की अचानक तबीअत खराब होने की वजह से इराक़ी प्रधानमंत्री की यात्रा स्थगित की गयी लेकिन यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि अलकाज़ेमी से किंग सलमान की भेंट एक प्रोटोकोल मात्रा ही होती जिसकी कोई बहुत अधिक ज़रूरत भी नहीं थी विशेषकर इस लिए भी कि वर्तमान समय में सऊदी अरब की सत्ता की बागडोर, इस देश के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के हाथ में है और अलकाज़मी उनसे तो भेंट कर ही सकते थे। इसके अलावा, अलकाज़ेमी की प्रस्तावित यात्रा के एक दिन बाद ही किंग सलमान टीवी पर नज़र आए और कही से भी वह बीमार नहीं लग रहे थे। इसी लिए अब यह कहा जा रहा है कि सऊदी अरब ने हो सकता है किंग सलमान की बीमारी का बहाना बना कर इराक़ के साथ संबंध विस्तार के अवसर को गवां दिया।

      क्या ईरानी विदेशमंत्री की बगदाद यात्रा से कोई संबंध है?

यह मानना कठिन है कि ईरानी विदेशमंत्री की बगदाद यात्रा और अलकाज़ेमी की सऊदी यात्रा  के स्थगन में कोई संबंध नहीं है। संभावित रूप से सऊदी अरब यह नहीं चाहता था कि यह समझा जाए कि ज़रीफ, जिस संदेश के साथ बगदाद गये हैं वह वास्तव में सऊदी अरब के लिए था। इस लिए अलकाज़ेमी, सऊदी अरब से अपनी विदेश नीतियों का आंरभ करने के बजाए, ईरान चले गये और वहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किये कि जिनमें से एक एक साल में 20 अरब डालर के व्यापार का समझौता भी है। इस मसझौते की वजह से ईरान के लिए इराक़ की भूमिका महत्वपूर्ण हो गयी और इस तरह से इराक़, अमरीकी प्रतिबंधों के दौर में ईरान के लिए बेहतरीन आर्थिक दोस्त बन कर उभरा है।

इराक़ के प्रधानमंत्री अलकाज़मी

 

     यह कहा जा सकता है कि इराक़ के प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब के साथ अपने समझौतों पर काम करने का अवसर, तेहरान के अपनी निकटता की वजह से गंवा दिया जैसा कि ईरानियों ने एक रणनीति के तहत जिसे जवाद ज़रीफ ने बड़ी अच्छी तरह से निभाया, इराक़ में अपने एक नये प्रतिस्पर्धी को उभरने से रोक दिया या कम से कम उसे फिलहाल स्थगित कर दिया।

 

अलकाज़मी तेहरान में, नयी बात क्या है?

अलकाज़मी की तेहरान यात्रा के कूटनयिक पहलुओं से हट कर भी उन्होंने इराक़ की तीन चितांओं पर आधारित संदेश दिया। एक यह कि इराक़ और ईरान दोनों के अपने अपने मामले हैं और किसी को एक दूसरे के भीतरी मामलों में दख्ल नहीं देना चाहिए। दूसरे यह कि ईरान ने आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में इराक़ का साथ दिया और अब आर्थिक संकट के समय इराक़, ईरान के साथ खड़ा है। तीसरे यह कि इराक़, अपने पड़ोसियों के साथ संतुलित संबंधों का इच्छुक है और क्षेत्रीय मोर्चाबंदी का भाग नहीं बनना चाहता और इस बात की अनुमति नहीं देगा कि उसकी भूमि को ईरान को धमकाने के लिए प्रयोग किया जाए।

ईरानी विदेशमंत्री ने सब कुछ बदल दिया 

 

     अलकाज़ेमी को अनुमान था कि वह ईरान यात्रा के दौरान, ईरान को इराक़ के सशस्त्र बलों पर अपने नियंत्रण के लिए मदद पर तैयार कर लेंगें और उसके बदल ईरान को आर्थिक सहयोग का वचन देंगे। इसी मध्य जैसा कि तेहरान चाहता था, इराक़ के साथ बड़े बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर हुए लेकिन अलकाज़ेमी को वांछित परिणाम नहीं मिल पाया इस लिए वह बगदाद वापस चले गये और उनकी समझ में आ गया कि विदेश नीतियों के आधार पर कार्यक्रम जो उन्होंने बनाया था अब वह उन पर बोझ बन गया है खास तौर पर इस लिए भी रणनीतिक वार्ता के लिए उनकी अमरीका यात्रा का मुद्दा चर्चा से ही बाहर हो और अब न वाशिंग्टन में और न ही बगदाद में इस यात्रा पर कोई बात हती है जैसा कि अब रियाज़ में भी अलकाज़मी के स्वागत का उत्साह नज़र नहीं आता। Q.A. साभार,अलजज़ीरा सेन्टर फॉर स्टडीज़

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