Aug ०६, २०२० ०९:०३ Asia/Kolkata
  • ट्रम्प के बयान से तो लगता है कि लेबनान धमाका एक हमले का नतीजा है, इस साज़िश के पीछे कौन हो सकता है, किसने भेजा नाइट्रेट से भरा जहाज़?

बैरूत का धमाका जिसने आधे शहर को वीरान कर दिया और 130 से अधिक जानें ले लीं अगर दुर्घटना नहीं बल्कि पूर्व नियोजित हमला है जैसा कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने कहा तो फिर यह भी तय है कि इस हमले में अमरीका और इस्राईल ही लिप्त हैं और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इन दोनों या फिर लेबनान में उनके एजेंटों पर इसकी ज़िम्मेदारी है।

हम तो कहते हैं कि यह इस प्रकरण के पीछे एक साज़िश होने की पूरी संभावना है और इसमें अमरीका और इस्राईल लिप्त हो सकते हैं क्योंकि इराक़ में भी इस प्रकार की हमें कई मिसालें नज़र आती हैं।

राष्ट्रपति ट्रम्प शायद पहले आदमी थे जिसने साफ़ साफ़ शब्दों में कहा कि यह ख़तरनाक हमला है और उनके भरोसेमंद जनरलों ने धुआं और वहां के हालात की तसवीरें देखकर पूरे यक़ीन से कहा है कि यह दुर्घटना नहीं हो सकती।

यह भी सही है कि पेंटागोन के दो प्रवक्ताओं ने ट्रम्प के इस बयान से पल्ला झाड़ लिया और उसका मज़ाक़ भी उड़ाया लेकिन हमें लगता है कि ट्रम्प ने यह बात अपनी तरफ़ से नहीं कही है बल्कि समझ बूझ कर बयान दिया है क्योंकि वह लेबनान के बारे में बात कर रहे थे जिस पर इस समय अमरीका और इस्राईल का बहुत भारी दबाव है कि इस देश को भीतरी रूप से ध्वस्त करके रख दें। उनकी कोशिश है कि अगर हिज़्बुल्लाह अपना हथियार न छोड़े तो देश को गृह युद्ध की आग में झोंक दिया जाए।

 

धमाका जैसे ही हुआ उसी समय से सऊदी अरब के टीवी चैनल ने हिज़्बुल्लाह के हथियारों के डिपो की ओर संकेत करना शुरू कर दिया और हिज़्बुल्लाह को इस घटना के लिए दोषी ठहराने की कोशिश की जबकि औपचारिक रिपोर्टों में बार बार कहा जा रहा है कि यह दुर्घटना है जो लापरवाही की वजह से हुई है। सऊदी अरब के मीडिया ने पूरी कोशिश की कि लेबनानियों को हिज़्बुल्लाह पर शक हो और उनका ध्यान अमरीका और इस्राईल की ओर न जाने पाए।

हमें अंदाज़ा है कि घटना के लिए जांच शुरू हो गई है और इसका नतीजा आने में दस दिन से अधिक समय लग सकता है मगर ट्रम्प के बयान से लगता है कि यहां चोर की दाढ़ी में तिनका वाली कहावत फ़िट बैठती है।

फ़िलहाल तो दोनों ही संभावनाएं मौजूद है कि यह साज़िश से किया गया धमाका हो सकता है और दुर्घटना भी हो सकती है जो लापरवाही के कारण हो गई लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि कैसे 2550 टन नाइट्रेट बैरूत पहुंचा जिसमें भयानक विस्फोटक क्षमता होती है। कहा जाता है कि यह पदार्थ छह साल पहले मालदीप के एक जहाज़ में लादकर लाया गया था। यह विस्फोटक पदार्थ बैरूत क्यों लाया गया था। क्या इसे सीरियाई विद्रोहियों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी जैसा कि कुछ रिपोर्टों में बताया जा रहा है या फिर इसे लेबनान में ही रखकर आतंकी हमलों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश थी?

 

यह तो सब जानते हैं कि यह बेहद ख़तरनाक केमिकल पदार्थ है और इस्राईल के पास इस का 12 हज़ार टन का भंडार है जिसे इस्राईल ने हैफ़ा बंदरगाह पर 1500 भंडारों में रख रखा है क्या किसी तीसरे पक्ष ने लेबनान के भीतर मौजूद एजेंटों की मदद से यह खेप इस्राईल से बैरूत पहुंचाई थी।

इन सवालों के जवाब हमारे पास अभी नहीं हैं हम यह सवाल जांचकर्ताओं का ध्यान केन्द्रित कराने के लिए उठा रहे हैं।

लेबनान की सरकार ने अच्छा फ़ैसला किया है कि बैरूत बंदरगाह से जुड़े सारे अधिकारियों को नज़रबंद कर दिया है ताकि जांच की प्रक्रिया पूरी हो सके।

ख़ूबसूरत लेबनान ने हमेशा कठिन घड़ी में अरब देशों का साथ दिया है और अब वह कठिन संकट में है। हम लेबनान के साथ हैं और तमन्ना करते हैं कि अरब और दुनिया अपनी ज़िम्मेदारी को महसूस करें और ज़रूरी आर्थिक मदद करें ताकि पुनरनिर्माण का काम हो सके। नुक़सान पंद्रह अरब डालर तक का बताया जा रहा है।

आख़िर में हम यही कहेंगे कि इस बुरी घटना के गर्भ से लेबनानी राष्ट्र के लिए कोई न कोई अच्छाई बाहर आएगी। शायद इस त्रासदी के बाद भ्रष्ट लोगों का सफाया हो जाए जिन्होंने लेबनान की दौलत लूटी है।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

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