Aug ०६, २०२० २१:०५ Asia/Kolkata
  • यह है महाशैतान!  कैसे बिजली के ज़रिए अमरीका इराक़ में  इतनी बड़ी साज़िश कर रहा है? आंख खोलने वाली एक रिपोर्ट!

सन 191 से 2003 के दौरान अमरीका ने एक भयानक युद्ध में इराक़ को तबाह कर दिया उसके बाद यानि सन 2003 से 2020 तक अमरीका की जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी, इराक़ की बिजली पर फन निकाले बैठी है और आज भी इराक़ में 24 घंटे बिजली नहीं रहती।

      तेल से समुद्ध इराक़, तीन दशकों  से देश में बिजली की आपूर्ति  की समस्या का समाधान नहीं कर पा रहा है, आज इराक़ में बिजली का मामला इतना जटिल हो गया है कि सन 2003 से अब तक इराक़ में आने वाली कोई भी सरकार, इस समस्या को खत्म नहीं कर पायी है।

      सन 2003 से सन 2020 के मध्य इराक़ में बस आदिल अब्दुल मेहदी के सत्ताकाल में एक हद तक बिजली की आपूति में बेहतरी आयी थी लेकिन इस साल फिर  हालात वही पहले जैसे हो गये।

     इराक़ की सुलगती गर्मियों में  बिजली आपूर्ति में बाधा की वजह से ही इराक़ में फिर से जन आक्रोश फूट पड़ा जिसमें कई लोग मारे भी गये।

     इराक़ के दक्षिणी और केन्द्रीय  प्रांतों में जहां  गर्मी में तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता है, प्रदर्शनकारियों की गुस्से की वजह से बिजली विभाग के कई प्रांतीय अधिकारियों को त्याग पत्र देना पड़ा और प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के कार्यालयों पर ताले लगा दिये।

           पिछले 17 बरसों के दौरान अमरीका की जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी ने इराक़ में बिजली विभाग में इस प्रकार से भ्रष्टाचार फैलाया कि आज आंकड़ों के अनुसार सन 2003 से अब तक बिजली विभाग पर  40 अरब डॉलर की भारी रक़म खर्च करने के बावजूद इराक़, अपने नागरिकों को 24 घंटे बिजली की सप्लाई देने में नाकाम रहा है।

     इराक़ ने सन 2010 से 2014 के दौरान, नूरी मालेकी के दूसरे सत्ताकाल में अमरीका की जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी पर निर्भरता कम करने का प्रयास करते हुए ईरान से बिजली की खरीदारी शुरु की जिससे अमरीकियों के कान खड़े हो गये।

 

     ईरान इस समय इराक़ को चार केबल लाइनों द्वारा 1350 मेगावॉट बिजली देता है और इसके साथ ही, इराक़ के बिजली घरों के लिए ज़रूरी गैस भी इराक़ के  निर्यात करता है।

     इसके साथ ही  ईरान, बगदाद में अस्सद्र और नजफ में अलहैदरिया नामक  दो बिजली घर बना चुका है और अब दक्षिणी इराक़ के बसरा नगर में 3000 मेगावॉट बिजली की क्षमता वाला एक बिजलीघर बना रहा है।

     इराक़ ने अपने देश में बिजली के संकट को खत्म करने के लिए तुर्की का भी सहारा लिया और सन 2014 तक तुर्की इराक़ को 500 मेगावॉट बिजली देता था मगर दाइश के हमले के बाद तुर्की से इराक़ को  बिजली की आपूति रुक गयी लेकिन हालिया दिनों में इराक़ ने 650 मेगावॉट बिजली के लिए तुर्की से बातचीत  शुरु की है।

     इराक़ ने इन सब के अलावा जर्मनी की सीमेंस कंपनी से समझौता करने का प्रयास किया और इराक़ के तत्कालीन प्रधानमंत्री आदिल अब्दुल मेहदी ने बर्लिन की यात्रा के दौरान 14 अरब 650 मिलयन डॉलर का समझौता किया था जिसके आधार पर जर्मनी की यह कंपनी इराक़ में बिजली के संकट का अंत करने वाली थी और यह काम 4 साल में पूरा होना था मगर इराक़ और जर्मनी के बीच होने वाले इस समझौते से अमरीका की जनरल इलेक्ट्रिक कपंनी को बहुत गुस्सा आया जिसके बाद ट्रम्प सरकार ने सीधे रूप से हस्तक्षेप करके, जर्मनी की सीमेंस कंपनी को इराक़ में इस परियोजना को शुरु करने से रोक दिया जिसकी वजह से बगदाद में जर्मनी के राजदूत ने वाइट हाउस की बड़ी आलोचना भी की थी।

     इराक़ के पास चौथा रास्ता यह है कि वह अपने देश में बिजली के संकट को खत्म करने के लिए फार्स की खाड़ी के तटवर्ती अरब देशों  के  बिजली आपूर्ति व्यवस्था से खुद को जोड़ ले, यह विवादस्पद योजना दर अस्ल अमरीका ने तैयार की है। अमरीकियों ने इराक़ पर इस योजना को स्वीकार करने के लिए दबाव डाला और अपने अरब मित्रों को भी इस पर तैयार किया।

ईरान व इराक़ की बिजली आपूर्ति नेटवर्क को एक दूसरे से जोड़ दिया गया है

 

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अमरीका अपने मित्र अरब देशों से इराक़ को बिजली दिला कर और उन पर निर्भर बना कर दर अस्ल डील आफ सेंचुरी में इराक को शामिल और इराक़ व इस्राईल के बीच संबंध बनाने का प्रयास कर रहा है। कहते हैं कि अमरीका, इस्राईल को मध्य पूर्व और युरोप के लिए बिजली आपूर्ति केन्द्र बनाना चाहता है ताकि इस्राईल भविष्य में पूरे इलाक़े में ऊर्जा का सब से बड़ा केन्द्र बन जाए और इलाक़े के देशों के हित उसके हितों से जुड़ जाएं। इन्ही सब कारणों  से इराक़ में इस अमरीकी योजना  का व्यापक विरोध हो रहा है।

इन सब खींचतान के बीच इराक़ अब भी बिजली के संकट को खत्म करने के लिए छटपटा रहा है लेकिन फिलहाल, मौसम ने उसकी मदद की और तापमान 50 डिग्री से नीचे आने के बाद इराक़ बिजली का उत्पादन 16 हज़ार से 18 हज़ार मेगावॉट तक पहुंचाने में सफल हो गया। इस बार भी गर्मी का मौसम, ऊपर वाले की कृपा से जल्दी और आसानी से गुज़र गया, लेकिन अगली गर्मी में फिर यही समस्या होगी और फिर इराक़ी सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करेंगे जिसके दौरान अमरीका, सऊदी अरब और इस्राईल के समर्थन से कुछ लोग भीड़ में शामिल होकर उपद्रव करेगे और हालात खराब होंगे और इस साल की तरह ही सब लोग, इन सब के पीछे ज़िम्मेदार कौन का नारा लगाएंगे जबकि  इस चक्रव्यूह को रचने वाला अमरीका है। Q.A.

 

 

    

 

 

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