Sep २६, २०२० १९:३७ Asia/Kolkata
  • अरब देशों में इतना अंतर क्यों है? इमारात और बहरैन इस्राईल की गोद में, अलजीरिया खुलकर फ़िलिस्तीन के साथ!

अलजीरिया के राष्ट्रपति अब्दुल मजीद तबून शायद एकमात्र अरब शासक हैं जिन्होंने बड़ी मर्दानगी और साहस से अपना पक्ष रखते हुए इस्राईल से दोस्ती के लिए अरब देशों के बीच जारी होड़ की निंदा की।

राष्ट्र संघ महासभा के अधिवेशन को संबोधित करते हुए तबून ने कहा कि फ़िलिस्तीनी राष्ट्र को यह अधिकार है कि अपने देश की स्थापना करे जिसकी राजधानी बैतुल मुक़द्दस हो और इस अधिकार पर किसी से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं उन्होंने इसके बाद अलजीरियाई पत्रकारों के सम्मेलन में यही बात दोहराई और साथ ही इस्राईल से शांति समझौते के लिए अरब सरकारों में मची होड़ की कड़े शब्दों में निंदा भी की।

अलजीरिया की ओर से इस प्रकार का साहसी और दो टूक स्टैंड कोई नई बात नहीं है। इस देश ने हमेशा खुलकर फ़िलिस्तीन का साथ दिया है। इस देश के लोगों ने इस्राईल के ख़िलाफ़ फ़िलिस्तीनियों की जंग में हिस्सा भी लिया। मगर इस समय जब अरब सरकारें इस्राईल से दोस्ती के लिए पागल हुई जा रही हैं तो अलजीरिया की सरकार का अपने पिछले गौरवपूर्ण स्टैंड पर क़ायम रहना सराहनीय है इसके लिए बड़ी बहादुरी की ज़रूरत होती है।

अलजीरिया अरब लीग के उन गिने चुने देशों में था जिसने सीरिया को इस संगठन से निकाले जाने का विरोध किया और इस देश की राष्ट्रीय एकता व अखंडता का समर्थन किया आज भी वह अरब लीग में सीरिया की वापसी की मांग कर रहा है।

अब ज़रा इस स्टैंड को सामने रखते हुए इमारात, बहरैन, मिस्र और सऊदी अरब के अधिकारियों के इस्राईली संबंधी बयानों पर एक नज़र डाल लीजिए।

साभार रायुल यौम

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