Sep २४, २०२० १७:५९ Asia/Kolkata
  • क्या डूब जाएगा सऊद वंश का जहाज़? ... दो खेवैया, दो दिशाएं... सऊदी नरेश के हालिया भाषण के महत्वपूर्ण संदेश क्या हैं?...  रायुलयौम ने सब बताया।

सऊदी अरब के नरेश ने संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के अधिवेशन में अपने भाषण में जो कुछ कहा है उसका लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र रायुलयौम के सपांदकीय में एक अलग ढंग से जायज़ा लिया गया है।    

     यह जो सऊदी नरेश, सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ आजकल सामने आने  पर इतना आग्रह कर रहे हैं और सऊदी नरेश बनने के बाद पिछले लगभग पांच वर्षों में पहली बार जो उन्होंने महासभा को संबोधित किया है तो यह वास्तव में उन रिपोर्टों की सही ठहराता है जिनमें कहा जा रहा है कि सऊदी नरेश और सऊदी क्राउन प्रिंस यानि बाप बेटे में बहुत से मामलों में मतभेद है जिनमें  सब से बड़ा मामला, इस्राईल के साथ संबंध स्थापित करने का मुद्दा है।

          यह सही है कि किंग सलमान ने एक बार फिर ईरान पर आरोपों की झड़ी लगायी, लेबनान में हिज़्बुल्लाह के निशस्त्रीकरण की मांग की और इलाक़े में शांति स्थापना के लिए अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रयासों का पुष्टि की लेकिन इस्राईल के साथ यूएई और बहरैन के सबंध स्थापना के बारे में कोई बात तक नहीं की बल्कि अरब शांति प्रक्रिया पर आग्रह किया और बैतुलमुक़द्दस की राजधानी के साथ, फिलिस्तीनी देश के गठन की स्पष्ट रूप से बात की।

    इस सिलसिले में यह भी ध्यान योग्य बात है कि सऊदी नरेश ने एक हफ्ते पहले दुनिया के सात देशों के प्रमुखों  से भी टेलीफोन पर बात की थी जिनमें चीन, रूस और अमरीका के राष्ट्रपति शामिल हैं और इन वार्ताओं  के दौरान उन्होंने जी-20 आर्थिक गुट के शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए तैयारियों का ब्योरा दिया जिसकी मेज़बानी सऊदी अरब करने वाला है जो आने वाले 21- 22 नवंबर को होगा। यह सम्मेलन, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस बिन सलमान की खास ज़िम्मेदारी था यहां तक कि कुछ लोगों का यह भी कहना था कि उसकी अध्यक्षता सऊदी नरेश के बजाए स्वंय बिन सलमान ही करेंगे और इस तरह से वह अपने पिता की जगह लेने के लिए माहौल बनाएंगे।

 

    संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा को स्वंय संबोधित करके और विश्व के राष्ट्राध्यक्षों से टेलीफोनी वार्ता करके संभावित रूप से सऊदी नरेश जो संदेश देना चाहते हैं वह कुछ इस प्रकार के हो सकते हैः

    पहलाः इस बात पर बल देना चाहते हैं कि 84 वर्ष के होने के बावजूद अभी उनका स्वास्थ्य ठीक है और उनकी बीमारी के बारे में दी जाने वाली रिपोर्टें गलत हैं।

    दूसराः उन सभी रिपोर्टों का खंडन जिनके आधार पर ट्रम्प बार बार कह रहे थे कि सऊदी अरब , इस्राईल के साथ संबंध बनाना तीसरा या चौथा अरब देश होगा। उन्होंने अपने भाई, किंग अब्दुल्लाह की उसी शांति प्रक्रिया से प्रतिबद्धता प्रकट की है जिसका प्रस्ताव उन्होंने सन 2002 में दिया था।

    तीसराः इस बात की घोषणा की यूएई और बहरैन सऊदी अरब को नहीं चला रहे और न ही वह सऊदी अरब की नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।

    चौथाः सऊदी नरेश की समझ में यह बात आ गयी है कि इस्राईल के साथ किसी भी प्रकार का शांति समझौता, जैसा कि ट्रम्प और उनके दामाद जेयर्ड कुश्नर चाहते हैं, वह बैतुलमुक़द्दस को छोड़ना और सेंचुरी डील को स्वीकार करना है जिसके बाद इस्लामी जगत में ढीली होती सऊदी अरब की पकड़ पूरी तरह से खत्म हो जाएगी और शायद मक्का और मदीना में पवित्र स्थलों की ज़िम्मेदारी का फायदा भी उसे न मिले विशेषकर इस लिए भी कि इस प्रकार का कोई भी शांति समझौता वास्तव में मुफ्त में होगा और उसका इस्तेमाल केवल अमरीकी राष्ट्रपति को फायदा पहुंचाने के लिए होगा जो हो सकता है छे हफ्ते बाद जेल की  हवा खा रहे हों।

    हो सकता है कि कुछ लोग यह कहें बाप बेटे का मतभेद, ड्रामा हो, एसा हो भी सकता है लेकिन जिस तरह से सऊदी नरेश इतने दिनों तक गायब रहने और राज पाट अपने बेटे के हवाले करने के बाद, अचानक सामने आए और काफी सक्रियता भी दिखाने लगे, उससे तो यही पता चलता है कि अंदर कुछ न कुछ गड़बड़ ज़रूर है, जैसा कि सऊदी नरेश के परिवार से निकट  संबंध रखने वाले सूत्रों ने भी हमें यही  बताया है।

 

    इस्राईल से संबंध बनाने के बारे में सऊदी नरेश और क्राउन प्रिंस के मध्य ड्रामे की बात करने वाले अपनी बात के सुबूत में सऊदी मीडिया और सऊदी धर्मगुरुओं के बयानों की मिसाल देते हैं जो इस्राईल के साथ संबंध स्थापना का समर्थन कर रहे हैं जैसा कि काबे के इमाम  शेख अब्दुर्रहमान अस्सुदैस ने अपने हालिया भाषण में यहूदियों औ इस्राईल के साथ संबंध स्थापना का समर्थन किया और पैगम्बरे इस्लाम के कुछ कथन भी दोहराए।

    सच्चाई यह है कि क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान का ही सऊदी सरकारी मीडिया पर क़ब्ज़ा है और वह तलवार के ज़ोर पर उनसे अपनी मर्ज़ी से काम लेते हैं। वह सऊदी अरब के 300 से अधिक प्रभावी लोगों  और शाही परिवार के सदस्यों को रिट्ज़  होटल में हिरासत में रख चुके हैं। इस लिए हो सकता है कि उन्होंने सऊदी मीडिया को भी आदेश दिया हो कि वह यूएई और बहरैन द्वारा इस्राईल से संबंध बनाने के उस क़दम का समर्थन करें जिसका उल्लेख सऊदी नरेश न न तो महासभा के अधिवेशन के अपने भाषण में किया है और न ही उनकी अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक के बयान में।

    अंत में हम एक कहावत का उल्लेख करके अपना संपादकीय खत्म करते हैं, कहते हैं कि धुंआ, आग के बिना नहीं होता। वैसे भी मीडिया रिपोर्टों में भी दोनों में मतभेद की बात कही गयी है जिनमें अमरीकी समाचार पत्र वॉल स्ट्री जरनल भी है जो राष्ट्रपति ट्रम्प से निकट समझा जाता है और कभी क्राउन प्रिंस बिन सलमान से भी  निकट था और शायद अब भी हो। इस समाचार पत्र ने भी सऊदी नरेश और क्राउन प्रिंस में मतभेद की बात की है। Q.A.

 

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