Aug १२, २०२० २०:१८ Asia/Kolkata
  • अगर हमने हरी झंडी दी होती तो कुवैत के बाद सऊदी अरब पर होता क़ब्ज़ा... हम न होते तो तब सब को खा गये होते सद्दाम... अरब देशों को ईरानी राष्ट्रपति की फटकार!

इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने परशियन गल्फ सहयोग परिषद के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया प्रकट की है जिसमें इस परिषद के सदस्यों ने ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संघ के हथियारों के प्रतिबंध की अवधि बढ़ाने की मांग  की है।

      दर अस्ल 13 साल पहले संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद ने कई प्रस्ताव पारित करके ईरान के खिलाफ हथियारों के प्रतिबंध लगा दिये थे जिसके आधार पर कोई देश न तो ईरान को हथियार बेच सकता है और न ही ईरान से कोई हथियार खरीद सकता है।

     सन 2015 में ईरान के साथ विश्व के देशों ने परमाणु समझौता किया जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव क्रमांक 2231 पारित करके घोषणा की कि 18 अक्तूबर सन 2020 में ईरान पर लगे प्रतिबंध खत्म हो जाएंगे।

     अब अमरीका रात दिन इस कोशिश में व्यस्त है कि किसी तरह से ईरान पर लगे इस प्रतिबंध की अवधि बढ़ा दी जाए लेकिन वह सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों को अपने प्रस्ताव पर सहमत करने में विफल हो गया है और रूस और चीन की तरफ से प्रस्ताव पर वीटो की भी उसे आशंका है।

     इसी मध्य फार्स की खाड़ी सहयोग परिषद के महासचिव ने अमरीका को खुश करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद को एक पत्र लिख कर मांग की है कि ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों की अवधि बढ़ायी जाए जिसके बारे में ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि इस पत्र की जानकारी, फार्स की खाड़ी के सदस्य सभी देशों को नहीं थी।

 

     फार्स की खाड़ी सहयोग परिषद के सऊदी अरब , बहरैन, यूएई, क़तर, ओमान और कुवैत सदस्य हैं लेकिन खबरों में बताया गया है कि यह पत्र सऊदी अरब और यूएई के दबाव में लिखा गया है।

     इस पत्र पर प्रतिक्रिया प्रकट करते हुए ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने मंत्रिमंडल की बैठक में कहा कि जब सद्दाम ने कुवैत पर हमला किया तो हमने सब से पहले इस हमले की आलोचना की जबकि इस परिषद के सदस्य देशों ने इस हमले की आलोचना नहीं की।

     राष्ट्रपति ने कहा कि जिस दिन सुबह सद्दाम ने कुवैत पर हमला किया उसी दिन तीन बजे दोपहर को हमने इस हमले की आलोचना की और औपचारिक बयान जारी किया और व्यवहारिक रूप से भी इस हमले की आलोचना की।

     राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि हम ने व्यवहारिक रूप से यह साबित किया कि हम क्षेत्रीय देशों के समर्थक हैं, अगर हमने सद्दाम को हरी झंडी दिखायी होती तो जिस दिन कुवैत पर क़ब्ज़ा किया था उसके दूसरे दिन वह पूरे सऊदी अरब, क़तर और यूईए पर क़ब्ज़ा कर लेते।

     राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि सद्दाम ने दिवंगत आयतुल्लाह हाशमी रफसंजानी के नाम पत्र में लिखा था कि हमारी 800 किलोमीटर संयुक्त जल सीमा है जिसका मतलब यह था कि सद्दाम की नज़र में यह सारे देश, इराक़ का हिस्सा थे क्योंकि इराक़ के साथ हमारी संयुक्त जल सीमा 18 किलोमीटर ही थी।

     राष्ट्रपति रूहानी ने फार्स की खाड़ी देशों की सहयोग परिषद के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर हम इस इलाक़े की स्थिरता के लिए उठ खड़े न हुए होते तो आप सब को सद्दाम खा चुके होते। हम हमेशा आप के भाई रहे हैं आज भी हैं, आप सब जान लें कि ईरान के खिलाफ अमरीका के कोशिश नाकाम ही रहेगी, ईरान, अपने राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और देश के हित में जो क़दम उठाता है उसमे कामयाब होगा। Q.A.

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