Sep १९, २०२० ०९:४४ Asia/Kolkata
  • इस्राईल ने फिर दी सैयद हसन नसरुल्लाह को क़त्ल करने की धमकी...ट्रम्प कहते हैं कि बश्शर असद की हत्या का प्रोग्राम रोक दिया...यह कैसी बयानबाज़ी है?

क्या यह केवल संयोग है कि जब अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद की हत्या की योजना का ख़ुलासा किया तो ठीक उसी समय इस्राईली जनरल अमीर बरआम ने कहा कि इस्राईल ने हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह के क़त्ल की योजना बनाई थी।

हमें तो नहीं लगता कि यह संयोग मात्र है। यह अमरीका और इस्राईल की घटिया सोच और नीयत की निशानी है और दूसरी ओर यह भी ज़ाहिर होता है कि अमरीका और इस्राईल अपनी योजनाएं नाकाम होने से परेशान हैं जबकि दूसरी ओर ईरान के नेतृत्व वाला इस्लामी प्रतिरोध मोर्चा लगातार अपनी ताक़त बढ़ाता जा रहा है।

राष्ट्रपति असद के मामले में अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया कि उनकी इंटेलीजेन्स ने बश्शार असद की हत्या की योजना बना ली थी मगर उस समय के रक्षा मंत्री जेम्ज़ मैटिज़ ने इस योजना का विरोध कर दिया था। यह ख़ुला हुआ झूठ है। हमें यक़ीन नहीं है कि रक्षा मंत्री राष्ट्रपति की योजना को नाकाम कर दे। यह उसी स्थिति में हो सकता है जब योजना की नाकामी की संभावना बहुत ज़्यादा हो और नाकाम होने की स्थिति में जो ख़मियाज़ा अमरीका को भुगतना पड़ता वह बहुत ज़्यादा रहा हो। दूसरी बात यह है कि ट्रम्प जिस समय के बारे में यह बात कह रहे हैं उसके कुछ ही हफ़्ते बाद तो उन्होंने मैटिज़ को पद से हटा दिया था। यानी योजना पर अमल करने के लिए उनके हाथ खुल गए थे।

अमरीका के राष्ट्रपति को इस बात की बड़ी तकलीफ़ है कि राष्ट्रपति बश्शार असद आज भी सीरिया की सत्ता संभाले हुए हैं और पिछले कठिन नौ वर्षों में उन्होंने कामयाबी से देश का संचालन किया है जबकि देश की सेना और दूसरे विभाग भी पूरी मज़बूती से खड़े हुए हैं हालांकि अमरीका और उसके घटकों ने बहुत बड़ी रक़म सीरिया में सत्ता बदलने के लिए बर्बाद कर डाली।

संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीकी राजदूत केली क्राफ़्ट ने कहा कि जब तक सीरिया की सरकार अपना बर्ताव और अपना सुरक्षा व राजनैतिक ढांचा नहीं बदलती और ईरान से ख़ुद को दूर नहीं कर लेती, उस समय तक सीरिया में शांति नहीं आ सकती। उन्होंने कहा कि अमरीका सीरिया के पुनरनिर्माण को रोकने के लिए प्रतिबंधों का इस्तेमाल करेगा।

जब लोकतंत्र, सभ्यता और न जाने कैसे कैसे दावे करने वाले अमरीका जैसे देश टारगेट किलिंग की बातें करने लगें तो यह उनकी ताक़त नहीं कमज़ोरी का चिन्ह है क्योंकि यह माफ़ियाओं का तरीक़ा है।

इस्राईली जनरल अमीर बरआम ने इस्राईल टुडे अख़बार से बातचीत में कहा कि इस्राईल ने दसियों हज़ार सैनिकों को हाई एलर्ट पर रखा है क्योंकि हिज़्बुल्लाह सीरिया में इस्राईली हमले में अपने कमांडर की हत्या के बदले में कई इस्राईली सैनिकों को मार सकता है। हाई एलर्ट की यह स्थिति भी इस्राईल के लिए हिज़्बुल्लाह की ओर से एक बड़ी सज़ा है क्योंकि यह स्थिति जारी रहने की वजह से इस्राईली सैनिक मानसिक रूप से बीमार पड़ने लगते हैं। पने कमांडर की हत्या के बदले में कोई इस्राईली सैनिकों को मार सकता है। हाई एलर्ट की यह स्थिति भी इस्

इसमें तो कोई शक नहीं कि सैयद हसन नसरुल्लाह अपना वादा पूरा करेंगे और अपने शहीद का इंतेक़ाम ज़रूर  लेंगे। इस्राईली धमकियों का जहां तक सवाल है तो वह बीस साल से जारी हैं और सैयद हसन नसरुल्लाह का कुछ नहीं बिगड़ा।

जहां तक सीरिया को ईरान से दूर करने का सवाल है तो सीरिया कभी भी ईरान से दूर नहीं होगा और अमरीकी प्रतिबंधों से सीरिया के पुनरनिर्माण की प्रक्रिया रुकने वाली भी नहीं है। सीरिया की जनता बहुत मेहनती और बड़ी सूझबूझ वाली है जबकि उसके पास ईरान, रूस और चीन जैसे घटक भी मौजूद हैं जो आर्थिक और लाजिस्टिक सपोर्ट देने के लिए तैयार हैं।

सैयद हसन नसरुल्लाह किसी तहख़ाने या गुफा में नहीं रहते कोई सप्ताह नहीं गुज़रता जब उनकी मुलाक़ात बड़ी हस्तियों और प्रतिनिधिमंडलों से न होती हो। इन मुलक़ातों की ख़बरें भी आती हैं और टीवी पर उनके भाषण लाइव प्रसारित किए जाते हैं।

हिज़्बुल्लाह अपना इंतेक़ाम ज़रूर लेगा इसमें कोई शक  नहीं है इस बीच इस्राईली इंतेज़ार की घड़ियां गिन रहे हैं।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

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