Aug ०६, २०२० २१:२७ Asia/Kolkata
  • बैरुत बंदरगाह की भीषण त्रासदी का ज़िम्मेदार कौन?

लेबनान के टीकाकारों का कहना है कि बैरूत की बंदरगाह में जो धमाका हुआ है उसके लिए देश के अंदर के भ्रष्ट तत्व भी ज़िम्मेदार हो सकते हैं लेकिन इसी के साथ वे बाहरी तत्वों के हस्तक्षेप को भी रद्द नहीं करते।

राजनैतिक टीकाकारों का कहना है कि यह धमाका अमोनियम नाइट्रेट में अपने आप धमाका नहीं हो सकता बल्कि उसे चिंगारी की ज़रूरत होती है। इन टीकाकारों का कहना है कि हो सकता है कुछ लोग बंदरगाह में चोरी के लिए पहुंचे हों और वहां इस ख़तरनाक पदार्थ पर ध्यान दिए बिना उन्होंने अपना काम करने की कोशिश की होगी और अंततः यह धमाका हो गया। लेबनान के गुप्तचर विभाग कई बार सचेत कर चुके थे कि इतनी बड़ी मात्रा में इतने ख़तरनाक तत्व को बंदरगाह के डिपो में नहीं रखा जाना चाहिए बल्कि किसी ग़ैर आवासीय क्षेत्र में रखा जाना चाहिए।

 

लेबनान के राजनैतिक दल व लोग इसे एक भीषण राष्ट्रीय त्रासदी समझते हैं जो इस देश में अभूतपूर्व है। लोग उन सभी तत्वों की तुरंत गिरफ़्तारी की मांग कर रहे हैं जो किसी भी रूप में इस त्रासदी में शामिल रहे हैं। लेबनानी जनता इसी तरह इस संबंध में हिज़्बुल्लाह पर किसी भी तरह का आरोप लगाए जाने का भी विरोध कर रही है और उसका कहना है कि अगर इस्राईल इस डिपो पर हमला करना चाहता तो निश्चित रूप से उसे प्रतिरोध की ओर से कड़ा उत्तर दिया जाता।

 

आर्थिक विशेषज्ञों का भी कहना है कि इस धमाके से लेबनान को प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से बहुत ज़्यादा नुक़सान पहुंचा है और बैरूत की बंदरगाह लगभग पूरी तरह से तबाह हो गई है। अब इस बंदरगाह में किसी भी समुद्री जहाज़ का लंगर डालना लगभग असंभव और ख़तरनाक है क्योंकि इस बंदरगाह के मूल ढांचे को बुरी तरह से नुक़सान पहुंचा है। उनका कहना है कि इस बंदरगाह के निर्माण पर लगभग 5 से 7 अरब डाॅलर का ख़र्चा आया होगा और अब यहां के सभी प्रतिष्ठान पूरी तरह तबाह हो गए हैं। इन विशेषज्ञों का कहना है कि इस बंदरगाह का पुनर्निर्माण, इसके निर्माण से भी ज़्यादा मुश्किल और महंगा है क्योंकि इसमें बरसों लग जाएंगे। इन टीकाकारों का कहना है कि बैरूत बंदरगाह को जो नुक़सान पहुंचा है वह लगभग 10 अरब डाॅलर का है।

 

कुछ टीकाकारों का कहना है कि बैरूत की बंदरगाह में 2016 से अमोनियम नाइट्रेट का यह भंडार मौजूद था और इंटेलीजेंस एजेंसियां कई बार इस संबंध में चेतावनी दे चुकी थीं लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री साद हरीरी की सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। बहरहाल लेबनान की सरकार को इस पूरे मामले में दोषियों को पकड़ कर न्यायोचित दंड देना चाहिए क्योंकि इस धमाके ने देश को जो नुक़सान पहुंचाया है उसकी भरपाई संभव नहीं है। (HN)

 

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